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हे राम! भूला दिया बापू का शहीदी दिवस
Thu, 09 Nov 2023 07:05 PM IST
Anonymous User
ब्यूरो, अमर उजाला मैनपुरी
ब्यूरो, अमर उजाला मैनपुरी
Published by: Anonymous User
Updated Thu, 09 Nov 2023 07:05 PM IST
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मैनपुरी। देश को आजाद कराने के लिए और स्वाधीनता को वजूद में लाने के लिये जिसने आखिरी सांस तक संघर्ष किया। अनुशासन और सत्याग्रह के चलते भारत में स्वाधीनता का सवेरा लाने वाले गांधी को आधुनिकता की होड़ ने बिसरा दिया है। महात्मा की विचारधारा और गांधी के बलिदान पर आपाधापी की धूल जम गई है। बापू के बलिदान दिवस पर कई कार्यक्रम होते थे। मगर, अब आपाधापी कहें या आधुनिकता की चकाचौंध, लोगों ने इसे भी मनाना मुनासिब नहीं समझा। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहर की पॉश कालोनी तक महात्मा गांधी की प्रतिमाएं जहां सूनी पड़ी रहीं वहीं नगर पालिका परिसर में शहीद प्रतिमाओं और स्थापित कारगिल शहीद स्तंभ पर कोई दो फूल चढ़ाने भी नहीं पहुंचा।
महात्मा गांधी के बलिदान दिवस को मनाने की खास परंपरा रही है। 30 जनवरी को पूर्वाह्न 11 बजे सायरन बजता था। सायरन की आवाज सुनकर स्कूली बच्चे, शिक्षक विद्यालयों में तो दफ्तरों में अधिकारी व कर्मचारी खड़े हो जाते थे। ‘वैष्णवजन तो तेने कहिए जे पीर पराई जाने रे’
शहीदी दिवस पर शुक्रवार को ‘अमर उजाला’ टीम ने गांधी की प्रतिमाओं और शहीद स्तंभ की स्थिति का जायजा लिया। मोहल्ला ककरइया में गांधी प्रतिमा पर फूलमाला चढ़ाना तो दूर सफाई तक नहीं कराई गई। प्रतिमा की सुरक्षा उसके चारों और जाली भी नहीं बनवाई गई। स्थानीय निवासियों का कहना था कि नगर पालिका अध्यक्ष ने दो अक्तूबर को प्रतिमा के चारों ओर जाली लगवाने का आश्वासन दिया था लेकिन अभी कुछ नहीं हुआ। नगर पालिका परिसर में गांधी प्रतिमा जिस स्थान पर स्थापित है उसका गेट भी क्षतिग्रस्त था। प्रतिमा से गांधी जी का चश्मा भी गायब था।
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शहीद स्तंभ भी बदहाल
नगर पालिका परिसर में कारगिल में शहीद हुए जवानों के लिए शहीद स्तंभ बनवाया गया है। इस स्तंभ के चारों ओर गंदगी थी। सब्जी वाले पास में ही सब्जी बेच रहे थे। वहां रहने वाले लोग स्तंभ के समीप ही बर्तन धो रहे थे। गांधी आश्रम उत्पादन केंद्र खरगजीत नगर पर भी कोई कार्यक्रम नहीं हुआ। केंद्र के लेखाकार रामचंद्र ने बताया कि कार्यक्रम क्षेत्रीय गांधी आश्रम शिकोहाबाद में हो रहा है।
छात्रों को नहीं जानकारी
सीबीएसई के अधिकांश छात्र-छात्राओं को यह जानकारी नहीं थी कि 30 जनवरी को क्या है। जब उनसे महात्मा गांधी के बारे में पूछा गया तो सिर्फ इतना ही बता पाए कि महात्मा गांधी राष्ट्रपिता है। कक्षा 10 के छात्र अभिषेक कुमार का कहना था कि गांधी जयंती दो अक्तूबर को मनाई जाती है लेकिन उनकी पुण्यतिथि की जानकारी नहीं है। कक्षा नौ की छात्रा रिया सिंह ने बताया कि महात्मा गांधी ने देश आजाद कराया है। उन्होंने हिंसा या अहिंसा का रास्ता अपनाया पर वह कुछ जवाब नहीं दे सकी।
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महात्मा गांधी के बलिदान दिवस को मनाने की खास परंपरा रही है। 30 जनवरी को पूर्वाह्न 11 बजे सायरन बजता था। सायरन की आवाज सुनकर स्कूली बच्चे, शिक्षक विद्यालयों में तो दफ्तरों में अधिकारी व कर्मचारी खड़े हो जाते थे। ‘वैष्णवजन तो तेने कहिए जे पीर पराई जाने रे’
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शहीदी दिवस पर शुक्रवार को ‘अमर उजाला’ टीम ने गांधी की प्रतिमाओं और शहीद स्तंभ की स्थिति का जायजा लिया। मोहल्ला ककरइया में गांधी प्रतिमा पर फूलमाला चढ़ाना तो दूर सफाई तक नहीं कराई गई। प्रतिमा की सुरक्षा उसके चारों और जाली भी नहीं बनवाई गई। स्थानीय निवासियों का कहना था कि नगर पालिका अध्यक्ष ने दो अक्तूबर को प्रतिमा के चारों ओर जाली लगवाने का आश्वासन दिया था लेकिन अभी कुछ नहीं हुआ। नगर पालिका परिसर में गांधी प्रतिमा जिस स्थान पर स्थापित है उसका गेट भी क्षतिग्रस्त था। प्रतिमा से गांधी जी का चश्मा भी गायब था।
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शहीद स्तंभ भी बदहाल
नगर पालिका परिसर में कारगिल में शहीद हुए जवानों के लिए शहीद स्तंभ बनवाया गया है। इस स्तंभ के चारों ओर गंदगी थी। सब्जी वाले पास में ही सब्जी बेच रहे थे। वहां रहने वाले लोग स्तंभ के समीप ही बर्तन धो रहे थे। गांधी आश्रम उत्पादन केंद्र खरगजीत नगर पर भी कोई कार्यक्रम नहीं हुआ। केंद्र के लेखाकार रामचंद्र ने बताया कि कार्यक्रम क्षेत्रीय गांधी आश्रम शिकोहाबाद में हो रहा है।
छात्रों को नहीं जानकारी
सीबीएसई के अधिकांश छात्र-छात्राओं को यह जानकारी नहीं थी कि 30 जनवरी को क्या है। जब उनसे महात्मा गांधी के बारे में पूछा गया तो सिर्फ इतना ही बता पाए कि महात्मा गांधी राष्ट्रपिता है। कक्षा 10 के छात्र अभिषेक कुमार का कहना था कि गांधी जयंती दो अक्तूबर को मनाई जाती है लेकिन उनकी पुण्यतिथि की जानकारी नहीं है। कक्षा नौ की छात्रा रिया सिंह ने बताया कि महात्मा गांधी ने देश आजाद कराया है। उन्होंने हिंसा या अहिंसा का रास्ता अपनाया पर वह कुछ जवाब नहीं दे सकी।