फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Mainpuri News ›   Government centers wet paddy being purchased

सरकारी केंद्रों पर नहीं खरीदा जा रहा नमी वाला धान

Fri, 02 Dec 2016 11:36 PM IST
अमर उजाला ब्यूूरो
अमर उजाला ब्यूूरो Updated Fri, 02 Dec 2016 11:36 PM IST
विज्ञापन
Government centers wet paddy being purchased
सरकारी केंद्रों पर नहीं खरीदा जा रहा नमी वाला धान - फोटो : अमर उजाला
पहले तो नोट बंदी के चलते धान नहीं बिका, फिर मंडी बंद हो गई और अब कोहरे के चलते धान में नमी बढ़ गई है। इसके चलते भाव गिर गए हैं। मजबूरन किसानों को अब कम कीमतों में धान बेचना पड़ रहा है।
विज्ञापन

 आठ नवंबर को नोट बंदी से पहले सरकार ने सामान्य धान का खरीद मूल्य 1450 रुपये तय किया था। पी 10 का खरीद मूल्य 2100 और सुगंधा की कीमत 1800 रुपये प्रति क्विंटल तक थी। आठ नवंबर को 500-1000 रुपये का नोट बंद होने के बाद आढ़तियों ने विरोध में मंडी बंद कर दी। परिणामस्वरूप धान की खरीद बंद हो गई। किसानों ने सोचा कि जब हालात सामान्य हो जाएंगे तो धान बेच लेंगे। बीच में मंडी थोड़े दिन के लिए खुली लेकिन खरीद नाम मात्र के लिए हुई। नकदी की कमी के कारण चार दिन के लिए आढ़तियों ने मंडी फिर से बंद कर दी। परिणामस्वरूप किसान फिर से धान नहीं बेच पाए। इसी दौरान पिछले तीन दिनों से लगातार कोहरा पड़ना शुरू हो गया। इसका सबसे ज्यादा खामियाजा किसानों को ही भुगतना पड़ा। कोहरे के कारण धान में नमी की मात्र बहुत अधिक बढ़ गई। सरकारी मानकों के अनुसार धान में 14 प्रतिशत से अधिक नमी नहीं होनी चाहिए। लेकिन 22 प्रतिशत तक नमी वाली धान मंडी में पहुंच रही है। इसके चलते सरकारी केंद्रों पर धान की खरीद बिल्कुल बंद पड़ी है। वहीं आढ़तियों ने भी धान में नमी होने के चलते भाव गिरा दिए हैं।
विज्ञापन

आढ़तिया संजीव यादव ने बताया कि चार दिन की बंदी के बाद मंडी शुक्रवार को खुली है। जो किसान धान लेकर आ रहे हैं उसमें नमी अधिक है। इसके चलते खरीद भाव कम हो गए हैं। वहीं आढ़ती सौरभ गुप्ता ने कहा कि नमी अधिक होने के कारण धान के भाव गिर गए हैं। नमी वाले धान को समर्थन मूल्य पर नहीं खरीदा जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

 वहीं मंडी में धान बेचने के लिए आए किसान सतेंद्र का कहना है कि नोट बंदी ने तो हमें बर्बादी के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है। पहले नोट बंदी के कारण धान नहीं बेच सके और अब आढ़तिया नमी अधिक होने के कारण पूरे भाव नहीं दे रहे हैं। यही दुखड़ा एक अन्य किसान रघुवीर सिंह ने सुनाया। उन्होंने बताया कि धान कटे एक माह से अधिक हो चुका है। पहले नोट बंदी के कारण मंडी बंद रही। अब मंडी खुली है तो कोहरे के कारण नमी अधिक होने के चलते पूरे भाव नहीं मिल रहे हैं।


सौ रुपये तक गिरे भाव
 मंडी में सामान्य धान का समर्थन मूल्य 1450 रुपये तय है। नोट बंदी से पहले सामान्य धान को आढ़तिया 12 सौ रुपये प्रति क्विंटल पर खरीद रहे थे। अब नमी के चलते 1125 रुपये प्रति क्विंटल खरीदी जा रही है। वहीं सुगंधा की कीमत 1800 से गिरकर 1700 रुपये पर आ गई है। इसी प्रकार पी 10 के भाव भी 2100 से गिरकर 2000 रुपये पर आ गए हैं।

चेक से हो रहा भुगतान
आढ़तियों ने बताया कि कैश की कमी के चलते अब वो सारा भुगतान चेक के जरिए कर रहे हैं। जिन किसानों का खाता नहीं है उनसे खाता खुलवाने की बात कही जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed