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UP: इंसानों की लड़ाई में यहां कैद हैं भगवान, सावन में शिवजी का जलाभिषेक तक नहीं हुआ; जानें पूरा मामला
Wed, 06 Aug 2025 02:16 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी
संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Wed, 06 Aug 2025 02:16 PM IST
सार
मैनपुरी के किशनी स्थित रामजानकी मंदिर पर ताला लटका हुआ है। इंसानों की लड़ाई में भगवान मंदिर में कैद हैं। सावन के पवित्र महीने में भी इस मंदिर के दरवाजे नहीं खुल सके।
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राम जानकी मंदिर, किशनी, मैनपुरी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
मैनपुरी के किशनी क्षेत्र के बिधूना चौराहे पर स्थित रामजानकी मंदिर पिछले दो महीने से प्रशासन के ताले में बंद है, जिससे श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश है। सावन जैसे पवित्र महीने में भी भगवान शिव का अभिषेक नहीं हो पा रहा है। नाराज श्रद्धालुओं ने एसडीएम से मंदिर का ताला खुलवाने और एक नए पुजारी की व्यवस्था कर पूजा फिर से शुरू कराने की मांग की है।
एसडीएम गोपाल शर्मा का कहना है कि उनके आदेश के खिलाफ कमिश्नरी में वाद चल रहा है। उन्होंने कहा कि इस मामले का निपटारा होने के बाद ही कार्रवाई संभव है। बता दें कि 7 जून को मंदिर के महंत सुरेंद्र दास की मृत्यु के बाद उनके समर्थकों और मंदिर में रह रहे रघुनंदन दास के समर्थकों के बीच विवाद हुआ। सुरेंद्र दास के समर्थकों ने शव को मंदिर के गेट पर रखकर रघुनंदन दास को बाहर निकालने की मांग की, जबकि दूसरे पक्ष ने शव की अंत्येष्टि कराने की कोशिश की थी।
दोनों पक्षों में जमकर पत्थरबाजी हुई थी। पुलिस ने दोनों पक्षों पर कार्रवाई की और एसडीएम की मौजूदगी में सुरेंद्र दास का अंतिम संस्कार करा दिया। इसके बाद एडीएम के आदेश पर मंदिर के कार्यवाहक अध्यक्ष तहसीलदार घासीराम ने रघुनंदन दास को बाहर निकालकर मंदिर के मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया। तब से यह शिव मंदिर बंद है।
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मंदिर के पूर्व महंत ने लेखपाल की शिकायत की
राम जानकी मंदिर के पूर्व महंत रघुनंदन दास ने एसडीम गोपाल शर्मा से लिखित शिकायत की है। बताया की एक जमीन राम जानकी मंदिर के नाम खतौनी में दर्ज है। स्थानीय लेखपाल द्वारा राम जानकी मंदिर की जमीन को तीन भागों में विभाजित कर दिया है। राम जानकी मंदिर का 1/3 अंश श्री रामचंद्र जी महाराज, 1/3 अंश श्री जानकी माता मंदिर के नाम तथा मंदिर के सरवराकार सुरेंद्र दास चेला हरभजन दास के नाम 1/3 अंश निर्धारित कर दिए हैं। जबकि भूमि राम जानकी माता के नाम दर्ज है। उन्होंने मांग की कि उक्त मंदिर श्री राम जानकी के नाम दर्ज की जाए। एसडीएम गोपाल शर्मा ने तहसीलदार को कोई विरासत, वसीयत दर्ज करने, बैनामा के द्वारा नामांतरण करने पर रोक लगाकर लेखपाल से स्पष्टीकरण मांगा है।
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एसडीएम गोपाल शर्मा का कहना है कि उनके आदेश के खिलाफ कमिश्नरी में वाद चल रहा है। उन्होंने कहा कि इस मामले का निपटारा होने के बाद ही कार्रवाई संभव है। बता दें कि 7 जून को मंदिर के महंत सुरेंद्र दास की मृत्यु के बाद उनके समर्थकों और मंदिर में रह रहे रघुनंदन दास के समर्थकों के बीच विवाद हुआ। सुरेंद्र दास के समर्थकों ने शव को मंदिर के गेट पर रखकर रघुनंदन दास को बाहर निकालने की मांग की, जबकि दूसरे पक्ष ने शव की अंत्येष्टि कराने की कोशिश की थी।
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दोनों पक्षों में जमकर पत्थरबाजी हुई थी। पुलिस ने दोनों पक्षों पर कार्रवाई की और एसडीएम की मौजूदगी में सुरेंद्र दास का अंतिम संस्कार करा दिया। इसके बाद एडीएम के आदेश पर मंदिर के कार्यवाहक अध्यक्ष तहसीलदार घासीराम ने रघुनंदन दास को बाहर निकालकर मंदिर के मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया। तब से यह शिव मंदिर बंद है।
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मंदिर के पूर्व महंत ने लेखपाल की शिकायत की
राम जानकी मंदिर के पूर्व महंत रघुनंदन दास ने एसडीम गोपाल शर्मा से लिखित शिकायत की है। बताया की एक जमीन राम जानकी मंदिर के नाम खतौनी में दर्ज है। स्थानीय लेखपाल द्वारा राम जानकी मंदिर की जमीन को तीन भागों में विभाजित कर दिया है। राम जानकी मंदिर का 1/3 अंश श्री रामचंद्र जी महाराज, 1/3 अंश श्री जानकी माता मंदिर के नाम तथा मंदिर के सरवराकार सुरेंद्र दास चेला हरभजन दास के नाम 1/3 अंश निर्धारित कर दिए हैं। जबकि भूमि राम जानकी माता के नाम दर्ज है। उन्होंने मांग की कि उक्त मंदिर श्री राम जानकी के नाम दर्ज की जाए। एसडीएम गोपाल शर्मा ने तहसीलदार को कोई विरासत, वसीयत दर्ज करने, बैनामा के द्वारा नामांतरण करने पर रोक लगाकर लेखपाल से स्पष्टीकरण मांगा है।