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थाने पर तिरंगा फहराकर ली थी एक दिन की आजादी
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
Updated Mon, 08 Aug 2016 11:02 PM IST
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नौ अगस्त 1942 को गांधी जी द्वारा शुरू किए गए भारत छोड़ो आंदोलन में जिले के क्रांतिकारी ही नहीं आम जनता भी आगे आई। बेवर थाने पर यहां के क्रांतिकारियों ने 14 अगस्त 1942 को तिरंगा फहराकर एक दिन के लिए बेवर को आजाद कराया। विदेशी कपड़ों की जगह-जगह होली जलाकर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ मोर्चा खोला। बेवर में थाने पर मौजूद क्रांतिकारियों पर 15 अगस्त को अंग्रेज सैनिकों द्वारा की गई फायरिंग से एक छात्र सहित तीन क्रांतिकारी शहीद हो गए थे।
महात्मा गांधी द्वारा नौ अगस्त को भारत छोड़ो आंदोलन की घोषणा के बाद आंदोलन से जुड़कर युवाओं और किसानों ने अंग्रेजों के खिलाफ बगावत का विगुल फूंक दिया था। शहर और कस्बों के अलावा देहातों में भी विदेशी कपड़ों की होली जलाई गई। लोगों ने घरों से विदेशी वस्त्र निकालकर आग के हवाले करने को दे दिए। नगर के बुजुर्ग लल्ला चौबे कहते हैं कि भारत छोड़ो आंदोलन ने हर किसी में देशभक्ति का जज्बा पैदा कर दिया था।
बेवर क्षेत्र की जनता आजादी की लड़ाई में दीवानी होकर उमड़ पड़ी थी। बेवर निवासी रामबाबू चतुर्वेदी कहते हैं कि नौ अगस्त को शुरू हुआ भारत छोड़ो आंदोलन बेवर में 14 अगस्त तक क्रांति में परिवर्तित हो गया। 14 अगस्त को बेवर थाने पर कब्जा कर तिरंगा फहरा दिया गया। एक दिन के लिए बेवर अंग्रेजों के जुल्म से मुक्त हो गया। 15 अगस्त को बाहर से आई अंग्रेज पुलिस और सेना ने बेवर थाने पर मौजूद क्रांतिकारियों पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। अंग्रेजी पुलिस और सेना का मुकाबला करते हुए बेवर के छात्र कृष्ण कुमार के अलावा सीताराम गुप्ता तथा जमुना प्रसाद त्रिपाठी सीनों पर गोलियां खाकर शहीद हो गए। बेवर का जर्जर हो चला पुराना थाना भवन और शहीद स्मारक इन तीनों शहीदों की शहादत की मूक गवाही देते हैं।
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फोटो-
पुराने थाने को बनाया जाए स्मारक
मैनपुरी। देश की आजादी में जिले के योगदान को नकारा नहीं जा सकता। स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े स्मारक और प्राचीन स्थल भी उपेक्षा के शिकार हैं। जिस बेवर थाने पर तिरंगा फहराने के बाद छात्र समेत तीन ने शहादत पाई थी वह थाना जर्जर हाल में है। नया थाना बनने के बाद पुराने की देखभाल तक नहीं की जा रही। बेवर निवासी इंद्रपाल यादव, रामऔतार दीक्षित, महेशचंद्र शुक्ला, सच्चिदानंद चतुर्वेदी, सत्यदेव गुप्ता, हाजी इदरीश अली का कहना है कि थाने को स्मारक के रूप में परिवर्तित कराया जाना चाहिए।
पूरे साल शहीद रहते उपेक्षित
बेवर। शहीदों की याद में रामलीला मैदान में हर साल 23 जनवरी से शहीद मेला लगता है। बेवर के शहीद जमुना प्रसाद त्रिपाठी, कृष्ण कुमार एवं सीताराम गुप्ता की याद में बने शहीद स्मारक की याद शहीद मेले पर ही आती है। उसके बाद पूरे साल स्मारक और शहीद परिवार उपेक्षित ही रहते हैं।
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महात्मा गांधी द्वारा नौ अगस्त को भारत छोड़ो आंदोलन की घोषणा के बाद आंदोलन से जुड़कर युवाओं और किसानों ने अंग्रेजों के खिलाफ बगावत का विगुल फूंक दिया था। शहर और कस्बों के अलावा देहातों में भी विदेशी कपड़ों की होली जलाई गई। लोगों ने घरों से विदेशी वस्त्र निकालकर आग के हवाले करने को दे दिए। नगर के बुजुर्ग लल्ला चौबे कहते हैं कि भारत छोड़ो आंदोलन ने हर किसी में देशभक्ति का जज्बा पैदा कर दिया था।
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बेवर क्षेत्र की जनता आजादी की लड़ाई में दीवानी होकर उमड़ पड़ी थी। बेवर निवासी रामबाबू चतुर्वेदी कहते हैं कि नौ अगस्त को शुरू हुआ भारत छोड़ो आंदोलन बेवर में 14 अगस्त तक क्रांति में परिवर्तित हो गया। 14 अगस्त को बेवर थाने पर कब्जा कर तिरंगा फहरा दिया गया। एक दिन के लिए बेवर अंग्रेजों के जुल्म से मुक्त हो गया। 15 अगस्त को बाहर से आई अंग्रेज पुलिस और सेना ने बेवर थाने पर मौजूद क्रांतिकारियों पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। अंग्रेजी पुलिस और सेना का मुकाबला करते हुए बेवर के छात्र कृष्ण कुमार के अलावा सीताराम गुप्ता तथा जमुना प्रसाद त्रिपाठी सीनों पर गोलियां खाकर शहीद हो गए। बेवर का जर्जर हो चला पुराना थाना भवन और शहीद स्मारक इन तीनों शहीदों की शहादत की मूक गवाही देते हैं।
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पुराने थाने को बनाया जाए स्मारक
मैनपुरी। देश की आजादी में जिले के योगदान को नकारा नहीं जा सकता। स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े स्मारक और प्राचीन स्थल भी उपेक्षा के शिकार हैं। जिस बेवर थाने पर तिरंगा फहराने के बाद छात्र समेत तीन ने शहादत पाई थी वह थाना जर्जर हाल में है। नया थाना बनने के बाद पुराने की देखभाल तक नहीं की जा रही। बेवर निवासी इंद्रपाल यादव, रामऔतार दीक्षित, महेशचंद्र शुक्ला, सच्चिदानंद चतुर्वेदी, सत्यदेव गुप्ता, हाजी इदरीश अली का कहना है कि थाने को स्मारक के रूप में परिवर्तित कराया जाना चाहिए।
पूरे साल शहीद रहते उपेक्षित
बेवर। शहीदों की याद में रामलीला मैदान में हर साल 23 जनवरी से शहीद मेला लगता है। बेवर के शहीद जमुना प्रसाद त्रिपाठी, कृष्ण कुमार एवं सीताराम गुप्ता की याद में बने शहीद स्मारक की याद शहीद मेले पर ही आती है। उसके बाद पूरे साल स्मारक और शहीद परिवार उपेक्षित ही रहते हैं।