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कम बारिश ने बढ़ाई किसानों की चिंता
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
Updated Thu, 01 Sep 2016 11:19 PM IST
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कटेहरी स्थित गौरा बसंतपुर में गुरुवार को गन्ने के खेत में लगी आग।
- फोटो : अमर उजाला
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जिले में अभी तक मानक से आधी भी बारिश नहीं हुई है। बारिश कम होने के चलते किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें आ गई हैं। अब वो सिंचाई के लिए नलकूप और नहरों पर ही निर्भर हैं। सिंचाई के अभाव में ही रोग लगने से फसलों में नुकसान होता है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि अभी तक फसलों को नुकसान नहीं है लेकिन यदि यही हाल रहा तो पैदावार प्रभावित हो सकती है।
जिले में इस समय बाजरा, तिल, मक्का, धान, मूंगफली की फसलें की जा रही हैं। इन फसलों के लिए सितंबर तक 467 मिमी बारिश की जरूरत होती है। इस साल 28 अगस्त तक केवल 289.03 मिमी बारिश ही हुई है। जबकि वर्ष 2015 में 28 अगस्त तक 225.04 मिमी बारिश हुई थी। इसके चलते जिले के किसानो परेशान हैं। बारिश नहीं होने से सिंचाई के कारण लागत बढ़ रही है। किसान राकेश यादव का कहना है कि बारिश कम होने के चलते डीजल पंपों से सिंचाई करनी पड़ रही है। इससे लागत बढ़ रही है। यदि बारिश अच्छी होती तो लागत कम हो जाती है। उन्होंने वर्तमान में धान की फसल की हुई है। उन्होंने कहा कि बारिश कम होने से जहां धान सूख सकता है वहीं बाजरा और तिल की फसलों को नुकसान होता है। कृषि अधिकारी का कहना है कि बारिश के बाद तेज धूप निकलने पर फसलें तब प्रभावित होती हैं जब सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं होते हैं। किसानों के पास नलकूप और नहरों से सिंचाई के लिए पर्याप्त साधन हैं। इसके चलते किसानों को ज्यादा परेशान नहीं होगी।
फसल क्षेत्रफल
बाजरा 18800 हैक्टेयर
तिल 120 हैक्टेयर
मक्का 61000 हैक्टेयर
धान 73400 हैक्टेयर
मूंगफली 812 हैक्टेयर
बारिश के बाद तेज धूप से ही फसलों में रोग लगता है। सिंचाई का अभाव भी एक प्रमुख कारण होता है। मगर जिले में ऐसा कुछ भी नहीं है। फिर भी अगर किसी किसान को समस्या आती है तो कृषि अधिकारी अथवा कृषि रक्षा अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।
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- पीसी विश्वकर्मा, जिला कृषि अधिकारी
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जिले में इस समय बाजरा, तिल, मक्का, धान, मूंगफली की फसलें की जा रही हैं। इन फसलों के लिए सितंबर तक 467 मिमी बारिश की जरूरत होती है। इस साल 28 अगस्त तक केवल 289.03 मिमी बारिश ही हुई है। जबकि वर्ष 2015 में 28 अगस्त तक 225.04 मिमी बारिश हुई थी। इसके चलते जिले के किसानो परेशान हैं। बारिश नहीं होने से सिंचाई के कारण लागत बढ़ रही है। किसान राकेश यादव का कहना है कि बारिश कम होने के चलते डीजल पंपों से सिंचाई करनी पड़ रही है। इससे लागत बढ़ रही है। यदि बारिश अच्छी होती तो लागत कम हो जाती है। उन्होंने वर्तमान में धान की फसल की हुई है। उन्होंने कहा कि बारिश कम होने से जहां धान सूख सकता है वहीं बाजरा और तिल की फसलों को नुकसान होता है। कृषि अधिकारी का कहना है कि बारिश के बाद तेज धूप निकलने पर फसलें तब प्रभावित होती हैं जब सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं होते हैं। किसानों के पास नलकूप और नहरों से सिंचाई के लिए पर्याप्त साधन हैं। इसके चलते किसानों को ज्यादा परेशान नहीं होगी।
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फसल क्षेत्रफल
बाजरा 18800 हैक्टेयर
तिल 120 हैक्टेयर
मक्का 61000 हैक्टेयर
धान 73400 हैक्टेयर
मूंगफली 812 हैक्टेयर
बारिश के बाद तेज धूप से ही फसलों में रोग लगता है। सिंचाई का अभाव भी एक प्रमुख कारण होता है। मगर जिले में ऐसा कुछ भी नहीं है। फिर भी अगर किसी किसान को समस्या आती है तो कृषि अधिकारी अथवा कृषि रक्षा अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।
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- पीसी विश्वकर्मा, जिला कृषि अधिकारी