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सम सप्तक योग में होगी मकर संक्रांति
Thu, 09 Nov 2023 07:05 PM IST
Anonymous User
ब्यूरो, अमर उजाला मैनपुरी
ब्यूरो, अमर उजाला मैनपुरी
Published by: Anonymous User
Updated Thu, 09 Nov 2023 07:05 PM IST
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मैनपुरी। सूर्य के मकर राशि पर संक्रमण करने का दिन मकर संक्रांति पर्व के रूप में मनाया जाता है। मकर संक्रांति को 83 साल बाद दुर्लभ संयोग बन रहा है। मकर संक्रांति पर मकर राशि के सूर्य के साथ शुक्र, बुध का योग बन रहा है। जिसे सम सप्तक योग कहा जाता है। इसे विशेष फलदायी बताया जा रहा है। स्नान, दान-पुण्य का पर्व इस बार 14 को नहीं 15 जनवरी को मनाया जाएगा।
मकर संक्रांति पर खिचड़ी और तिल के पदार्थ खाने और दान का महात्म्य है। मान्यता है कि नदियों में स्नान और तीर्थ स्थलों पर दर्शन अनंत पुण्य फल की प्राप्ति होती है। ज्योतिषाचार्य पंडित जागेश्वर दयाल पांडेय बताते हैं कि 83 साल बाद मकर संक्रांति पर सम सप्तक योग बन रहा है। मकर संक्रांति पर मकर राशि में सूर्य के साथ शुक्र, बुध का योग बन रहा है जो विशेष फलदायी है। मकर संक्रांति के दिन भगवान शंकर के सामने हाथों मेें काले तिल और गंगाजल लेकर संकल्प करें और अपनी गलतियों की क्षमा याचना करें।
पंडित राजकुमार मिश्रा ने बताया कि मकर संक्रांति सूर्य का पर्व है। 14 जनवरी को शाम 7:29 बजे से सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेगा। जबकि सूर्य इससे पूर्व ही अस्त हो जाएगा। ऐसे में 15 जनवरी को सूर्योदय के साथ स्नान-दान आदि किया जाना शुभ होगा। तिल खाना और दान करना शुभ माना जाता है।
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शीत रोग निवारण के लिए तिल उपयोगी
वैद्य संजीव मिश्र का कहना है कि तिल के सेवन, तिल मिश्रित जल से स्नान, तिल का उबटन लगाने, तिल-गुड़ के लड्डू खाने और दान करने से पापों से मुक्ति मिलती है। मकर संक्रांति पर खिचड़ी एवं तिल-गुड़ खाने और दान करने की सदियों पुरानी परंपरा आज भी कायम है।
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मकर संक्रांति पर खिचड़ी और तिल के पदार्थ खाने और दान का महात्म्य है। मान्यता है कि नदियों में स्नान और तीर्थ स्थलों पर दर्शन अनंत पुण्य फल की प्राप्ति होती है। ज्योतिषाचार्य पंडित जागेश्वर दयाल पांडेय बताते हैं कि 83 साल बाद मकर संक्रांति पर सम सप्तक योग बन रहा है। मकर संक्रांति पर मकर राशि में सूर्य के साथ शुक्र, बुध का योग बन रहा है जो विशेष फलदायी है। मकर संक्रांति के दिन भगवान शंकर के सामने हाथों मेें काले तिल और गंगाजल लेकर संकल्प करें और अपनी गलतियों की क्षमा याचना करें।
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पंडित राजकुमार मिश्रा ने बताया कि मकर संक्रांति सूर्य का पर्व है। 14 जनवरी को शाम 7:29 बजे से सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेगा। जबकि सूर्य इससे पूर्व ही अस्त हो जाएगा। ऐसे में 15 जनवरी को सूर्योदय के साथ स्नान-दान आदि किया जाना शुभ होगा। तिल खाना और दान करना शुभ माना जाता है।
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वैद्य संजीव मिश्र का कहना है कि तिल के सेवन, तिल मिश्रित जल से स्नान, तिल का उबटन लगाने, तिल-गुड़ के लड्डू खाने और दान करने से पापों से मुक्ति मिलती है। मकर संक्रांति पर खिचड़ी एवं तिल-गुड़ खाने और दान करने की सदियों पुरानी परंपरा आज भी कायम है।