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दूर-दूर से मत्था टेकने आते हैं श्रद्धालु
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
Updated Fri, 08 Apr 2016 11:13 PM IST
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आस्था
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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नवरात्र के पहले दिन से माता शीतला देवी मंदिर में श्रद्धालु अपनी हाजिरी लगाने के लिए उमड़ते हैं। करीब तीन सौ साल पुराने इस मंदिर का इतिहास आस्था और विश्वास की अनूठी कहानी बयां करता है। यह जिले के सबसे बड़े देवी मंदिरों में से एक है। यहां पर दूर-दूर से लोग माता के दरबार में मत्था टेकने आते हैं। वहीं चैत्र और शारदीय नवरात्र में यहां बड़े पैमाने पर लोग नेजा चढ़ाने आते हैं। साथ ही मेला भी लगता है।
जिला मुख्यालय से एक किलोमीटर दूर स्थित है प्रसिद्ध माता शीतला देवी मंदिर। यहां नवरात्रों में पूजा-अर्चन का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि करीब तीन सौ वर्ष पूर्व मंदिर अस्तित्व में आया था, मगर यहां माता की मूर्ति कब और किसने रखी इसका कोई तथ्यात्मक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। आस्था के इस मंदिर को लेकर लोगों में कई कहानियां प्रचलित हैं। किवदंति है कि कभी एक नास्तिक राजा ने मंदिर माता के अस्तित्व को लेकर सवाल किया था। उक्त राजा के पत्नी के दस वर्ष बीतने के बाद भी कोई संतान नहीं हुई। आखिर में पत्नी सहित जब राजा स्वयं माता शीतला देवी मंदिर में माथा टेकने पहुंचा तो उसे एक पुत्र और एक पुत्री की प्राप्ति हुई। संतान प्राप्ति के बाद राजा ने माता के मंदिर में एक विशाल छत्र भी भेंट किया। शीतला देवी मंदिर के बारे में ये भी मान्यता है कि यहां जो भी सच्चे दिल से मन्नत मांगता है। मातारानी उसकी इच्छा जरूर पूरी करती हैं। तभी तो यहां आने वाले भक्तों में देशभर के लोग भी शामिल हैं।
ताजा मामला है। मोहल्ला अवध नगर निवासी एक व्यक्ति ने बीते माह मंदिर में नेजा चढ़ाया। पूछने पर बताया कि उसकी बहू को पुत्र की प्राप्ति मातारानी के आशीर्वाद से हुई है। इसलिए वह मंदिर में नेजा चढ़ाने जा रहे हैं।
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जिला मुख्यालय से एक किलोमीटर दूर स्थित है प्रसिद्ध माता शीतला देवी मंदिर। यहां नवरात्रों में पूजा-अर्चन का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि करीब तीन सौ वर्ष पूर्व मंदिर अस्तित्व में आया था, मगर यहां माता की मूर्ति कब और किसने रखी इसका कोई तथ्यात्मक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। आस्था के इस मंदिर को लेकर लोगों में कई कहानियां प्रचलित हैं। किवदंति है कि कभी एक नास्तिक राजा ने मंदिर माता के अस्तित्व को लेकर सवाल किया था। उक्त राजा के पत्नी के दस वर्ष बीतने के बाद भी कोई संतान नहीं हुई। आखिर में पत्नी सहित जब राजा स्वयं माता शीतला देवी मंदिर में माथा टेकने पहुंचा तो उसे एक पुत्र और एक पुत्री की प्राप्ति हुई। संतान प्राप्ति के बाद राजा ने माता के मंदिर में एक विशाल छत्र भी भेंट किया। शीतला देवी मंदिर के बारे में ये भी मान्यता है कि यहां जो भी सच्चे दिल से मन्नत मांगता है। मातारानी उसकी इच्छा जरूर पूरी करती हैं। तभी तो यहां आने वाले भक्तों में देशभर के लोग भी शामिल हैं।
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ताजा मामला है। मोहल्ला अवध नगर निवासी एक व्यक्ति ने बीते माह मंदिर में नेजा चढ़ाया। पूछने पर बताया कि उसकी बहू को पुत्र की प्राप्ति मातारानी के आशीर्वाद से हुई है। इसलिए वह मंदिर में नेजा चढ़ाने जा रहे हैं।
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