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गुरु से कपट और मित्र से न करें चोरी: आचार्य अमर
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
Updated Sun, 19 Jun 2016 11:20 PM IST
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भागवत कथा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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गुरु से कपट और मित्र से चोरी नहीं करनी चाहिए। ऐसा करने से इंसान को परेशानी ही होती है। अगर जीवन में संतोष चाहिए तो भगवान की आराधना भी जरूरी है। यह बात भागवत कथा के अंतिम दिन प्रवचन करते हुए आचार्य अमर व्यास ने कहीं।
कस्बा में श्रंगी ऋषि आश्रम में चल रही भागवत सप्ताह के अंतिम दिन सुदामा चरित्र की लीला का वर्णन हुआ। आचार्य अमर व्यास ने श्रीकृष्ण भगवान व उनके मित्र सुदामा की दोस्ती को बताया। उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण व सुदामा गुरुकुल में एक साथ पढ़े थे। एक दिन गुरु माता ने दोनों को लकड़ी काटने के लिए जंगल भेजा और साथ में एक पोटली में खाने के लिए चने दिए। सुदामा ने वह चने श्रीकृष्ण को न देकर धोखा देकर अकेले ही खा लिए थे। जिससे गुरुकुल की शिक्षा प्राप्त करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण द्वारिका के राजा बन गए। वहीं मित्र से चोरी करने से सुदामा का गरीबी से हाल बेहाल हो गया। सुदामा की पत्नी के कहने पर सुदामा भगवान श्रीकृष्ण से मदद मांगने गए तो श्रीकृष्ण ने अपने मित्र को गले लगाया। उनकी गरीबी की हालत को देखकर आंखों के आंसुओं से अपने मित्र सुदामा के पैर धोए। तीन लोक का राजपाट उन्हें दे दिया। यह कथा हमें जीवन में बहुत सीख देती है।
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कस्बा में श्रंगी ऋषि आश्रम में चल रही भागवत सप्ताह के अंतिम दिन सुदामा चरित्र की लीला का वर्णन हुआ। आचार्य अमर व्यास ने श्रीकृष्ण भगवान व उनके मित्र सुदामा की दोस्ती को बताया। उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण व सुदामा गुरुकुल में एक साथ पढ़े थे। एक दिन गुरु माता ने दोनों को लकड़ी काटने के लिए जंगल भेजा और साथ में एक पोटली में खाने के लिए चने दिए। सुदामा ने वह चने श्रीकृष्ण को न देकर धोखा देकर अकेले ही खा लिए थे। जिससे गुरुकुल की शिक्षा प्राप्त करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण द्वारिका के राजा बन गए। वहीं मित्र से चोरी करने से सुदामा का गरीबी से हाल बेहाल हो गया। सुदामा की पत्नी के कहने पर सुदामा भगवान श्रीकृष्ण से मदद मांगने गए तो श्रीकृष्ण ने अपने मित्र को गले लगाया। उनकी गरीबी की हालत को देखकर आंखों के आंसुओं से अपने मित्र सुदामा के पैर धोए। तीन लोक का राजपाट उन्हें दे दिया। यह कथा हमें जीवन में बहुत सीख देती है।
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