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धान के ढेरोें में फफूंदी लगाने से किसान परेशान
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी
Updated Wed, 07 Dec 2016 11:30 PM IST
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धान के ढेरोें में फफूंदी लगाने से किसान परेशान
- फोटो : अमर उजाला
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नोटबंदी का असर सीधे किसानों पर पड़ रहा है। मंडी में धान की खरीद नहीं होने से घरों में रखा धान बर्बाद होने लगा है। धान के ढेरों में फफूंदी लगने के साथ ही किल्ले भी निकलने लगे हैं।
मैनपुरी ब्लाक के गांव रुस्तमपुर के किसान नोटबंदी से पड़ने वाले असर से परेशान हैं। धान की फसल काटने के बाद मंडी में बिक्री रही। किसानों ने घरों में फसल एकत्रित कर ली। नोटबंदी के चलते व्यापारियों ने पैसे न होने की बात कहकर धान खरीदना बंद कर दिया है। वहीं दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए किसानों को ब्याज पर रुपये लेने पड़ रहे हैं। किसान अनूप यादव का कहना हैं कि उनकी धान की फसल बहुत अच्छी हुई है। नोटबंदी के चलते मंडी में धान नहीं बिका तो करीब क्विंटल धान घर में रख लिया है। धान के ढेर में अब किल्ले निकलने लगे हैं। किसान फेरु सिंह यादव का कहना है कि उनका करीब 20 क्विंटल धान घर में रखा है, जिसमें अब फफूंदी लगने लगी है। उनकी मेहनत बर्बाद हो रही है। श्यामवीर सिंह यादव ने बताया कि नोटबंदी का असर उनकी धान की फसल पर सीधा हुआ है। मंडी में आढ़तियों द्वारा धान नहीं खरीदने से 10 क्विंटल धान खराब हो रहा है। धान में नमी बढ़ जाने से मंडी अथवा सरकारी खरीद केंद्र पर धान नहीं बिक सकेगा। किसान विनोद कुमार यादव का लगभग 15 क्विंटल धान में घर में रखा है। धान के ढेर में किल्ले निकल आए हैं। धान में नमी भी बढ़ गई है। उनका कहना है रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए ब्याज पर रुपये लेने पड़े हैं। मेहनत से की गई फसल नोटबंदी का शिकार हो गई है।
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मैनपुरी ब्लाक के गांव रुस्तमपुर के किसान नोटबंदी से पड़ने वाले असर से परेशान हैं। धान की फसल काटने के बाद मंडी में बिक्री रही। किसानों ने घरों में फसल एकत्रित कर ली। नोटबंदी के चलते व्यापारियों ने पैसे न होने की बात कहकर धान खरीदना बंद कर दिया है। वहीं दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए किसानों को ब्याज पर रुपये लेने पड़ रहे हैं। किसान अनूप यादव का कहना हैं कि उनकी धान की फसल बहुत अच्छी हुई है। नोटबंदी के चलते मंडी में धान नहीं बिका तो करीब क्विंटल धान घर में रख लिया है। धान के ढेर में अब किल्ले निकलने लगे हैं। किसान फेरु सिंह यादव का कहना है कि उनका करीब 20 क्विंटल धान घर में रखा है, जिसमें अब फफूंदी लगने लगी है। उनकी मेहनत बर्बाद हो रही है। श्यामवीर सिंह यादव ने बताया कि नोटबंदी का असर उनकी धान की फसल पर सीधा हुआ है। मंडी में आढ़तियों द्वारा धान नहीं खरीदने से 10 क्विंटल धान खराब हो रहा है। धान में नमी बढ़ जाने से मंडी अथवा सरकारी खरीद केंद्र पर धान नहीं बिक सकेगा। किसान विनोद कुमार यादव का लगभग 15 क्विंटल धान में घर में रखा है। धान के ढेर में किल्ले निकल आए हैं। धान में नमी भी बढ़ गई है। उनका कहना है रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए ब्याज पर रुपये लेने पड़े हैं। मेहनत से की गई फसल नोटबंदी का शिकार हो गई है।
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