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दो महीने बाद वीरेश मुक्त, आठ अपहरण कर्ता गिरफ्तार

ब्यूरो, अमर उजाला मैनपुरी Updated Sat, 04 Apr 2015 11:34 PM IST
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Two months later veeresh free, eight kidnappers arrested

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मैनपुरी। एसटीएफ लखनऊ व कानपुर और कुरावली पुलिस ने शुक्रवार को सवा दो माह पहले अपह्त हुए आढ़ती पुत्र वीरेश को मुक्त करा लिया और अपहरण में शामिल आठ बदमाशों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की संयुक्त टीमों ने बदमाशों को घेराबंदी कर उस समय दबोच लिया, जब वीरेश के पिता अपहरणकर्ताओं को फिरौती की रकम दे रहे थे। पुलिस ने फिरौती के दो लाख रुपये, वैन और दो बाइक भी बरामद की है। उधर वीरेश की वापसी से परिवार में भी खुशी का माहौल है।
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 मामले का खुलासा करते हुए शनिवार को एसपी श्रीकांत सिंह ने बताया कि गंगापुर निवासी विशुनदयाल की कुरावली में सब्जी की आढ़त है। गत 28 जनवरी की शाम उनके पुत्र वीरू उर्फ वीरेश शाक्य का उस समय अपहरण कर लिया गया था जब वह आढ़त बंद कर वापस अपने गांव लौट रहा था। 29 जनवरी को विशुनदयाल ने थाने पर गुमशुदगी दर्ज कराई थी। चार फरवरी और आठ फरवरी को बदमाशों ने विशुनदयाल के मोबाइल पर फोन कर 35 लाख रुपये फिरौती की मांगी थी। इसके बाद गुमशुदगी को अपहरण में तब्दील कर दिया गया। एसपी ने बताया कि सीओ कुरावली, थाना कुरावली, एसटीएफ लखनऊ के प्रभारी मनीश चंद्र सोनकर, एसटीएफ कानपुर के प्रभारी सुशील कुमार सिंह अपहरणकर्ताओं का पता लगाने में जुटे हुए थे। शुक्रवार को अपहरणकर्ताओं ने विशुनदयाल को फिरौती की रकम लेकर थाना कुरावली क्षेत्र में काली नदी किनारे बाबा जी की अमरूद बगिया में बुलाया था। संयुक्त टीमों ने उनका पीछा किया और मुठभेड़ के बाद पांच बदमाशों को तमंचों और कारतूसों के साथ पकड़ लिया। उनके कब्जे से एक वैन, दो बाइक बरामद हुई। एक अपहरणकर्ता से दो लाख रुपये की फिरौती भी बरामद की। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वीरेश ग्राम चंादपुर में नत्थू सिंह के नलकूप पर बंद है। इसके बाद पुलिस ने वीरेश को वहां बरामद कर लिया और यहां से भी तीन बदमाशों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार बदमाशों में अमित उर्फ अमिताभ उर्फ शोभाराम निवासी ग्राम कचोहरा थाना सिरसागंज जनपद फीरोजाबाद, कायम सिंह, आदेश सिंह निवासी महाराजपुर थाना औंछा, प्रेमसागर निवासी विनोदपुर थाना भोगांव, सुभाषचंद्र निवासी कछपुरा एलाऊ, आशू उर्फ आशुतोष द्विवेदी निवासी ओमनगर वंशीगोहरा कोतवाली, विपिन सक्सेना निवासी चौथियाना कोतवाली, अरुण कुमार निवासी हरिहरपुर कोतवाली है। पुलिस ने सभी को जेल भेज दिया गया। इनमें सुभाष पीआरडी का जवान है।

अपहरण के बाद आढ़तियों ने किया था प्रदर्शन
घटना को लेकर आढ़तियों में आक्रोश था। वीरेश के अपहरण के मामले में पुलिस पर आढ़तियों ने काफी दबाव बनाया था। 30 जनवरी को आढ़तियों ने अपनी दुकानें और आढ़त बंद कर प्रदर्शन किया था। दो दिन आढ़तियों ने सब्जी की दुकानें बंद रखी थीं। पुलिस के आश्वासन पर दुकानें खोली थीं। इसके बाद ग्राम गंगापुर के ग्रामीणों ने दो फरवरी को थाने का घेराव किया था। ग्रामीणों का कहना था कि ग्रामीणों ने पुलिस पर अपहरण के चार दिन बाद भी उदासीनता बरतने का आरोप लगाया था। तीन दिन में वीरेश की बरामदगी न होने पर प्रदर्शन की चेतावनी दी थी।
ऐसे रची गई साजिश
प्रेमसागर की बहन की शादी गंगापुर में हुई है। उसका वहां आना जाना था। उसने अपने मित्र पीआरडी के जवान सुभाष से संपर्क किया। इसके बाद एक दूसरे के संपर्क से सभी ने अपहरण की योजना बनाई। विपिन सक्सेना वैन चलाता है। इसकी वैन अरुण ने एक हजार रुपये में किराए पर की। अपहरण के बाद विपिन को जानकारी हुई। इस पर मिलने वाली रकम में विपिन का हिस्सा भी डाल लिया गया।
पुलिस समझकर बैठ गया था वैन में
वीरेश ने बताया कि अपहरण के समय सुभाष ने उसे रोका था। वह पीआरडी की वर्दी पहने था। पुलिस समझकर वह वैन में बैठ गया था। बाद में आरोपियों ने आंखों में पट्टी बांधकर उसके साथ मारपीट शुरू कर दी।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठा सवाल
मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठता है। पुलिस का दावा है कि सवा दो माह तक कुरावली थाना क्षेत्र में ही वीरेश बंधक रहा लेकिन पुलिस ढूंढ नहीं सकी। वह तो जब फिरौती लेने की बात आई और पुलिस से हताश वीरेश के पिता फिरौती देने पहुंचे तब एसटीएफ और पुलिस की संयुक्त टीम ने इनको गिरफ्तार कर लिया। चर्चा ये भी है कि वीरेश को कहीं और रखा गया था। फिरौती देकर उसके मुक्त होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की।

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