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दो हत्यारों को फांसी की सजा
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
Updated Thu, 28 Jul 2016 11:19 PM IST
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सजा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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कुरावली क्षेत्र में 13 साल पहले युवक की निर्मम तरीके से की गई हत्या के मामले में अपर जिला जज पंचम बच्चू सिंह ने दो हत्यारों को फांसी की सजा सुनाई है। हत्याकांड में आरोपी एक अन्य व्यक्ति की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है। जमानत पर जेल से बाहर होने के कारण गुरुवार को दोनों घर से अदालत का फैसला सुनने पहुंचे थे। कोर्ट से ही दोनों को जेल भेज दिया गया।
थाना कुरावली के गांव नगला मोहन मनौना निवासी सुरेंद्र 25 नवंबर 2003 को कमलपुर के प्रधान सुखवीर सिंह से मिलने गया था। लौटते समय वह गांव के ही रमेश के साथ साइकिल पर आ रहा था। रास्ते में सुरेंद्र का भाई सत्यपाल और चतुरी मिल गए। वहां से चारों पैदल गांव की ओर चले। राजलपुर के पास गांव के ही संजू बघेल, भंवर सिंह और जबर सिंह ने तमंचों के बल पर चारों को रोक लिया। जान से मारने की धमकी देते हुए पहले तीन लोगों को अलग किया। इसके बाद संजू और भंवर ने मिलकर हंसिया से सुरेंद्र का सिर धड़ से अलग कर दिया। साक्ष्य मिटाने के लिए युवक का सिर घटना स्थल से कुछ ही दूर एक गड्ढे में दबा दिया। पुलिस ने दो दिन बाद 27 नवंबर 2003 को सिर बरामद किया।
मारे गए सुरेंद्र के भाई सत्यपाल की तहरीर पर संजू, जबर सिंह और भंवर सिंह के खिलाफ हत्या, साक्ष्य मिटाने व जान से मारने की धमकी देने का मुकदमा दर्ज किया गया। बाद में पुलिस ने तीनों आरोपियों को गैंगेस्टर एक्ट में निरुद्ध किया। चार्जशीट के बाद शुुरू हुई मुकदमे की सुनवाई के दौरान आरोपी जबर सिंह की मौत हो गई। वहीं, संजू और भंवर को जमानत मिल गई थी।
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गुरुवार को अपर जिला जज पंचम बच्चू सिंह ने साक्ष्य और प्रमाणों के आधार पर संजू बघेल व भंवर सिंह को हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई। वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी राजपाल सिंह और सहायक शासकीय अधिवक्ता प्रेमचंद्र निगम की दलीलों के आधार पर दोनों को गैंगेस्टर एक्ट में छह-छह साल सजा और छह-छह हजार रुपये जुर्माना की सजा भी दी गई है।
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थाना कुरावली के गांव नगला मोहन मनौना निवासी सुरेंद्र 25 नवंबर 2003 को कमलपुर के प्रधान सुखवीर सिंह से मिलने गया था। लौटते समय वह गांव के ही रमेश के साथ साइकिल पर आ रहा था। रास्ते में सुरेंद्र का भाई सत्यपाल और चतुरी मिल गए। वहां से चारों पैदल गांव की ओर चले। राजलपुर के पास गांव के ही संजू बघेल, भंवर सिंह और जबर सिंह ने तमंचों के बल पर चारों को रोक लिया। जान से मारने की धमकी देते हुए पहले तीन लोगों को अलग किया। इसके बाद संजू और भंवर ने मिलकर हंसिया से सुरेंद्र का सिर धड़ से अलग कर दिया। साक्ष्य मिटाने के लिए युवक का सिर घटना स्थल से कुछ ही दूर एक गड्ढे में दबा दिया। पुलिस ने दो दिन बाद 27 नवंबर 2003 को सिर बरामद किया।
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मारे गए सुरेंद्र के भाई सत्यपाल की तहरीर पर संजू, जबर सिंह और भंवर सिंह के खिलाफ हत्या, साक्ष्य मिटाने व जान से मारने की धमकी देने का मुकदमा दर्ज किया गया। बाद में पुलिस ने तीनों आरोपियों को गैंगेस्टर एक्ट में निरुद्ध किया। चार्जशीट के बाद शुुरू हुई मुकदमे की सुनवाई के दौरान आरोपी जबर सिंह की मौत हो गई। वहीं, संजू और भंवर को जमानत मिल गई थी।
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गुरुवार को अपर जिला जज पंचम बच्चू सिंह ने साक्ष्य और प्रमाणों के आधार पर संजू बघेल व भंवर सिंह को हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई। वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी राजपाल सिंह और सहायक शासकीय अधिवक्ता प्रेमचंद्र निगम की दलीलों के आधार पर दोनों को गैंगेस्टर एक्ट में छह-छह साल सजा और छह-छह हजार रुपये जुर्माना की सजा भी दी गई है।