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बैंकें बंद, एटीएम में भी कैश खत्म
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी
Updated Mon, 14 Nov 2016 11:07 PM IST
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बैंकें बंद, एटीएम में भी कैश खत्म
- फोटो : अमर उजाला
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रविवार को सरकार द्वारा रुपया निकासी की सीमा बढ़ाए जाने से खुश लोगों को सोमवार को जोर का झटका लगा। बैंकें बंद होने तथा एटीएम में कैश नहीं होने से पूरे दिन लोग रुपयों के लिए एक एटीएम से दूसरे एटीएम पर भटकते रहे। सुबह आठ बजे स्टेट बैंक के एटीएम में जैसे ही कैश डाला गया। वहां लंबी लाइन लग गई। देखते ही देखते वहां भी कैश खत्म हो गया।
नोट बंदी ने तो आम आदमी की कमर ही तोड़ दी है। छोटे नोट मिल नहीं पा रहे हैं, ऐसे में बाजार भी रुपयों की किल्लत से कराह रहा है। जिन बाजारों में रोज भीड़ रहती थी वहां सन्नाटा पसरा है। नोट बंदी से हर कारोबार प्रभावित हुआ है। व्यापारियों के अनुसार 80 से 85 प्रतिशत तक व्यापार प्रभावित हो रहा है। ज्यादातर दुकानदार ग्राहकों की कमी और बिक्री न होने का दुखड़ा रो रहे हैं। उनका कहना है कि बाजार से बडे़ नोटों को चलन से बाहर कर दिए जाने के कारण अचानक समस्या बढ़ गई है।
स्टेशन रोड स्थित बाइक मिस्त्री शेखर का कहना है कि उनकी दुकान पर रोजाना 40 से 45 दुपहिया वाहन मरम्मत के लिए आते थे। रुपयों की कमी के कारण ग्राहकों ने आना बंद कर दिया है। जनरल स्टोर संचालक संजू चौबे का कहना है बडे़ नोटों को चलन से बाहर किया जाने का फैसला सही है लेकिन इससे कारोबार पर भी असर पड़ रहा है।
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उधर, बैंकें सोमवार को बंद होने से लोग परेशान रहे। रुपये निकालने के लिए एटीएम पहुंचे तो किसी भी एटीएम में कैश नहीं था। लोग एक एटीएम से दूसरे एटीएम के चक्कर लगाते रहे। रविवार को सरकार ने रुपये निकासी की सीमा बढ़ाने का ऐलान किया था। जिससे लोग खुश थे। मगर सोमवार को उनकी खुशी काफूर हो गई। एटीएम धारक अमन वारसी का कहना है कि सुबह से एटीएम के चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन कहीं एटीएम बंद हैं तो कहीं शटर गिरे हुए हैं। ऐसे में परेशानी तो केवल ग्राहकों को ही उठानी पड़ रही है। केनरा बैंक, यूनियन बैंक समेत अधिकांश एटीएम पर सोमवार को ताला लटका रहा। जिसके चलते पूरे शहर में चक्कर लगाने के बाद भी कहीं से रुपये नहीं निकाले जा सके।
मंडी के कारोबार पर भी पड़ा असर
नोट बंदी का बड़ा असर मंडी पर भी पड़ा है। मंडी में कारोबार पांच दिन से बंद है। किसान खाली हाथ लौट रहे हैं। आढ़ती रमेश चंद्र का कहना है अब तो समस्या आ रही है। नोटबंदी से किसान ही नहीं आढ़ती भी परेशान हैं। मंडी से रोजाना होने वाला व्यापार ठप हो गया है। राजेंद्र सिंह का कहना है कि सरकार को आढ़तियों को लेनदेन में शिथिलता देनी चाहिए। खाते से दो से तीन लाख रुपये तक का लेनदेन मान्य किया जाना चाहिए। बबलू यादव का कहना है कि आढ़ती के पास छोटे नोट हैं नहीं। बड़े नोट का चलन बंद है। किसान को आखिर भुगतान कैसे करें। सुंदर सिंह का कहना है कि मंडी में रोजाना होने वाला करोड़ों का कारोबार प्रभावित हुआ है। नोटबंदी के निर्णय से सबसे ज्यादा परेशान किसान है।
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नोट बंदी ने तो आम आदमी की कमर ही तोड़ दी है। छोटे नोट मिल नहीं पा रहे हैं, ऐसे में बाजार भी रुपयों की किल्लत से कराह रहा है। जिन बाजारों में रोज भीड़ रहती थी वहां सन्नाटा पसरा है। नोट बंदी से हर कारोबार प्रभावित हुआ है। व्यापारियों के अनुसार 80 से 85 प्रतिशत तक व्यापार प्रभावित हो रहा है। ज्यादातर दुकानदार ग्राहकों की कमी और बिक्री न होने का दुखड़ा रो रहे हैं। उनका कहना है कि बाजार से बडे़ नोटों को चलन से बाहर कर दिए जाने के कारण अचानक समस्या बढ़ गई है।
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स्टेशन रोड स्थित बाइक मिस्त्री शेखर का कहना है कि उनकी दुकान पर रोजाना 40 से 45 दुपहिया वाहन मरम्मत के लिए आते थे। रुपयों की कमी के कारण ग्राहकों ने आना बंद कर दिया है। जनरल स्टोर संचालक संजू चौबे का कहना है बडे़ नोटों को चलन से बाहर किया जाने का फैसला सही है लेकिन इससे कारोबार पर भी असर पड़ रहा है।
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उधर, बैंकें सोमवार को बंद होने से लोग परेशान रहे। रुपये निकालने के लिए एटीएम पहुंचे तो किसी भी एटीएम में कैश नहीं था। लोग एक एटीएम से दूसरे एटीएम के चक्कर लगाते रहे। रविवार को सरकार ने रुपये निकासी की सीमा बढ़ाने का ऐलान किया था। जिससे लोग खुश थे। मगर सोमवार को उनकी खुशी काफूर हो गई। एटीएम धारक अमन वारसी का कहना है कि सुबह से एटीएम के चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन कहीं एटीएम बंद हैं तो कहीं शटर गिरे हुए हैं। ऐसे में परेशानी तो केवल ग्राहकों को ही उठानी पड़ रही है। केनरा बैंक, यूनियन बैंक समेत अधिकांश एटीएम पर सोमवार को ताला लटका रहा। जिसके चलते पूरे शहर में चक्कर लगाने के बाद भी कहीं से रुपये नहीं निकाले जा सके।
मंडी के कारोबार पर भी पड़ा असर
नोट बंदी का बड़ा असर मंडी पर भी पड़ा है। मंडी में कारोबार पांच दिन से बंद है। किसान खाली हाथ लौट रहे हैं। आढ़ती रमेश चंद्र का कहना है अब तो समस्या आ रही है। नोटबंदी से किसान ही नहीं आढ़ती भी परेशान हैं। मंडी से रोजाना होने वाला व्यापार ठप हो गया है। राजेंद्र सिंह का कहना है कि सरकार को आढ़तियों को लेनदेन में शिथिलता देनी चाहिए। खाते से दो से तीन लाख रुपये तक का लेनदेन मान्य किया जाना चाहिए। बबलू यादव का कहना है कि आढ़ती के पास छोटे नोट हैं नहीं। बड़े नोट का चलन बंद है। किसान को आखिर भुगतान कैसे करें। सुंदर सिंह का कहना है कि मंडी में रोजाना होने वाला करोड़ों का कारोबार प्रभावित हुआ है। नोटबंदी के निर्णय से सबसे ज्यादा परेशान किसान है।