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नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चंद्रपुरा का बुराहाल
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
Updated Thu, 02 Jun 2016 11:38 PM IST
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स्वास्थ्य केंद्र
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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करहल तहसील के ग्राम चंद्रपुरा में बना नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का बुरा हाल है। यहां चिकित्सकों की तैनाती है और न ही कोई उपचार की सुविधा है। क्षेत्र में संक्रामक रोगों का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है। मरीज आते हैं, लेकिन बिना उपचार के ही लौट जाते हैं। यहां कुछ ग्रामीणों ने कब्जा कर रखा है।
नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चंद्रपुरा बदहाल पड़ा है। गेट के सामने ही ग्रामीणों ने उपले पाथ रखे हैं, साथ ही स्वास्थ्य केंद्र में गंदगी के ढेर लगे हैं। इससे यहां के रोगियों को उपचार के लिए परेशानी उठानी पड़ती है। यहां के लोगों को उपचार के लिए अन्य कस्बा गांव में बनी पीएचसी या फिर जिला अस्पताल उपचार के लिए आना पड़ता है। क्षेत्रीय लोगों ने कई बार सीएमओ से चिकित्सकों की तैनाती की मांग की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। ग्रामीण लायक सिंह, रामबहादुर, प्रमोद कुमार, पूरन सिंह, रामलडै़ते, बदन सिंह, बैचेलाल यादव, राप्रकाश यादव, मोहल यादव आदि का आरोप है कि चिकित्सकों के न आने से हर रोज दर्जनों मरीज बिना दवा लिए ही घंटो इंतजार करने के बाद घर लौट जाते हैं। क्षेत्र में अन्य कोई अस्पताल न होने के कारण झोलाछाप से ही मरीजों का उपचार कराना पड़ रहा है। कई बार इसकी शिकायत विभागीय अधिकारियों के अलावा जनप्रतिनिधियों से की लेकिन नतीजा शून्य रहा। जिससे ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती महिंलाओं और बुजुर्गों को होती है।
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नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चंद्रपुरा बदहाल पड़ा है। गेट के सामने ही ग्रामीणों ने उपले पाथ रखे हैं, साथ ही स्वास्थ्य केंद्र में गंदगी के ढेर लगे हैं। इससे यहां के रोगियों को उपचार के लिए परेशानी उठानी पड़ती है। यहां के लोगों को उपचार के लिए अन्य कस्बा गांव में बनी पीएचसी या फिर जिला अस्पताल उपचार के लिए आना पड़ता है। क्षेत्रीय लोगों ने कई बार सीएमओ से चिकित्सकों की तैनाती की मांग की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। ग्रामीण लायक सिंह, रामबहादुर, प्रमोद कुमार, पूरन सिंह, रामलडै़ते, बदन सिंह, बैचेलाल यादव, राप्रकाश यादव, मोहल यादव आदि का आरोप है कि चिकित्सकों के न आने से हर रोज दर्जनों मरीज बिना दवा लिए ही घंटो इंतजार करने के बाद घर लौट जाते हैं। क्षेत्र में अन्य कोई अस्पताल न होने के कारण झोलाछाप से ही मरीजों का उपचार कराना पड़ रहा है। कई बार इसकी शिकायत विभागीय अधिकारियों के अलावा जनप्रतिनिधियों से की लेकिन नतीजा शून्य रहा। जिससे ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती महिंलाओं और बुजुर्गों को होती है।
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