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पिता की मौत के बाद बच्चे दाने-दाने को मोहताज
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
Updated Wed, 18 May 2016 11:37 PM IST
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मोहताज
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मां-बाप की मौत के बाद अनाथ हो चुके चार बच्चे अब दाने-दाने को मोहताज हैं। आठ दिन पूर्व दलित अपनी बीमार पुत्री के इलाज के लिए एक व्यक्ति के कहने पर आम तोड़ने गया था। तभी पेड़ की एक डाल टूटकर उस पर गिर गई, जिसमें दबकर उसकी मौत हो गई थी। आज तक कोई भी प्रशासनिक अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि इस गरीब परिवार का हाल लेने गांव नहीं पहुंचा।
गांव बुढौली निवासी किलकेश कठेरिया एक कच्चे मकान में अपनी पत्नी और चार बच्चों के साथ मजदूरी कर गुजारा कर रहा था। तीन वर्ष पूर्व पत्नी को गंभीर बीमारी ने चपेट में ले लिया। कुछ दिनाें बाद उसकी मौत हो गई। इसके बाद किलकेश अपने चार बच्चों का भरण पोषण कर रहा था। बीते बुधवार को पेड़ की डाल के नीचे दबने से मौत हो गई थी। जिसके बाद अब मृतक के चार बच्चे दाने-दाने को मोहताज हैं। घर में पकाने के लिए कुछ नहीं है, इसलिए घर के बर्तन खाली पडे़ हैं। कोई ग्रामीण दया खाकर इन्हें थोड़ा बहुत खाने पीने को दे जरूर जाता है। लेकिन ये सिलसिला भी भला कब तक चलेगा।
बता दें कि मृतक की बड़ी बेटी खुशबू (14), रेनू (13) रुचि (8) और अनुज (05) की देखभाल अभी उसकी दादी कर रही थीं, लेकिन छह महीने पहले ही उनकी भी मौत हो गई। वहीं रेनू गंभीर बीमारी से पीड़ित है, लेकिन इलाज को पैसा न होने से उसकी भी तबियत बिगड़ रही है।
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मैं अभी जरूरी काम से लखनऊ आया हुआ हूं। दलित परिवार के बच्चे मेरे अपने बच्चे हैं। आर्थिक तंगी या इलाज के अभाव में कोई भी अनहोनी नहीं होने दी जाएगी।
इंजीनियर ब्रजेश कठेरिया, विधायक किशनी
मामला संज्ञान में है। मृतक के परिवारीजनों को किसान बीमा लाभ दिलाया जाएगा। लेखपाल को पत्रावलियां मंगाई गई हैं। परिवार के बच्चों को हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी।
सुरेश सोनी, एसडीएम किशनी
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गांव बुढौली निवासी किलकेश कठेरिया एक कच्चे मकान में अपनी पत्नी और चार बच्चों के साथ मजदूरी कर गुजारा कर रहा था। तीन वर्ष पूर्व पत्नी को गंभीर बीमारी ने चपेट में ले लिया। कुछ दिनाें बाद उसकी मौत हो गई। इसके बाद किलकेश अपने चार बच्चों का भरण पोषण कर रहा था। बीते बुधवार को पेड़ की डाल के नीचे दबने से मौत हो गई थी। जिसके बाद अब मृतक के चार बच्चे दाने-दाने को मोहताज हैं। घर में पकाने के लिए कुछ नहीं है, इसलिए घर के बर्तन खाली पडे़ हैं। कोई ग्रामीण दया खाकर इन्हें थोड़ा बहुत खाने पीने को दे जरूर जाता है। लेकिन ये सिलसिला भी भला कब तक चलेगा।
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बता दें कि मृतक की बड़ी बेटी खुशबू (14), रेनू (13) रुचि (8) और अनुज (05) की देखभाल अभी उसकी दादी कर रही थीं, लेकिन छह महीने पहले ही उनकी भी मौत हो गई। वहीं रेनू गंभीर बीमारी से पीड़ित है, लेकिन इलाज को पैसा न होने से उसकी भी तबियत बिगड़ रही है।
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मैं अभी जरूरी काम से लखनऊ आया हुआ हूं। दलित परिवार के बच्चे मेरे अपने बच्चे हैं। आर्थिक तंगी या इलाज के अभाव में कोई भी अनहोनी नहीं होने दी जाएगी।
इंजीनियर ब्रजेश कठेरिया, विधायक किशनी
मामला संज्ञान में है। मृतक के परिवारीजनों को किसान बीमा लाभ दिलाया जाएगा। लेखपाल को पत्रावलियां मंगाई गई हैं। परिवार के बच्चों को हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी।
सुरेश सोनी, एसडीएम किशनी