{"_id":"5854290c4f1c1b676f64cd60","slug":"account-for-15-million-just-over-seven-million-atm-near","type":"story","status":"publish","title_hn":"खाते 15 लाख के, एटीएम सिर्फ सात लाख के पास ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खाते 15 लाख के, एटीएम सिर्फ सात लाख के पास
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी।
Updated Fri, 16 Dec 2016 11:30 PM IST
विज्ञापन
खाते 15 लाख के, एटीएम सिर्फ सात लाख के पास
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केंद्र सरकार की कैशलेस सिस्टम खड़ा करने की योजना को जिले में ग्रहण लगता दिख रहा है। इसका कारण खाता धारकों पर पर्याप्त संख्या में एटीएम कार्ड नहीं होना है। जिले में 15 लाख खाताधारक हैं जबकि एटीएम मात्र सात लाख के पास ही हैं। तो वहीं नोटबंदी के बाद से अब तक जिले में सौ और आलीपुरखेड़ा कस्बे से मात्र दो लोगों ने ही बैंक में आवेदन किया था। उसमें भी कई बार एडीएम को प्रार्थना पत्र दिया बैंक के चक्कर लगाए लेकिन सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी। केसीसी कार्ड भी बहुत कम किसानों के ही एक्टिव हैं।
केंद्र सरकार ने आठ नवंबर से 500-1000 के नोट बंद कर दिए थे। इसके बाद से जिले में कैश की किल्लत से लोगों को जूझना पड़ रहा है। करीब एक माह बाद भी बैंकों और एटीएम पर लोगों की कतार सुबह से शाम तक लगी रहती है। आए दिन हंगामे, प्रदर्शन भी हो रहे हैं।
जिले में कैशलेस सिस्टम नहीं फल-फूल पा रहा है। लोगों के बैंक खाते तो हैं लेकिन एटीएम कार्ड अधिकांश के पास नहीं हैं। जिले में मौजूद पांच दर्जन बैंक शाखाओं में कुल 15 लाख खाते हैं। इनमें से मात्र सात लाख लोगों पर ही में एटीएम कार्ड है। यही कारण है कि शेष लोग कैशलेस अभियान का हिस्सा भी नहीं बन सकते। ऐसे में वह छोटी से लेकर बड़ी खरीदारी तक कैश में ही भुगतान करेंगे या फिर चेक का प्रयोग करेंगे।
विज्ञापन
आलीपुरखेड़ा स्थित इंडेन गैस एजेंसी संचालक संत प्रकाश स्वर्णकार ने बताया उन्होंने 15 दिन पहले दो स्वाइप मशीन लगाने के लिए स्टेट बैंक आफ इंडिया की स्थानीय शाखा में आवेदन किया था। इसके बाद वो कई बार बैंक मैनेजर से लेकर एडीएम तक प्रार्थना पत्र और फोन पर बात कर चुके हैं। इसके बाद भी अभी तक स्वाइप मशीन नहीं लगी है। अब उन्होंने थक कर डीएम कार्यालय में शिकायत की है। इस संबंध में एलडीएम देवेंद्र कुमार अग्रवाल का कहना है कि संबंधित बैंक के मैनेजर को जल्द से जल्द स्वाइप मशीन उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।
तो वहीं तीन लाख किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए जा चुके हैं। एलडीएम के अनुसार इनमें से मात्र 20-25 हजार केसीसी ही एक्टिव हैं। शेष केसीसी को उनके धारकों ने अभी तक प्रयोग नहीं किया है।
कोशिश की जा रही है कि सभी खाता धारकों को एटीएम कार्ड उपलब्ध कराए जाएं। यदि कोई आवेदन करता है तो उसे तत्काल कार्ड दिया जा रहा है। ताकि उसे कहीं भी स्वाइप मशीन या माइक्रो एटीएम होने पर भुगतान करने में परेशानी न हो। नोटबंदी के बाद एटीएम के लिए आवेदन करने वालों की संख्या में कई गुना बढ़ोतरी हुई है।
- डीके अग्रवाल, एलडीएम
विज्ञापन
केंद्र सरकार ने आठ नवंबर से 500-1000 के नोट बंद कर दिए थे। इसके बाद से जिले में कैश की किल्लत से लोगों को जूझना पड़ रहा है। करीब एक माह बाद भी बैंकों और एटीएम पर लोगों की कतार सुबह से शाम तक लगी रहती है। आए दिन हंगामे, प्रदर्शन भी हो रहे हैं।
विज्ञापन
जिले में कैशलेस सिस्टम नहीं फल-फूल पा रहा है। लोगों के बैंक खाते तो हैं लेकिन एटीएम कार्ड अधिकांश के पास नहीं हैं। जिले में मौजूद पांच दर्जन बैंक शाखाओं में कुल 15 लाख खाते हैं। इनमें से मात्र सात लाख लोगों पर ही में एटीएम कार्ड है। यही कारण है कि शेष लोग कैशलेस अभियान का हिस्सा भी नहीं बन सकते। ऐसे में वह छोटी से लेकर बड़ी खरीदारी तक कैश में ही भुगतान करेंगे या फिर चेक का प्रयोग करेंगे।
विज्ञापन
आलीपुरखेड़ा स्थित इंडेन गैस एजेंसी संचालक संत प्रकाश स्वर्णकार ने बताया उन्होंने 15 दिन पहले दो स्वाइप मशीन लगाने के लिए स्टेट बैंक आफ इंडिया की स्थानीय शाखा में आवेदन किया था। इसके बाद वो कई बार बैंक मैनेजर से लेकर एडीएम तक प्रार्थना पत्र और फोन पर बात कर चुके हैं। इसके बाद भी अभी तक स्वाइप मशीन नहीं लगी है। अब उन्होंने थक कर डीएम कार्यालय में शिकायत की है। इस संबंध में एलडीएम देवेंद्र कुमार अग्रवाल का कहना है कि संबंधित बैंक के मैनेजर को जल्द से जल्द स्वाइप मशीन उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।
तो वहीं तीन लाख किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए जा चुके हैं। एलडीएम के अनुसार इनमें से मात्र 20-25 हजार केसीसी ही एक्टिव हैं। शेष केसीसी को उनके धारकों ने अभी तक प्रयोग नहीं किया है।
कोशिश की जा रही है कि सभी खाता धारकों को एटीएम कार्ड उपलब्ध कराए जाएं। यदि कोई आवेदन करता है तो उसे तत्काल कार्ड दिया जा रहा है। ताकि उसे कहीं भी स्वाइप मशीन या माइक्रो एटीएम होने पर भुगतान करने में परेशानी न हो। नोटबंदी के बाद एटीएम के लिए आवेदन करने वालों की संख्या में कई गुना बढ़ोतरी हुई है।
- डीके अग्रवाल, एलडीएम