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संकट में मोर: 10 दिन में 18 रहस्यमय मौत का शिकार
Mainpuri
Updated Sat, 01 Jun 2013 05:30 AM IST
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मैनपुरी। जिले की आबोहवा में ऐसा कौन सा जहर घुल गया, जो राष्ट्रीय पक्षी मोर की जान पर भारी पड़ रहा है। जिले में पिछले दस दिनों से लगातार मोर दम तोड़ रहे हैं। गुरुवार को गांव लठोंगर में 13 मोर मृत मिलने की घटना के बाद प्रशासन भी हरकत में आया और इनका परीक्षण कराया। उसमें भी इनके मरने का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया और अब विसरा परीक्षण के लिए भेजा गया हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में 18 मोर मृत मिलने की सूचना तो प्रशासन और वन विभाग अधिकारियों को भी दी गई।
किशनी क्षेत्र में लगभग 10 दिन पहले मोर मरने का सिलसिला शुरू हुआ था। इसकी सूचना लगातार कुछ जागरूक ग्रामीण प्रशासन और वन विभाग को भी देते रहे। गुरुवार को ग्राम लठोंगर के बाहर खेतों में एक साथ 13 मृत मोर ग्रामीणों ने देखे। इसकी सूचना वन विभाग के अधिकारियों को दी। कोई कार्रवाई होते न देख ग्रामीणों ने इस घटना से जिलाधिकारी को भी अवगत कराया और बताया कि मोरों में कोई बीमारी फैल गई हैं, जिसके चलते रोज मोर मर रहे हैं। जिलाधिकारी वीके आनंद के निर्देश पर वन विभाग की टीम मृत मोरों को जिला मुख्यालय लाई और राजकीय पशु अस्पताल में उनके मरने का कारण जानने के लिए परीक्षण कराया गया।
इसके लिए मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डाक्टर एसके द्विवेदी ने उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी मुख्यालय डाक्टर वीके द्विवेदी, राजकीय पशु चिकित्सालय सदर के चिकित्साधिकारी डा. यादवेंद्र सिंह यादव और करहल चिकित्सालय में तैनात डाक्टर एके सिंह का पैनल बनाया। तीनों चिकित्साधिकारियों ने मृत मोरों के शरीर का परीक्षण किया। गौरतलब है कि किशनी क्षेत्र में दस दिनों में अब तक में 18 मोर मृत मिल चुके हैं। पहले माना जा रहा था कि गर्मी के कारण मोर मर रहे है लेकिन गर्मी दूसरी जगह भी पड़ रही है। परीक्षण में भी गर्मी से मौत की बात भी सामने नहीं आई। मैनपुरी में ही इस तरह के मामले सामने आने से इनकी मौत रहस्य बनती जा रही हैं।
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-सभी मोरों का विसरा जांच के लिए आगरा भेजा है, विसरा की रिपोर्ट आने के बाद भी मौत का असली कारण पता लग सकेगा। डाक्टर एसके द्विवेदी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी मैनपुरी
- हो सकता है किसी किसान ने अपने खेत में कीटनाशक का छिड़काव किया हो और वहां कोई जहरीला अंश खा लिया हो। सही कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है, विसरा रिपोर्ट से ही पता लगेगा।- ओ पी गुप्ता, डीएफओ मैनपुरी
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किशनी क्षेत्र में लगभग 10 दिन पहले मोर मरने का सिलसिला शुरू हुआ था। इसकी सूचना लगातार कुछ जागरूक ग्रामीण प्रशासन और वन विभाग को भी देते रहे। गुरुवार को ग्राम लठोंगर के बाहर खेतों में एक साथ 13 मृत मोर ग्रामीणों ने देखे। इसकी सूचना वन विभाग के अधिकारियों को दी। कोई कार्रवाई होते न देख ग्रामीणों ने इस घटना से जिलाधिकारी को भी अवगत कराया और बताया कि मोरों में कोई बीमारी फैल गई हैं, जिसके चलते रोज मोर मर रहे हैं। जिलाधिकारी वीके आनंद के निर्देश पर वन विभाग की टीम मृत मोरों को जिला मुख्यालय लाई और राजकीय पशु अस्पताल में उनके मरने का कारण जानने के लिए परीक्षण कराया गया।
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इसके लिए मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डाक्टर एसके द्विवेदी ने उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी मुख्यालय डाक्टर वीके द्विवेदी, राजकीय पशु चिकित्सालय सदर के चिकित्साधिकारी डा. यादवेंद्र सिंह यादव और करहल चिकित्सालय में तैनात डाक्टर एके सिंह का पैनल बनाया। तीनों चिकित्साधिकारियों ने मृत मोरों के शरीर का परीक्षण किया। गौरतलब है कि किशनी क्षेत्र में दस दिनों में अब तक में 18 मोर मृत मिल चुके हैं। पहले माना जा रहा था कि गर्मी के कारण मोर मर रहे है लेकिन गर्मी दूसरी जगह भी पड़ रही है। परीक्षण में भी गर्मी से मौत की बात भी सामने नहीं आई। मैनपुरी में ही इस तरह के मामले सामने आने से इनकी मौत रहस्य बनती जा रही हैं।
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-सभी मोरों का विसरा जांच के लिए आगरा भेजा है, विसरा की रिपोर्ट आने के बाद भी मौत का असली कारण पता लग सकेगा। डाक्टर एसके द्विवेदी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी मैनपुरी
- हो सकता है किसी किसान ने अपने खेत में कीटनाशक का छिड़काव किया हो और वहां कोई जहरीला अंश खा लिया हो। सही कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है, विसरा रिपोर्ट से ही पता लगेगा।- ओ पी गुप्ता, डीएफओ मैनपुरी