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40 लाख की लागत से की हरियाली, अब सूख रहे पौधे
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी
Updated Sun, 05 Mar 2017 11:19 PM IST
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पौधे
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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वन विभाग की लापरवाही से पड़रिया चौराहे से मानपुर तक मैनपुरी एटा सड़क के दोनों ओर लगाए गए पौधे सूख गए हैं। 40 लाख की लागत से पौधे रोपित किए गए थे। क्षेत्र के लोगों ने डीएम से शिकायत की।
औंछा क्षेत्र में वन विभाग ने 40 लाख की लागत से 1500 ईंटों के ब्रिकगार्ड बनवाकर उनमें नीम, अर्जुन, कंज, अलोस्टोनिया, चितमन, बरगद आदि के पौधे लगाए थे। उस समय क्षेत्र की जनता में आस जगी थी। उनका मानना था 88 हजार ऋषि मुनियों की तपस्थली औंछा में फिर से हरियाली होगी। वन विभाग के उचित देखरेख नहीं करने से दो माह में ही 40 प्रतिशत से अधिक पौधे सूख गए हैं। जो पौधे बचे हैं वह पानी के अभाव में सूखने वाले हैं।
क्षेत्रवासी रुबी यादव का कहना है जब तक प्रशासन उसे जमीनी रूप नहीं देगा तब तक योजना सफल नहीं हो सकती। अखिल प्रताप का कहना है एक समय औंछा में हरियाली थी जगह जगह पेड़ पौधे थे मगर कुछ समय से पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से यह क्षेत्र हरियाली से वीरान होता चला जा रहा है। अनुराग यादव का कहना है क्षेत्र की पहचान च्यवन मंदिर के पीछे बना अजोम कुंड और पेड़ पौधों की हरियाली थी मगर यह दोनों शासन -प्रशासन की अनदेखी से अपना अस्तित्व खोते चले जा रहे हैं। युवा समाज सेवी संस्था की सचिव वंदना यादव का कहना है औंछा में कभी घना जंगल था। 88 हजार ऋषि मुनियों ने यहां तपस्या की थी। अब लोगों ने निजी स्वार्थ के चलते पेड़ कटवा दिए।
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वन विभाग के पौधे उचित देखभाल के अभाव में सूख रहे हैं। प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी सिद्धार्थ अंबेडकर का कहना है पौधे सूखने की बात उनकी जानकारी में नहीं है। जांच कराने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
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औंछा क्षेत्र में वन विभाग ने 40 लाख की लागत से 1500 ईंटों के ब्रिकगार्ड बनवाकर उनमें नीम, अर्जुन, कंज, अलोस्टोनिया, चितमन, बरगद आदि के पौधे लगाए थे। उस समय क्षेत्र की जनता में आस जगी थी। उनका मानना था 88 हजार ऋषि मुनियों की तपस्थली औंछा में फिर से हरियाली होगी। वन विभाग के उचित देखरेख नहीं करने से दो माह में ही 40 प्रतिशत से अधिक पौधे सूख गए हैं। जो पौधे बचे हैं वह पानी के अभाव में सूखने वाले हैं।
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क्षेत्रवासी रुबी यादव का कहना है जब तक प्रशासन उसे जमीनी रूप नहीं देगा तब तक योजना सफल नहीं हो सकती। अखिल प्रताप का कहना है एक समय औंछा में हरियाली थी जगह जगह पेड़ पौधे थे मगर कुछ समय से पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से यह क्षेत्र हरियाली से वीरान होता चला जा रहा है। अनुराग यादव का कहना है क्षेत्र की पहचान च्यवन मंदिर के पीछे बना अजोम कुंड और पेड़ पौधों की हरियाली थी मगर यह दोनों शासन -प्रशासन की अनदेखी से अपना अस्तित्व खोते चले जा रहे हैं। युवा समाज सेवी संस्था की सचिव वंदना यादव का कहना है औंछा में कभी घना जंगल था। 88 हजार ऋषि मुनियों ने यहां तपस्या की थी। अब लोगों ने निजी स्वार्थ के चलते पेड़ कटवा दिए।
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वन विभाग के पौधे उचित देखभाल के अभाव में सूख रहे हैं। प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी सिद्धार्थ अंबेडकर का कहना है पौधे सूखने की बात उनकी जानकारी में नहीं है। जांच कराने के बाद कार्रवाई की जाएगी।