{"_id":"688faf371a0977eca7087ee6","slug":"women-of-the-group-are-strengthening-the-bond-of-relationships-with-rakhi-mahoba-news-c-225-1-sknp1044-116758-2025-08-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mahoba News: समूह की महिलाएं राखी से मजबूत कर रहीं रिश्तों की डोर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mahoba News: समूह की महिलाएं राखी से मजबूत कर रहीं रिश्तों की डोर
Mon, 04 Aug 2025 12:19 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
Updated Mon, 04 Aug 2025 12:19 AM IST
विज्ञापन
महोबा। रक्षाबंधन का त्योहार न सिर्फ भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक है बल्कि अब यह शहरी व ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की राह भी बन गया है। जिले के 20 से अधिक स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं इस बार राखियों का निर्माण कर रिश्तों की डोर को मजबूत कर रही हैं। प्रत्येक समूह को इस त्योहार में दो से ढाई लाख का मुनाफा होने की उम्मीद है।
यह महिलाएं पारंपरिक और आधुनिक शैली की राखियों का निर्माण कर रही हैं। इनमें गोटा, मोती, रेशम धागा, सजावटी सामान व पर्यावरण के अनुकूल सामग्री का उपयोग हो रहा है। समूहों ने राखियों की कीमत पांच से 50 रुपये तक रखी है। जिससे हर वर्ग के लोग इन्हें खरीद सकें। रामराजा स्वयं सहायता समूह समद नगर की अध्यक्ष साधना दौदेरिया, मिथलेश यादव, क्षमा सिंह ने बताया कि इस बार उन्होंने पिछले वर्षों की तुलना में अधिक मात्रा में राखियों का निर्माण किया है। उन्हें उम्मीद है कि स्थानीय बाजारों मेलों और लगाए गए स्टॉल के जरिए अच्छी बिक्री होगी। कई समूह ऑनलाइन माध्यम से भी ऑर्डर प्राप्त कर रहे हैं। इससे उनकी आमदनी में इजाफा होने की संभावना है। बताया कि इस बार उन्हें चार लाख से अधिक की राखियां बिकने की उम्मीद है।
पराशक्ति स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष पूनम, रजनी व राजकली बताती हैं कि दिन रात राखियां बनाई जा रही हैं। हाथों से निर्मित उनकी राखियोंं की डिमांड भी अच्छी आ रही है। रूद्राक्ष और मोती की राखी की अधिक मांग है। इनका निर्माण अधिक संख्या में किया जा रहा है।
विज्ञापन
-- -- -- -- --
हुनर से समाज में नई पहचान बना रहीं महिलाएं
महोबा। नगरीय विकास अभिकरण की ओर से जिले में करीब 220 स्वयं सहायता समूह का संचालन किया जा रहा है। स्वयं सहायता समूहों को जिला प्रशासन की ओर से प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि वे अपनी आर्थिक स्थिति को बेहतर बना सकें। इन महिलाओं का आत्मविश्वास देखकर स्पष्ट है कि वह अब केवल घर तक सीमित नहीं हैं। राखी बनाकर वह न केवल अपने परिवार की आर्थिक मदद कर रही हैं, बल्कि अपने हुनर से समाज में एक नई पहचान भी बना रही हैं। रक्षाबंधन के इस पावन अवसर पर यह प्रयास नारी सशक्तिकरण की एक सुंदर मिसाल बनकर सामने आया है।
-- -- -- -- --
समूह में जुड़ने पर मिलती है सहायता
महोबा। नगरीय विकास अभिकरण की सिटी मिशन मैनेजर नीलम गंगेले ने बताया कि समूह मेंं जुड़ने पर महिलाओं को सहायता उपलब्ध कराई जाती है। प्रत्येक समूह दस महिलाओंं का गठित किया जाता है। यदि कोई महिला नया समूह बनाती है तो दस महिलाओंं को जोड़कर उनके बैंक खाते खुलवाए जाते हैं। इसके बाद समूह का नाम चयन के बाद अध्यक्ष व सचिव चुनना होता है। विभाग प्रत्येक समूह को 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता मुहैया कराता है। अब यह धनराशि बढ़कर 25 हजार रुपये हो गई है।
विज्ञापन
यह महिलाएं पारंपरिक और आधुनिक शैली की राखियों का निर्माण कर रही हैं। इनमें गोटा, मोती, रेशम धागा, सजावटी सामान व पर्यावरण के अनुकूल सामग्री का उपयोग हो रहा है। समूहों ने राखियों की कीमत पांच से 50 रुपये तक रखी है। जिससे हर वर्ग के लोग इन्हें खरीद सकें। रामराजा स्वयं सहायता समूह समद नगर की अध्यक्ष साधना दौदेरिया, मिथलेश यादव, क्षमा सिंह ने बताया कि इस बार उन्होंने पिछले वर्षों की तुलना में अधिक मात्रा में राखियों का निर्माण किया है। उन्हें उम्मीद है कि स्थानीय बाजारों मेलों और लगाए गए स्टॉल के जरिए अच्छी बिक्री होगी। कई समूह ऑनलाइन माध्यम से भी ऑर्डर प्राप्त कर रहे हैं। इससे उनकी आमदनी में इजाफा होने की संभावना है। बताया कि इस बार उन्हें चार लाख से अधिक की राखियां बिकने की उम्मीद है।
विज्ञापन
पराशक्ति स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष पूनम, रजनी व राजकली बताती हैं कि दिन रात राखियां बनाई जा रही हैं। हाथों से निर्मित उनकी राखियोंं की डिमांड भी अच्छी आ रही है। रूद्राक्ष और मोती की राखी की अधिक मांग है। इनका निर्माण अधिक संख्या में किया जा रहा है।
विज्ञापन
हुनर से समाज में नई पहचान बना रहीं महिलाएं
महोबा। नगरीय विकास अभिकरण की ओर से जिले में करीब 220 स्वयं सहायता समूह का संचालन किया जा रहा है। स्वयं सहायता समूहों को जिला प्रशासन की ओर से प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि वे अपनी आर्थिक स्थिति को बेहतर बना सकें। इन महिलाओं का आत्मविश्वास देखकर स्पष्ट है कि वह अब केवल घर तक सीमित नहीं हैं। राखी बनाकर वह न केवल अपने परिवार की आर्थिक मदद कर रही हैं, बल्कि अपने हुनर से समाज में एक नई पहचान भी बना रही हैं। रक्षाबंधन के इस पावन अवसर पर यह प्रयास नारी सशक्तिकरण की एक सुंदर मिसाल बनकर सामने आया है।
समूह में जुड़ने पर मिलती है सहायता
महोबा। नगरीय विकास अभिकरण की सिटी मिशन मैनेजर नीलम गंगेले ने बताया कि समूह मेंं जुड़ने पर महिलाओं को सहायता उपलब्ध कराई जाती है। प्रत्येक समूह दस महिलाओंं का गठित किया जाता है। यदि कोई महिला नया समूह बनाती है तो दस महिलाओंं को जोड़कर उनके बैंक खाते खुलवाए जाते हैं। इसके बाद समूह का नाम चयन के बाद अध्यक्ष व सचिव चुनना होता है। विभाग प्रत्येक समूह को 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता मुहैया कराता है। अब यह धनराशि बढ़कर 25 हजार रुपये हो गई है।