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खेतों में पानी भरने से सड़ी गेहूं की फसल
अमर उजाला ब्यूरो महोबा
Updated Mon, 13 Apr 2015 11:41 PM IST
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जिले में ओलावृष्टि और अतिवृष्टि से पहले दलहन और तिलहन की फसलें बर्बाद हो गईं। अब दो दिनाें हो रही बारिश के चलते बची गेहूं की फसल बर्बाद हो गई है। जिससे किसान पूरी तरह से बर्बाद हो गए है। रविवार को हुई छुटपुट बारिश सोमवार को तेज होने से खेतों में पानी भर गया जिससे खेतों में पड़ी फसल सड़कर खराब हो गई।
इस वर्ष कुदरत का कहर किसानों पर ऐसा बरपा कि किसानों के आंखों के आंसू भी नहीं आ पा रहे हे। पहले फरवरी-मार्च में अतिवृष्टि और ओलावृष्टि से जिले की 90 फीसदी दलहन की फसल बर्बाद हो गई। वहीं 60 से 70 फीसदी गेहूं की फसल हो नुकसान हुआ था। शेष बची फसलाें पर रविवार- सोमवार को हुई बारिश किसानों की बची उम्मीदो पर पानी फेर दिया। खेतों में पानी भरने से फसल गीली होकर काली पड़ गई है। पनवाड़ी प्रतिनिधि के अनुसार, विकासखंड क्षेत्र में तेज बारिश के साथ ओले गिरने से गेहूं , राई और चने की फलियां गिरकर गईं। जिससे अब खेतों में सिर्फ डंठल खड़े हैं। ग्राम दिदौरा, तेलीपहाड़ी, घुटई, इमिलिया, कनकुआ, रूरीकला में ओलावृष्टि और बारिश से फसल को भारी नुकसान हुआ है।
सताने लगी कर्ज अदायगी की चिंता
फसल की जुताई बुवाई के लिए किसानों द्वारा लिए गए लाखाें रुपये कर्ज की चिंता सताने लगी है। एक तरफ किसानाें को रोजी रोटी के लाले पड़े हैं। वहीं दूसरी ओर बैंक और साहूकारों के कर्ज के चलते किसानों की रातों की नींद हराम है। किसानों ने फसल को बेंच कर साहूकारों और बैंक कर्ज अदायगी का भरोसा दिलाया था। लेकिन प्रकति के रूठने से कर्ज तो दूर दो जून की रोटी के भी लाले पड़े है।
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दैवीय आपदा ने कहीं का नहीं छोड़ा
मौसम के बदले मिजाज को देख किसान परिवार सहित खेतों में मड़ाई और कटाई में जुट गया था। ज्यादातर किसानों ने फसल की कटाई तो कर ली लेकिन मड़ाई के लिए वक्त नहीं मिला और तेज पानी, आंधी ने किसानों को बर्बाद कर दिया। कई खेतों में रखी गेहूं की फसल के चारों तरफ पानी भर जाने से नीचे के हिस्से की फसल सड़ गई। जबकि ऊपरी हिस्सेे की फसल काली पड़ गई।
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इस वर्ष कुदरत का कहर किसानों पर ऐसा बरपा कि किसानों के आंखों के आंसू भी नहीं आ पा रहे हे। पहले फरवरी-मार्च में अतिवृष्टि और ओलावृष्टि से जिले की 90 फीसदी दलहन की फसल बर्बाद हो गई। वहीं 60 से 70 फीसदी गेहूं की फसल हो नुकसान हुआ था। शेष बची फसलाें पर रविवार- सोमवार को हुई बारिश किसानों की बची उम्मीदो पर पानी फेर दिया। खेतों में पानी भरने से फसल गीली होकर काली पड़ गई है। पनवाड़ी प्रतिनिधि के अनुसार, विकासखंड क्षेत्र में तेज बारिश के साथ ओले गिरने से गेहूं , राई और चने की फलियां गिरकर गईं। जिससे अब खेतों में सिर्फ डंठल खड़े हैं। ग्राम दिदौरा, तेलीपहाड़ी, घुटई, इमिलिया, कनकुआ, रूरीकला में ओलावृष्टि और बारिश से फसल को भारी नुकसान हुआ है।
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सताने लगी कर्ज अदायगी की चिंता
फसल की जुताई बुवाई के लिए किसानों द्वारा लिए गए लाखाें रुपये कर्ज की चिंता सताने लगी है। एक तरफ किसानाें को रोजी रोटी के लाले पड़े हैं। वहीं दूसरी ओर बैंक और साहूकारों के कर्ज के चलते किसानों की रातों की नींद हराम है। किसानों ने फसल को बेंच कर साहूकारों और बैंक कर्ज अदायगी का भरोसा दिलाया था। लेकिन प्रकति के रूठने से कर्ज तो दूर दो जून की रोटी के भी लाले पड़े है।
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दैवीय आपदा ने कहीं का नहीं छोड़ा
मौसम के बदले मिजाज को देख किसान परिवार सहित खेतों में मड़ाई और कटाई में जुट गया था। ज्यादातर किसानों ने फसल की कटाई तो कर ली लेकिन मड़ाई के लिए वक्त नहीं मिला और तेज पानी, आंधी ने किसानों को बर्बाद कर दिया। कई खेतों में रखी गेहूं की फसल के चारों तरफ पानी भर जाने से नीचे के हिस्से की फसल सड़ गई। जबकि ऊपरी हिस्सेे की फसल काली पड़ गई।