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Mahoba News: उर्मिल ने नहीं दिया साथ, 18 गांव के किसान रहेंगे खाली हाथ
Thu, 02 Nov 2023 11:11 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
Updated Thu, 02 Nov 2023 11:11 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर (महोबा)। उर्मिल बांध की मुख्य नहर से पानी न छोड़े जाने से किसान परेशान हैं। सिंचाई के अभाव में क्षेत्र के 18 से अधिक गांवों के किसानों की करीब छह हजार हेक्टेयर भूमि पर रबी फसल की बुआई नहीं हो सकेगी। इससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें बढ़ती जा रही हैं। अन्नदाता परेशान हैं। इन किसानों के पास स्वयं के सिंचाई संसाधन नहीं है जिससे उन्हें रबी फसल की उपज मिलना मुश्किल नजर आ रहा है।
इस बार उर्मिल बांध में पानी की उपलब्धता कम होने से सिंचाई विभाग ने मुख्य नहर में पानी छोड़ने से हाथ खड़े कर दिए हैं। जिससे किसान मायूस हैं। मुख्य नहर में पानी न छोड़े जाने से श्रीनगर क्षेत्र के 18 गांव के किसानों की करीब छह हजार हेक्टेयर भूमि परती पड़ी रहेगी। पानी के अभाव में खेतों में रबी फसल की बुआई होना संभव नहीं है। सिंचाई विभाग ने किसानों को पानी के लिए अपना इंतजाम करने के लिए कहा है। उर्मिल बांध में पानी की आमद मप्र के ऊंचाई वाले इलाकों में बारिश से होती है।
इस साल बारिश कम होने से बांध में महज 4.5 मीटर ही पानी भंडारित हो सका। यूपी-एमपी के अधिकारियों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर के पिछले दिनों हुई बैठक में 60 फीसदी पानी मप्र और 40 फीसदी पानी उप्र के हिस्से में आया। यूपी के अधिकारियों ने अपने हिस्से के पानी को पेयजल के लिए संरक्षित कर लिया है। किसान लक्ष्मण सिंह, पुष्पराज सिंह, खेमचंद, रामकिशन, नीरज कुशवाहा, कल्लू यादव, राममिलन आदि का कहना है कि सिंचाई के साधन न होने से खेतों में बुआई करना संभव नहीं है।
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बांध क्षेत्र में चेकडैम बनाने से खड़ी हुई समस्या
फोटो 02 एमएएचपी 08 परिचय-जनक सिंह।
पिपरामाफ गांव निवासी भारतीय हलधर किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष जनक सिंह परिहार का कहना है कि मप्र के सिंचाई विभाग द्वारा बांध क्षेत्र के ऊंचाई वाले इलाकों में 20 चेकडैम बना लिए गए हैं। इसके चलते उर्मिल बांध में क्षमता के अनुरूप पानी नहीं भरता। जिसका खामियाजा क्षेत्र के किसानों को भुगतना पड़ता है। नहर में पानी छोड़ना चाहिए। पानी नहीं छोड़ा गया तो किसानों के सामने समस्या उत्पन्न होगी।
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कुंओं में भी नहीं है पर्याप्त पानी
फोटो 02 एमएएचपी 09 परिचय-अनुज कुमार।
कैमाहा गांव निवासी किसान अनुज कुमार का कहना है कि बारिश कम होने से कुंओं में पानी नहीं है। कृषि भूमि की सिंचाई नहर के पानी से ही होती थी, लेकिन सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने इस बार पानी छोड़ने से मना कर दिया। किसानों के सामने समस्या उत्पन्न हो गई है। खेतों में बुआई न होने से किसानों के सामने भरण-पोषण की समस्या उत्पन्न हो सकता है
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वर्जन
प्रदेश के हिस्से में जो पानी मिला है, वह पेयजल के लिए संरक्षित किया गया है। नहरों में पानी छोड़ना संभव नहीं है।
रोहित कुमार, अवर अभियंता, सिंचाई विभाग
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श्रीनगर (महोबा)। उर्मिल बांध की मुख्य नहर से पानी न छोड़े जाने से किसान परेशान हैं। सिंचाई के अभाव में क्षेत्र के 18 से अधिक गांवों के किसानों की करीब छह हजार हेक्टेयर भूमि पर रबी फसल की बुआई नहीं हो सकेगी। इससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें बढ़ती जा रही हैं। अन्नदाता परेशान हैं। इन किसानों के पास स्वयं के सिंचाई संसाधन नहीं है जिससे उन्हें रबी फसल की उपज मिलना मुश्किल नजर आ रहा है।
इस बार उर्मिल बांध में पानी की उपलब्धता कम होने से सिंचाई विभाग ने मुख्य नहर में पानी छोड़ने से हाथ खड़े कर दिए हैं। जिससे किसान मायूस हैं। मुख्य नहर में पानी न छोड़े जाने से श्रीनगर क्षेत्र के 18 गांव के किसानों की करीब छह हजार हेक्टेयर भूमि परती पड़ी रहेगी। पानी के अभाव में खेतों में रबी फसल की बुआई होना संभव नहीं है। सिंचाई विभाग ने किसानों को पानी के लिए अपना इंतजाम करने के लिए कहा है। उर्मिल बांध में पानी की आमद मप्र के ऊंचाई वाले इलाकों में बारिश से होती है।
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इस साल बारिश कम होने से बांध में महज 4.5 मीटर ही पानी भंडारित हो सका। यूपी-एमपी के अधिकारियों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर के पिछले दिनों हुई बैठक में 60 फीसदी पानी मप्र और 40 फीसदी पानी उप्र के हिस्से में आया। यूपी के अधिकारियों ने अपने हिस्से के पानी को पेयजल के लिए संरक्षित कर लिया है। किसान लक्ष्मण सिंह, पुष्पराज सिंह, खेमचंद, रामकिशन, नीरज कुशवाहा, कल्लू यादव, राममिलन आदि का कहना है कि सिंचाई के साधन न होने से खेतों में बुआई करना संभव नहीं है।
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बांध क्षेत्र में चेकडैम बनाने से खड़ी हुई समस्या
फोटो 02 एमएएचपी 08 परिचय-जनक सिंह।
पिपरामाफ गांव निवासी भारतीय हलधर किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष जनक सिंह परिहार का कहना है कि मप्र के सिंचाई विभाग द्वारा बांध क्षेत्र के ऊंचाई वाले इलाकों में 20 चेकडैम बना लिए गए हैं। इसके चलते उर्मिल बांध में क्षमता के अनुरूप पानी नहीं भरता। जिसका खामियाजा क्षेत्र के किसानों को भुगतना पड़ता है। नहर में पानी छोड़ना चाहिए। पानी नहीं छोड़ा गया तो किसानों के सामने समस्या उत्पन्न होगी।
कुंओं में भी नहीं है पर्याप्त पानी
फोटो 02 एमएएचपी 09 परिचय-अनुज कुमार।
कैमाहा गांव निवासी किसान अनुज कुमार का कहना है कि बारिश कम होने से कुंओं में पानी नहीं है। कृषि भूमि की सिंचाई नहर के पानी से ही होती थी, लेकिन सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने इस बार पानी छोड़ने से मना कर दिया। किसानों के सामने समस्या उत्पन्न हो गई है। खेतों में बुआई न होने से किसानों के सामने भरण-पोषण की समस्या उत्पन्न हो सकता है
वर्जन
प्रदेश के हिस्से में जो पानी मिला है, वह पेयजल के लिए संरक्षित किया गया है। नहरों में पानी छोड़ना संभव नहीं है।
रोहित कुमार, अवर अभियंता, सिंचाई विभाग