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सब्जी की कीमतों में आई तीन गुना महंगाई
अमर उजाला महोबा
Updated Sat, 18 Jun 2016 11:47 PM IST
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नहीं दिखते खरीदार
- फोटो : अमर उजाला
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बुंदेलखंड मेें सूखे के कारण सब्जियों के दाम आसमान छू रहे है। महंगाई के चलते पहले दाल और अब सब्जी भी गरीबों की थाली से गायब हो रही है। सब्जी की कीमतों में तीन गुना इजाफा होने से लोग खरीदने से कतराते हैं।
जिले के तालाब, बांध और कुओं के सूख जाने से जिले में सब्जी की पैदावार मामूली रह गई है। कुछ किसानों के खेतों में सब्जी लगाने के बाद भी पानी के अभाव में सूख गई। अब मजबूर होकर बाहर से सब्जी मंगाई जा रही है। यह सब्जियां काफी महंगी बिक रही हैं। जिससे गरीब वर्ग के लोगों का खरीद पानी मुश्किल है। एक साल पहले दालों की कीमत बढ़ने से गरीब वर्ग के लोग दाल का स्वाद नहीं ले पा रहे है। अब सब्जी भी उनकी थाली से गायब होती जा रही है।
करेला, अरबी और भिंडी 40 रुपये किलो बिक रही है। मुरार, बैगन और टमाटर की कीमत बढ़कर 50 रुपये किलो हो गई है। परवल 60, लौकी व कद्दू 25 और बरवटी 50 रुपये किलों है। आलू 20, गोभी 80, खीरा 50 रुपये किलो बिक रहा है। सब्जी की कीमतों में तीन गुना इजाफा हुआ है।
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बारिश न होने से पहले तालाबों ने जवाब दिया और अब कुओं का पानी भी पूरी तरह सूख गया है। जिससे हरी सब्जी पानी के अभाव में सूखने लगी। इससे सब्जी का उत्पादन तेजी से घटा और महानगरों से सब्जी आने के कारण इसकी कीमतों में इजाफा हुआ है। इसका असर आम आदमी पर पड़ रहा है।
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जिले के तालाब, बांध और कुओं के सूख जाने से जिले में सब्जी की पैदावार मामूली रह गई है। कुछ किसानों के खेतों में सब्जी लगाने के बाद भी पानी के अभाव में सूख गई। अब मजबूर होकर बाहर से सब्जी मंगाई जा रही है। यह सब्जियां काफी महंगी बिक रही हैं। जिससे गरीब वर्ग के लोगों का खरीद पानी मुश्किल है। एक साल पहले दालों की कीमत बढ़ने से गरीब वर्ग के लोग दाल का स्वाद नहीं ले पा रहे है। अब सब्जी भी उनकी थाली से गायब होती जा रही है।
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करेला, अरबी और भिंडी 40 रुपये किलो बिक रही है। मुरार, बैगन और टमाटर की कीमत बढ़कर 50 रुपये किलो हो गई है। परवल 60, लौकी व कद्दू 25 और बरवटी 50 रुपये किलों है। आलू 20, गोभी 80, खीरा 50 रुपये किलो बिक रहा है। सब्जी की कीमतों में तीन गुना इजाफा हुआ है।
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बारिश न होने से पहले तालाबों ने जवाब दिया और अब कुओं का पानी भी पूरी तरह सूख गया है। जिससे हरी सब्जी पानी के अभाव में सूखने लगी। इससे सब्जी का उत्पादन तेजी से घटा और महानगरों से सब्जी आने के कारण इसकी कीमतों में इजाफा हुआ है। इसका असर आम आदमी पर पड़ रहा है।