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Mahoba News: इस गर्मी में भी हलक रहेंगे सूखे, पानी नहीं दे पाएगी 294 करोड़ की योजना

Thu, 20 Mar 2025 12:44 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा Updated Thu, 20 Mar 2025 12:44 AM IST
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This summer too, throats will remain dry, 294 crore scheme will not be able to provide water
महोबा। हर घर, नल से जल तीन साल पहले ही पहुंच जाना चाहिए था। हालत यह है कि श्रीनगर क्षेत्र के अधिकतर गांवों के घरों में या तो नल लगा नहीं, यदि लग भी गया तो उससे पानी की बूंद भी नहीं टपक रही है। हालांकि, विभाग का दावा है कि 95 फीसदी काम पूरा हो गया है, लेकिन हकीकत में 85 प्रतिशत ही काम पूरा हुआ है।
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गर्मी के दस्तक देते ही ग्रामीण क्षेत्र के लोग पानी के लिए जद्दोजहद करने लगे हैं। साइकिल से दूर-दराज से पानी लगाकर जरूरतें पूरी कर रहे हैं। जब मार्च के दूसरे पखवाड़े में यह हाल है, तो अप्रैल, मई व जून में क्या हाल होगा? ऐसे में यदि धवर्रा-सिजवाहा पेयजल योजना पूरी हो गई होती तो इन ग्रामीणों को काफी राहत मिलती। ग्रामीण रामप्रताप, प्रमोद, दीपक, हरेंद्र, दीनदयाल आदि का कहना है कि जिम्मेदारों ने पाइप घरों के बाहर ही छोड़ दिए हैं। अधिकतर टोटियों से आजतक पानी की एक बूंद नहीं टपकी है।
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श्रीनगर क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में पेयजल संकट लंबे समय से चला आ रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए नमामि गंगे योजना के तहत धवर्रा-सिजवाहा पेयजल परियोजना शुरू की गई है। इसके तहत 97 गांवों को पेयजल की आपूर्ति व्यवस्था बनानी है। यानी हर घर नल से जल पहुंचाना है। परियोजना पर 294 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। धवर्रा-सिजवाहा पेयजल योजना का काम वर्ष 2019 में शुरू किया गया था। वर्ष 2022 में काम पूरा हो जाना था। आज तीन साल बाद भी यह परियोजना अधूरी है।
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परियोजना का काम पूरा करने के लिए तीन बार डेटलाइन बढ़ाई गई। इसके बावजूद इस महत्वाकांक्षी योजना का काम शत-प्रतिशत पूरा नहीं हो सका है। श्रीनगर कस्बे के आधे इलाकों में ही इस योजना के तहत पानी मिल रहा है। अधिकांश गांवों में पानी नहीं पहुंचा है। अजनर क्षेत्र के खमा व पठारी समेत छह गांवों में भी पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था नहीं है। परियोजना के तहत ही टंकी, फिल्टर प्लांट आदि बनाया जाना था। घरों में नल का कनेक्शन देते समय इस बात का ध्यान रखना था कि टोटियां खुली न रहें। स्टैंड पोस्ट घर के अंदर बनाए जाएं। आरोप है अधिकतर जगहों पर ऐसा नहीं किया गया है।

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धवर्रा-सिजवाहा पेयजल परियोजना का केवल पांच फीसदी काम रह गया है। इसे भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा। कार्यदायी संस्था को जल्द से जल्द काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
- मनोज राजपूत, जल निगम के सहायक अभियंता।
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