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Mahoba News: बीमा कंपनी की मिलीभगत से हुआ घोटाला, अधिकारी बने रहे अनजान

Sun, 14 Sep 2025 11:54 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा Updated Sun, 14 Sep 2025 11:54 PM IST
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The scam happened with the connivance of the insurance company, the officials remained unaware
12 सितंबर को प्रकाशित खबर।
महोबा। जिले में हुए फसल बीमा घोटाले में बीमा कंपनी के अधिकारियों-कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आ रही है। फर्जीवाड़ा करने वाले गिरोह ने पहाड़, वन, नदी व नालों में फसल की बोआई दिखाकर फसल का बीमा कराया तो वहीं कंपनी के अधिकारी-कर्मचारी भी फर्जी सत्यापन रिपोर्ट लगाकर क्लेम पास करते रहे। करोड़ों रुपये का घोटाला होने के बाद भी पुलिस बीमा कंपनी के जिला प्रबंधक को गिरफ्तार करने में सफल नहीं हो सकी है। हालांकि, फर्जीवाड़ा गिरोह के सात आरोपी अब तक गिरफ्तार करके जेल भेजे जा चुके हैं।
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जिले में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में करोड़ों रुपये के घोटाले की डीएम गजल भारद्वाज जांच करा रही हैं। उनके निर्देश पर शहर कोतवाली में इफको-टोकियो जनरल इंश्योरेंस कंपनी के जिला प्रबंधक निखिल चतुर्वेदी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी। इसके बाद फर्जीवाड़ा की परतें खुलने लगीं। जांच में गड़बड़ियां मिलने के बाद एफआईआर कराने का सिलसिला शुरु हुआ। इसमें अब तक विभिन्न लेखपालों की ओर से कुल छह एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी हैं। इनमें 26 नामजद सहित कई अज्ञात लोग आरोपी बनाए गए हैं। पहले तो यह फर्जीवाड़ा केवल बिचौलियों के जरिए किए जाने की आशंका थी लेकिन कोतवाली चरखारी में इफको-टोकिया जनरल इंश्योरेंस कंपनी के कर्मचारी गोविंद निवासी कुआं और कपिल सोनी निवासी मुस्करा-हमीरपुर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने के बाद कंपनी के अधिकारियों-कर्मचारियों की संलिप्तता की पुष्टि होने लगी है। इन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद इसमें संलिप्त अन्य लोगों के बारे में जानकारी मिल सकेगी। जय जवान, जय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष गुलाब सिंह राजपूत का कहना है कि जांच में उजागर हो चुका है कि जिले में कई पहाड़ों, नालों, नदी और वन भूमि तक में फर्जी तौर पर फसल की बोआई होने और खराब हो जाने पर भारी भरकम राशि बीमा क्लेम के रूप में भुगतान की गई है। बीमा कंपनी के कर्मचारियों ने बीमा क्लेम पास करते समय मौके पर जाकर नुकसान का सत्यापन ही नहीं किया और फर्जी सत्यापन रिपोर्ट लगाते हुए भुगतान कर दिया जबकि वास्तविक किसान बीमा कराने के बाद भी क्लेम पाने के लिए भटकता रहा। यह सब बीमा कंपनी के अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है।
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मूंगफली बोई नहीं और 17 लाख का मुआवजा निकाला


महोबा। किसान नेता गुलाब सिंह बताते हैं कि फर्जीवाड़ा बहुत बड़ा है। हालात ये हैं कि पलका गांव में मूंगफली बोआई का बीमा कराया गया। मूंगफली में ज्यादा प्रीमियम जमा होता है और ज्यादा क्लेम मिलता है। इसलिए यहां पर बिना बोआई किए ही मूंगफली का बीमा करके व्यक्तिगत दावे किए गए। इसमें नियमों के अनुसार बीमा कंपनी के कर्मचारियों को मौके पर जाकर सत्यापन करना चाहिए लेकिन मिलीभगत करते हुए 17 लाख रुपये का क्लेम ले लिया गया। इसी तरह के अन्य कई मामले भी सामने आ रहे हैं। इसलिए अब वे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग कर रहे हैं।
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12 सितंबर को प्रकाशित खबर।

12 सितंबर को प्रकाशित खबर।

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