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नए रूप में दिखेगा ऐतिहासिक कजली मेला
अमर उजाला ब्यूरो, महोबा
Updated Mon, 01 Aug 2016 10:58 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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उत्तर भारत का मशहूर कजली मेला इस दफा नए स्वरूप में नजर आएगा। पालिका प्रशासन और महोबा संरक्षण एवं विकास समिति ने संयुक्त रूप से इस बार परंपरागत कार्यक्रमों के अलावा कुछ हटकर कार्यक्र्रम कराने की रूपरेखा बनाई है। शोभायात्रा में दिवारी नृत्य की अलग अलग टोलियों के साथ राजस्थानी वेशभूषा में कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करते
नजर आएंगे। 19 अगस्त से शुरू हो रहे ऐतिहासिक कजली मेले को भव्य रूप देने के लिए मेला आयोजकों की बैठक शुरू हो गई है। तमाम कार्यक्रम तय भी कर लिए गए हैं। पांच दिन तक चलने वाले कजली मेले में निकाली जाने वाली भव्य शोभायात्रा का उद्घाटन 19 अगस्त को दोपहर 1.30 बजे किया जाएगा। कजली मेले में जुटने वाली लाखों की भीड़ की व्यवस्था के
लिए बाहर से पुलिस और पीएसी की मांग की गई है। इसके अलावा जिले भर की पुलिस फोर्स रहेगी। कजली मेले की परंपरागत झांकियों के अलावा इस दफा नई झांकियां भी देखने को मिलेगी। मेले को और आकर्षक बनाने के लिए झांकियों का पैसा ढाई हजार के स्थान पर तीन हजार कर दिया गया है। वहीं शोभायात्रा में नृत्य करने वाले घोड़ों का पैसा भी दोगुना कर
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दिया गया है। इस बार आल्हा, ऊदल, मलखान के प्रतिरूप के अलावा महारानी लक्ष्मीबाई, महाराणा प्रताप के प्रतिरूप भी घोड़ों पर नजर आएंगे। शोभायात्रा में 50 लमचूरा, दुलदुल घोड़ी सरस्वती विद्या मंदिर के छात्रों का बैंड भी नजर आएगा। इसके अलावा शोभायात्रा दौरान नवयुवक करतब दिखाते हुए आगे आगे चलेंगे। साथ ही बैंडबाजे और रब्बीबाजों के बीच भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी।
आज भी पहचान बनाए है कजली मेला
800 साल पुराना ऐतिहासिक कजली मेला आज भी अपनी पहचान बनाए हुए है। यही वजह है कि कजली मेले में हर साल भीड़ बढ़ती जा रही है। साथ ही मेले का स्वरूप भी बदलता जा रहा है। आज भी ग्रामीण कजली मेले में लाखों की भीड़ जुटती है। स्थिति यह है कि कजली मेला स्थल में अब भीड़ नहीं समा पाती।
राजकीय मेला घोषित, नहीं मिल रही धनराशि
उत्तर भारत के मशहूर कजली मेले को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने तीन साल पहले राजकीय मेला घोषित कर दिया था। लेकिन आज तक शासन ने मेले के आयोजन के लिए धनराशि आवंटित नहीं की। जिससे राजकीय मेला घोषित होने के बाद भी शासकीय कोई मदद नहीं मिल रही है। नतीजतन आज भी कजली मेले का आयोजन पालिका प्रशासन द्वारा कराया जाता है। राजकीय मेला घोषित होने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने अलग से कुछ कार्यक्रम कराने शुरूकरा दिए हैं।
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नजर आएंगे। 19 अगस्त से शुरू हो रहे ऐतिहासिक कजली मेले को भव्य रूप देने के लिए मेला आयोजकों की बैठक शुरू हो गई है। तमाम कार्यक्रम तय भी कर लिए गए हैं। पांच दिन तक चलने वाले कजली मेले में निकाली जाने वाली भव्य शोभायात्रा का उद्घाटन 19 अगस्त को दोपहर 1.30 बजे किया जाएगा। कजली मेले में जुटने वाली लाखों की भीड़ की व्यवस्था के
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लिए बाहर से पुलिस और पीएसी की मांग की गई है। इसके अलावा जिले भर की पुलिस फोर्स रहेगी। कजली मेले की परंपरागत झांकियों के अलावा इस दफा नई झांकियां भी देखने को मिलेगी। मेले को और आकर्षक बनाने के लिए झांकियों का पैसा ढाई हजार के स्थान पर तीन हजार कर दिया गया है। वहीं शोभायात्रा में नृत्य करने वाले घोड़ों का पैसा भी दोगुना कर
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दिया गया है। इस बार आल्हा, ऊदल, मलखान के प्रतिरूप के अलावा महारानी लक्ष्मीबाई, महाराणा प्रताप के प्रतिरूप भी घोड़ों पर नजर आएंगे। शोभायात्रा में 50 लमचूरा, दुलदुल घोड़ी सरस्वती विद्या मंदिर के छात्रों का बैंड भी नजर आएगा। इसके अलावा शोभायात्रा दौरान नवयुवक करतब दिखाते हुए आगे आगे चलेंगे। साथ ही बैंडबाजे और रब्बीबाजों के बीच भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी।
आज भी पहचान बनाए है कजली मेला
800 साल पुराना ऐतिहासिक कजली मेला आज भी अपनी पहचान बनाए हुए है। यही वजह है कि कजली मेले में हर साल भीड़ बढ़ती जा रही है। साथ ही मेले का स्वरूप भी बदलता जा रहा है। आज भी ग्रामीण कजली मेले में लाखों की भीड़ जुटती है। स्थिति यह है कि कजली मेला स्थल में अब भीड़ नहीं समा पाती।
राजकीय मेला घोषित, नहीं मिल रही धनराशि
उत्तर भारत के मशहूर कजली मेले को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने तीन साल पहले राजकीय मेला घोषित कर दिया था। लेकिन आज तक शासन ने मेले के आयोजन के लिए धनराशि आवंटित नहीं की। जिससे राजकीय मेला घोषित होने के बाद भी शासकीय कोई मदद नहीं मिल रही है। नतीजतन आज भी कजली मेले का आयोजन पालिका प्रशासन द्वारा कराया जाता है। राजकीय मेला घोषित होने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने अलग से कुछ कार्यक्रम कराने शुरूकरा दिए हैं।