{"_id":"6a46a8bc75b5bcda7d010431","slug":"the-former-mp-had-raised-the-demand-for-the-greenfield-highway-in-the-lok-sabha-eight-times-mahoba-news-c-225-1-mah1012-126722-2026-07-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mahoba News: पूर्व सांसद ने आठ बार लोकसभा में उठाई थी ग्रीनफील्ड हाईवे की मांग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mahoba News: पूर्व सांसद ने आठ बार लोकसभा में उठाई थी ग्रीनफील्ड हाईवे की मांग
विज्ञापन
फोटो 02 एमएएचपी 16 परिचय-पूर्व सांसद पुष्पेंद्र सिंह चंदेल। संवाद
महोबा। केंद्र सरकार की ओर से एक जुलाई को कानपुर-कबरई ग्रीनफील्ड हाईवे को मंजूरी देने पर पूर्व सांसद व उनके समर्थकों ने खुशी जताई है। लंबे इंतजार के बाद इस हाईवे को मंजूरी मिली है।
पूर्व सांसद पुष्पेंद्र सिंह चंदेल ने बताया कि अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने आठ बार लोकसभा में इस प्रोजेक्ट को लेकर सवाल किया था। इसके बाद केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय ने इस प्रोजेक्ट की रूपरेखा को तैयार की थी। वर्ष 2025 में मंत्रालय से इसे स्वीकृति मिली थी। इसके बाद एक जुलाई को इसे कैबिनेट से मंजूरी मिली है। इसके लिए 7,145.14 करोड़ रुपये स्वीकृति किया गया है।
उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट के लिए जब 27 जुलाई 2017 को सदन में बताया गया कि सुमेरपुर और एनएच-34 पर होने वाले हादसों में करीब 40 लोगों की मौत हो चुकी है तो इसे सदन ने नहीं माना। इसके बाद तीन अगस्त 2018 को सड़क दुर्घटनाओं के ठोस प्रमाण, अस्पताल व थानों से निकालकर सदन में रखे गए। इसके बाद इस प्रोजेक्ट की जरूरत को समझा गया था। 26 जून 2019 और 01 दिसम्बर 2021 को लोकसभा में इसे लेकर आवाज उठाई गई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
पूर्व सांसद पुष्पेंद्र सिंह चंदेल ने बताया कि अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने आठ बार लोकसभा में इस प्रोजेक्ट को लेकर सवाल किया था। इसके बाद केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय ने इस प्रोजेक्ट की रूपरेखा को तैयार की थी। वर्ष 2025 में मंत्रालय से इसे स्वीकृति मिली थी। इसके बाद एक जुलाई को इसे कैबिनेट से मंजूरी मिली है। इसके लिए 7,145.14 करोड़ रुपये स्वीकृति किया गया है।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट के लिए जब 27 जुलाई 2017 को सदन में बताया गया कि सुमेरपुर और एनएच-34 पर होने वाले हादसों में करीब 40 लोगों की मौत हो चुकी है तो इसे सदन ने नहीं माना। इसके बाद तीन अगस्त 2018 को सड़क दुर्घटनाओं के ठोस प्रमाण, अस्पताल व थानों से निकालकर सदन में रखे गए। इसके बाद इस प्रोजेक्ट की जरूरत को समझा गया था। 26 जून 2019 और 01 दिसम्बर 2021 को लोकसभा में इसे लेकर आवाज उठाई गई थी।
विज्ञापन