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तेज झटका लगा और मच गई चीख पुकार
ब्यूरो/अमर उजाला, महोबा
Updated Thu, 30 Mar 2017 11:16 PM IST
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युवती को सुरक्षित बाहर निकालते जवान
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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महाकौशल एक्सप्रेस जिस वक्त दुर्घटनाग्रस्त हुई, ज्यादातर यात्री गहरी नींद में थे। यात्रियों की मानें तो उन्हें तेज झटका लगा और नींद खुली तो हर तरफ चीख पुकार मची थी। कोई सामान ढूढ रहा था तो कोई अपने बच्चे को खोज रहा था। अंधेरा होने की वजह से कुछ भी दिखाई नहीं पड़ रहा था। करीब आधे घंटे बाद ग्रामीण टार्च से रोशनी किए और फिर उन्हें निकालना शुरू किए।
गेट नंबर 420 के पास हुए इस हादसे से यात्री बुरी तरह सहम गए। अपनों की तलाश मेें इधर-उधर भागने लगे। अंधरे में कोई किसी को नहीं पहचान नहीं पा रहे थे। सतना निवासी अरुणा अपनी बहन ऊषा सिंह के साथ आगरा जा रही थी। इस हादसे में अरुणा के घायल हो गई।
उसे एंबुलेंस से जिला अस्पताल भेज दिया। उधर, अरुणा अपनी बहन की खोज में इधर से उधर दौड़ती रही। मध्य प्रदेश के सतना निवासी डीके शर्मा अपनी पत्नी शोभा शर्मा के साथ ग्वालियर जा रहे थे। तभी जोरदार धमाके के साथ ट्रेन की सात बोगियां पटरी से नीचे जा गिरी। इसे दंपति बुरी तरह घायल हो गए। डिब्बे में और भी लोग मदद की उम्मीद में चीख रहे थे।
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सतना निवासी अरुणा अपनी बहन ऊषा को न पाकर रेलवे ट्रैक पर ही हर किसी से बहन के बारे में पूछने लगी। पता न चलने पर वह मायुस हो गई। सहारनपुर के गौतम कुमार अपने मित्र अकुंश से महोबा मिलने आया था।
अंकुश का कहना है कि रात 1:30 बजे उसने अपने मित्र गौतम कुमार को महाकौशल एक्सप्रेस में बैठा दिया। हादसे के बाद से वह अपने मित्र की तलाश कर रहे है। हरियाणा निवासी मंटूराम और सतना निवासी पीके पाल और कामना पाल का कहना है कि वह दिल्ली जा रहे थे। हादसा होने पर वह पल भर के लिए सबकुछ भूल गए।
ललितपुर निवासी भइयालाल और ग्वालियर निवासी पीके शर्मा अस्पताल पहुंचने के बाद घबराए हुए थे। उनका कहना है कि ग्रामीणों ने पुलिस से पहले पहुंचकर मदद की।
चारों ओर अंधेरा, बोगियों में एक दूसरे के ऊपर गिरे यात्री और चीखने की आवाजें भीषण ट्रेन हादसे की दास्तां बयां कर रही थीं। ट्रेन की एक बोगी में सवार ग्रेटर नोएडा निवासी लेखराज व उनकी पत्नी रेनू ने घटना के बाद जैसे ही अपने छह वर्षीय पुत्र लक्ष्य को सुरक्षित पाया तो वह रो पड़े ।
दुर्घटना में मासूम को एक खरोंच भी नहीं आई जबकि मासूम को सुरक्षित देख घायल हुए मां-बाप अपना दर्द भूल गए। वह रिश्तेदारी मे मध्यप्रदेश के कटनी गए थे। बुधवार की शाम तीनों जबलपुर से चलकर हजरत निजामुद्दीन जाने वाली महाकौशल एक्सप्रेस ट्रेन में सवार होकर घर वापस लौट रहे थे।
ट्रेन हादसे में घायलों को राहत पहुंचाने के लिए जिला और पुलिस प्रशासन ने घायल यात्रियों को उनके गतंव्य स्थानों तक भेजने के लिए रोडवेज की 20 बसें लगा दी। पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह ने तड़के सुबह पहुंचकर पुलिस कर्मचारियों को राहत कार्य के लिए लगा दिया। एआरएम महोबा रमाशंकर चौधरी और स्टेशन अधीक्षक सुनील शर्मा ने बसों में यात्रियों को बैठाकर भेजा। एआरएम ने बताया कि 10 बसें झांसी भेजी गई है। इसके अलावा अन्य स्थानों पर भी बसों को भेजा गया है।
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गेट नंबर 420 के पास हुए इस हादसे से यात्री बुरी तरह सहम गए। अपनों की तलाश मेें इधर-उधर भागने लगे। अंधरे में कोई किसी को नहीं पहचान नहीं पा रहे थे। सतना निवासी अरुणा अपनी बहन ऊषा सिंह के साथ आगरा जा रही थी। इस हादसे में अरुणा के घायल हो गई।
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उसे एंबुलेंस से जिला अस्पताल भेज दिया। उधर, अरुणा अपनी बहन की खोज में इधर से उधर दौड़ती रही। मध्य प्रदेश के सतना निवासी डीके शर्मा अपनी पत्नी शोभा शर्मा के साथ ग्वालियर जा रहे थे। तभी जोरदार धमाके के साथ ट्रेन की सात बोगियां पटरी से नीचे जा गिरी। इसे दंपति बुरी तरह घायल हो गए। डिब्बे में और भी लोग मदद की उम्मीद में चीख रहे थे।
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सतना निवासी अरुणा अपनी बहन ऊषा को न पाकर रेलवे ट्रैक पर ही हर किसी से बहन के बारे में पूछने लगी। पता न चलने पर वह मायुस हो गई। सहारनपुर के गौतम कुमार अपने मित्र अकुंश से महोबा मिलने आया था।
अंकुश का कहना है कि रात 1:30 बजे उसने अपने मित्र गौतम कुमार को महाकौशल एक्सप्रेस में बैठा दिया। हादसे के बाद से वह अपने मित्र की तलाश कर रहे है। हरियाणा निवासी मंटूराम और सतना निवासी पीके पाल और कामना पाल का कहना है कि वह दिल्ली जा रहे थे। हादसा होने पर वह पल भर के लिए सबकुछ भूल गए।
ललितपुर निवासी भइयालाल और ग्वालियर निवासी पीके शर्मा अस्पताल पहुंचने के बाद घबराए हुए थे। उनका कहना है कि ग्रामीणों ने पुलिस से पहले पहुंचकर मदद की।
चारों ओर अंधेरा, बोगियों में एक दूसरे के ऊपर गिरे यात्री और चीखने की आवाजें भीषण ट्रेन हादसे की दास्तां बयां कर रही थीं। ट्रेन की एक बोगी में सवार ग्रेटर नोएडा निवासी लेखराज व उनकी पत्नी रेनू ने घटना के बाद जैसे ही अपने छह वर्षीय पुत्र लक्ष्य को सुरक्षित पाया तो वह रो पड़े ।
दुर्घटना में मासूम को एक खरोंच भी नहीं आई जबकि मासूम को सुरक्षित देख घायल हुए मां-बाप अपना दर्द भूल गए। वह रिश्तेदारी मे मध्यप्रदेश के कटनी गए थे। बुधवार की शाम तीनों जबलपुर से चलकर हजरत निजामुद्दीन जाने वाली महाकौशल एक्सप्रेस ट्रेन में सवार होकर घर वापस लौट रहे थे।
ट्रेन हादसे में घायलों को राहत पहुंचाने के लिए जिला और पुलिस प्रशासन ने घायल यात्रियों को उनके गतंव्य स्थानों तक भेजने के लिए रोडवेज की 20 बसें लगा दी। पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह ने तड़के सुबह पहुंचकर पुलिस कर्मचारियों को राहत कार्य के लिए लगा दिया। एआरएम महोबा रमाशंकर चौधरी और स्टेशन अधीक्षक सुनील शर्मा ने बसों में यात्रियों को बैठाकर भेजा। एआरएम ने बताया कि 10 बसें झांसी भेजी गई है। इसके अलावा अन्य स्थानों पर भी बसों को भेजा गया है।