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बुंदेलों ने याद की जगदीश की कुर्बानी
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शहीद जगदीश यादव की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि देते लोग।
- फोटो : MAHOBA
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महोबा। कारगिल युद्ध में दुश्मनों से लोहा लेते शहीद हुए कमांडो जगदीश प्रसाद यादव के बलिदान दिवस पर बुुंदेलों ने समाधि स्थल पहुंचकर श्रद्घांजलि दी। परिवार के सदस्यों व स्कूली बच्चों ने हवन-पूजन में हिस्सा लेते हुए श्रद्घा-सुमन अर्पित किए। इस दौरान समाधि स्थल के समीप बरगद का पौधा रोपित कर सुरक्षा का संकल्प लिया गया।
पचपहरा गांव निवासी कारगिल शहीद जगदीश यादव के बलिदान दिवस पर बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर सदस्यों के साथ समाधि स्थल पहुंचे। शहीद के भाई गया शंकर व पूर्व फौजी रवींद्र सिंह के साथ उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर नमन किया।
कारगिल युद्ध में शहीद के साथ रहे पूर्व फौजी ने बताया कि दो जुलाई 1999 के वह खतरनाक पल कभी नहीं भूलते। कश्मीर के द्रास सेक्टर में सेना की टुकड़ी ऊंची पहाड़ी से गोला बारूद दागकर पाकिस्तानी सेना का मुकाबला कर रही थी। तभी एक गोला अचानक सीधे जगदीश की पीठ पर गिरा और वे बलिदान हो गए। जगदीश के भाई गया शंकर ने बताया कि पांच भाइयों में जगदीश दूसरे नंबर के थे। तत्कालीन डीएम के प्रयास से उनकी मां को पांच हजार रुपये पेंशन मिल रही है। इस मौके पर शहीद के भाई राजाभइया, प्रकाश, खेमराज, प्रदीप शुक्ला, डॉ. देवेंद्र पुरवार, गयाप्रसाद, सिद्धगोपाल सेन, महिपाल, पचपहरा विद्यालय के प्रधानाचार्य महेश वर्मा मौजूद रहे।
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पचपहरा गांव निवासी कारगिल शहीद जगदीश यादव के बलिदान दिवस पर बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर सदस्यों के साथ समाधि स्थल पहुंचे। शहीद के भाई गया शंकर व पूर्व फौजी रवींद्र सिंह के साथ उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर नमन किया।
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कारगिल युद्ध में शहीद के साथ रहे पूर्व फौजी ने बताया कि दो जुलाई 1999 के वह खतरनाक पल कभी नहीं भूलते। कश्मीर के द्रास सेक्टर में सेना की टुकड़ी ऊंची पहाड़ी से गोला बारूद दागकर पाकिस्तानी सेना का मुकाबला कर रही थी। तभी एक गोला अचानक सीधे जगदीश की पीठ पर गिरा और वे बलिदान हो गए। जगदीश के भाई गया शंकर ने बताया कि पांच भाइयों में जगदीश दूसरे नंबर के थे। तत्कालीन डीएम के प्रयास से उनकी मां को पांच हजार रुपये पेंशन मिल रही है। इस मौके पर शहीद के भाई राजाभइया, प्रकाश, खेमराज, प्रदीप शुक्ला, डॉ. देवेंद्र पुरवार, गयाप्रसाद, सिद्धगोपाल सेन, महिपाल, पचपहरा विद्यालय के प्रधानाचार्य महेश वर्मा मौजूद रहे।
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