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हिन्दू मुस्लिम एकता की मिसाल बनी शाहजहां
अमर उजाला ब्यूरो, महोबा
Updated Sun, 09 Oct 2016 11:42 PM IST
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मां दुर्गा की आरती करती शाहजहां
- फोटो : अमर उजाला
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रमजान माह में रोजा रखने और नवरात्र पर व्रत रखकर कस्बा श्रीनगर की शाहजहां ने हिन्दू मुस्लिम भाईचारा की अनूठी मिसाल पेश की है। शाहजहां नवरात्र पर्व पर किसी से कोई चंदा लिए बगैर अपने पैसे से मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कराने के साथ साथ नौ दिन तक सुबह शाम आरती करती हैं।
जहां लोग मजहब के नाम पर लड़ाई झगड़ा कर रहे हैं वहीं, जनपद महोबा के श्रीनगर में मुस्लिम महिला भाईचारा कायम कर रही है। मां के संस्कार पाकर उनका बेटा राजू भी नवरात्र पर नौ दिन तक व्रत रखता है। दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन दौरान शाहजहां विसर्जन जुलूस के साथ सात किमी दूर तक नदी तक
पैदल मां के जयकारे लगाते हुए पहुंचती हैं। कस्बा श्रीनगर के मोहल्ला दाऊपुरा निवासी शाहजहां (45) पत्नी गनी मुहम्मद तीन साल से अपना पैसा खर्च करके दरवाजे पर शारदीय नवरात्र पर दुर्गा प्रतिमा की स्थापना कराती हैं और प्रतिदिन सुबह शाम आरती करने पहुंचती है। शाहजहां का कहना है कि उसके
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माता पिता भी आरती करने व दुर्गा की स्थापना कराने के मामले में कोई आपत्ति नहीं करते बल्कि उसका साथ देते है। शाहजहां का कहना है कि वह अल्लाह ईश्वर को एक समान मानती है। उन्होंने बताया कि नवरात्र व्रत करने और देवी की प्रतिमा स्थापित करने की इच्छा उन्हें तब जाग्रत हुई जब उनके पति ने
उन्हें तलाक दे दिया। उस समय देवी के नवरात्र चल रहे थे। उन्होंने देवी मां से बेटे राजू की परवरिश और घर की खुशहाली के लिए कामना की। तभी से वह मां की प्रतिमा स्थापित कर व्रत रखने लगीं। आज मां की शक्ति से अकेले ही बेटे की परवरिश कर रही हैं।
तीन साल से करा रही प्रतिमा स्थापित
इस्लाम और हिंदू धर्म में आस्था रखने वाली शाहजहां पिछले तीन साल से नवरात्र पर मूर्ति स्थापित करा रही है। मूर्ति स्थापना के बाद मोहल्लेवालों द्वारा चंदे के रूप में सहयोग करने वालों से वह चंदा लेने से साफ इंकार कर देती है। उसका कहना है कि वह अपने पास से प्रतिमा स्थापित करने से लेकर लाउडस्पीकर, बिजली की सजावट व अन्य खर्च करती है। उन्हें देवी की कृपा से पैसा की कमी नही पड़ती।
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जहां लोग मजहब के नाम पर लड़ाई झगड़ा कर रहे हैं वहीं, जनपद महोबा के श्रीनगर में मुस्लिम महिला भाईचारा कायम कर रही है। मां के संस्कार पाकर उनका बेटा राजू भी नवरात्र पर नौ दिन तक व्रत रखता है। दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन दौरान शाहजहां विसर्जन जुलूस के साथ सात किमी दूर तक नदी तक
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पैदल मां के जयकारे लगाते हुए पहुंचती हैं। कस्बा श्रीनगर के मोहल्ला दाऊपुरा निवासी शाहजहां (45) पत्नी गनी मुहम्मद तीन साल से अपना पैसा खर्च करके दरवाजे पर शारदीय नवरात्र पर दुर्गा प्रतिमा की स्थापना कराती हैं और प्रतिदिन सुबह शाम आरती करने पहुंचती है। शाहजहां का कहना है कि उसके
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माता पिता भी आरती करने व दुर्गा की स्थापना कराने के मामले में कोई आपत्ति नहीं करते बल्कि उसका साथ देते है। शाहजहां का कहना है कि वह अल्लाह ईश्वर को एक समान मानती है। उन्होंने बताया कि नवरात्र व्रत करने और देवी की प्रतिमा स्थापित करने की इच्छा उन्हें तब जाग्रत हुई जब उनके पति ने
उन्हें तलाक दे दिया। उस समय देवी के नवरात्र चल रहे थे। उन्होंने देवी मां से बेटे राजू की परवरिश और घर की खुशहाली के लिए कामना की। तभी से वह मां की प्रतिमा स्थापित कर व्रत रखने लगीं। आज मां की शक्ति से अकेले ही बेटे की परवरिश कर रही हैं।
तीन साल से करा रही प्रतिमा स्थापित
इस्लाम और हिंदू धर्म में आस्था रखने वाली शाहजहां पिछले तीन साल से नवरात्र पर मूर्ति स्थापित करा रही है। मूर्ति स्थापना के बाद मोहल्लेवालों द्वारा चंदे के रूप में सहयोग करने वालों से वह चंदा लेने से साफ इंकार कर देती है। उसका कहना है कि वह अपने पास से प्रतिमा स्थापित करने से लेकर लाउडस्पीकर, बिजली की सजावट व अन्य खर्च करती है। उन्हें देवी की कृपा से पैसा की कमी नही पड़ती।