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Mahoba News: झमाझम बारिश से तिल की फसलें जलमग्न, बढ़ा खतरा
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फोटो 20 एचएएमपी 17- कुरारा के जखेला गांव में जलमग्न तिल की फसल। संवाद
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हमीरपुर/कुरारा/सुमेरपुर। जिले में बीते एक सप्ताह से चल रहा बारिश का सिलसिला तिल की फसलों के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है। खेतों के लबालब होने से तिल की फसल को देखकर किसान परेशान होने लगे हैं। सूखे के अंदेशे में इस बार किसानों ने तिल की फसल अधिक बोई है। अब बारिश ने इनके माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी है।
जिले भर में खरीफ सीजन में करीब दो लाख हेक्टेयर में फसलें बोए जाने का दावा कृषि विभाग कर रहा है। इनमें सबसे अधिक करीब 95 हजार हेक्टेयर में तिल की फसल बोए जाने का दावा किया जा रहा है। ऐसे में बीते एक सप्ताह से हो रही जिले भर में झमाझम बारिश के चलते तिल की फसलें खराब होने का खतरा मंडराने लगा है। कुरारा क्षेत्र में किसानों ने करीब दो हजार हेक्टेयर में तिल की फसल की बुआई की गई है। बीते तीन दिनों से लगातार बारिश होने से जखेला मौजे में गहराई वाले खेतों में खड़ी तिल की फसल पानी में डूब गई है। इससे तिल की फसल नष्ट होने की कगार पर पहुंच गई है। वहीं सुमेरपुर क्षेत्र में पिछले चार दिनों से कस्बा सहित ग्रामीण क्षेत्रों में हो रही झमाझम बारिश से खेत-खलिहान, तालाब, पोखर, नाला उफान मार रहे हैं। बारिश का पानी खेतों में भरने से क्षेत्र में बोई करीब 10 हजार हेक्टेयर तिल की फसल पर संकट मंडराने लगा है। कृषि रक्षा इकाई-सुमेरपुर के तकनीकी सहायक अजित शुक्ला ने बताया कि तिल की फसल में पानी नहीं भरना चाहिए, पानी तिल की फसल के लिए घातक हो सकता है। मौसम साफ होने के बाद ही नुकसान का अंदाजा लग सकेगा।
जिले भर में करीब 95 हजार हेक्टेयर में तिल की फसल किसानों ने बो रखी है। यह फसल कम वर्षा वाली है। किसानों को इसमें जलभराव नहीं होने देना चाहिए। मेड़ों का काटकर पानी की निकासी अवश्य कर दें। ऐसी कहीं से शिकायत आएगी तो सर्वे कराया जाएगा। किसानों से अपील है कि वह अच्छादित खरीफ फसलों का बीमा अवश्य करा लें जिससे कि नुकसान की भरपाई कराई जा सके। -डॉ. हरिशंकर, जिला कृषि अधिकारी।
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जिले भर में खरीफ सीजन में करीब दो लाख हेक्टेयर में फसलें बोए जाने का दावा कृषि विभाग कर रहा है। इनमें सबसे अधिक करीब 95 हजार हेक्टेयर में तिल की फसल बोए जाने का दावा किया जा रहा है। ऐसे में बीते एक सप्ताह से हो रही जिले भर में झमाझम बारिश के चलते तिल की फसलें खराब होने का खतरा मंडराने लगा है। कुरारा क्षेत्र में किसानों ने करीब दो हजार हेक्टेयर में तिल की फसल की बुआई की गई है। बीते तीन दिनों से लगातार बारिश होने से जखेला मौजे में गहराई वाले खेतों में खड़ी तिल की फसल पानी में डूब गई है। इससे तिल की फसल नष्ट होने की कगार पर पहुंच गई है। वहीं सुमेरपुर क्षेत्र में पिछले चार दिनों से कस्बा सहित ग्रामीण क्षेत्रों में हो रही झमाझम बारिश से खेत-खलिहान, तालाब, पोखर, नाला उफान मार रहे हैं। बारिश का पानी खेतों में भरने से क्षेत्र में बोई करीब 10 हजार हेक्टेयर तिल की फसल पर संकट मंडराने लगा है। कृषि रक्षा इकाई-सुमेरपुर के तकनीकी सहायक अजित शुक्ला ने बताया कि तिल की फसल में पानी नहीं भरना चाहिए, पानी तिल की फसल के लिए घातक हो सकता है। मौसम साफ होने के बाद ही नुकसान का अंदाजा लग सकेगा।
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जिले भर में करीब 95 हजार हेक्टेयर में तिल की फसल किसानों ने बो रखी है। यह फसल कम वर्षा वाली है। किसानों को इसमें जलभराव नहीं होने देना चाहिए। मेड़ों का काटकर पानी की निकासी अवश्य कर दें। ऐसी कहीं से शिकायत आएगी तो सर्वे कराया जाएगा। किसानों से अपील है कि वह अच्छादित खरीफ फसलों का बीमा अवश्य करा लें जिससे कि नुकसान की भरपाई कराई जा सके। -डॉ. हरिशंकर, जिला कृषि अधिकारी।
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