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बेमतलब साबित हो रही गांव में बनाई चरही
ब्यूरो अमर उजाला, महोबा
Updated Tue, 23 Feb 2016 12:33 AM IST
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सूखा अकाल के दौर में नगर पंचायत प्रशासन ने धन ठिकाने लगाने का खेल शुरू कर दिया है। अन्ना पशुओं के पानी पीने के नाम पर अनुपयोगी चरही हैंडपंपों से दूर समान लेबल में बनाकर खाना पूर्ति कर दी। हैंडपंपों का पानी गड्ढों और नालियों में बह रहा है। चरही सूखी पड़ी है, पशु प्यास से दम तोड़ रहे हैं।
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दैवी आपदा के बाद सूखा अकाल के संकट में पानी के गिरते जलस्तर के चलते कस्बा खरेला के तालाब पोखर सूखने से पशुओं के पीने के लिए पानी का संकट है।
पेयजल समस्या को देखते हुए प्रशासन के निर्देश पर नगर में पशुओं की संख्यानुसार वार्ड बार 12 स्थानों पर हैंडपंपों के नजदीक चरही निर्माण कराया था, लेकिन नगर पंचायत प्रशासन ने चरही का निर्माण अनुपयोगी तरीके से कर औपचारिकता निभाकर धन आहरित कर लिया।
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पानी चरही में न होने से मवेशियों के लिए पेयजल समस्या ज्यों की त्यों बनी है। लाखों रुपया खर्च कर बनाई गई चरही को हैंडपंप की नाली से नहीं जोड़ा गया। चरही निर्माण कराने वालों ने लगे हैंडपंप के तल बराबर चरही का निर्माण कराया, जिससे हैंडपंप का पानी चरही में भर पाना संभव ही नहीं है।
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हैंडपंपों का पानी ग्रामीणों के घरेलू निस्तारण के चलते नालियां और गड्ढों में बह रहा है। वहीं मवेशियों को बूंद बूंद पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। प्यास के चलते कई पशु दम तोड़ चुके है।
पशुपालक कुलदीप सिंह, पूरन सिंह, बाबू सैन, जीतेंद्र तिवारी आदि ने बताया कि चरही का गुणवत्ताहीन निर्माण कराया जलभराव के लिए जरूरत अनुसार चरही भी नहीं बनवाई।
बुंदेलखंड किसान संघ नगर अध्यक्ष द्विवेदी और भाजपा नेता शिवशंकर तिवारी, उमेश गुप्ता, रानू पाठक आदि ने बतायाकि चरही के निर्माण पर खानापूर्ति की गई है।
नगर पंचायत ईओ चरखारी एवं उपजिलाधिकारी ओमवीर सिंह का कहना है कि चरही का निर्माण उपयोगिता के अनुसार कराया जाएगा। अनुपयोगी चरही बनाने के मामले की मौके पर जाकर जांच की जाएगी। गलत निर्माण पाया तो भुगतान पर पाबंदी लगेगी।