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खुद का पैसा निकालने में भी मशक्कत
ब्यूरो अमर उजाला, महोबा
Updated Fri, 18 Nov 2016 12:22 AM IST
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इलाहाबाद त्रिवेणी बैंक में उमड़ी भीड़
- फोटो : amarujala
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500 व 1000 के नोट बंद चलन में बंद होने से ग्रामीण इलाके में हायतौबा मची है। ग्रामीण कामकाज छोड़कर सुबह से बैंकों के खुलने से पहले डट जाते हैं। बैंकों में अव्यवस्था और मनमानी का आलम यह है कि बैंक खाता धारक महिलाएं और पुरुष दो तीन दिन से भटक रहे हैं लेकिन पैसे नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसा ही नजारा गुरुवार को कस्बे में संचालित बैंकों में देखा गया। ग्रामीण खुद का ही पैसा निकालने के लिए दिनभर जूझ रहे हैं।
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सीन-1 समय 7 बजेः इलाहाबाद बैंक में लंबी-लंबी लाइनें लगी थी। लोग पैसा लेने के लिए सात बजे से ही बैंक के बाहर डटे थे। ग्राम मगरौल निवासी रामसिंह और थुरट निवासी कुंवरबाई ने बताया कि वह सात किमी पैदल चलकर तीन दिन से बैंक में आ रहीं है। लेकिन पैसा नहंी मिल रहा है। रामसिंह कहते हैं कि बैंक में पैसे नहंी बदल रहे है। जिससे स्थिति गड़बड़ा गई है।
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सीन-2 समय 7:30 बजेः एसबीआई में साढ़े सात बजे अमर उजाला की टीम पहुंची। जहां पर लोग एक दूसरे को धक्का मुक्की कर रहे थे। रागोलिया बुजुर्ग निवासी प्रमोद कुमार और थुरट निवासी रामस्वरूप का कहना है कि तीन दिन से बैंक में लाइन पर लगने के बाद भी नंबर आने तक पैसा खत्म हो जाता है। जिससे रोजमर्रा की वस्तुएं भी नहंी खरीद पा रहे हैं। बैंक के चक्कर लगाकर थक चुके लड़पुरा निवासी चंद्रपाल यादव बताते हैं कि वह मजबूरी में पांच सौ रुपये के एवज में तीन सौ रुपये लेकर काम चला रहे हैं।
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सीन-3 समय 8:40 बजेः इलाहाबाद बैंक खरेला शाखा में ताला लटका था। लेकिन लेनदेन के लिए सुबह से महिलाओं और पुरुषों की लंबी कतार लगी थी। अव्यवस्था के बीच उपभोक्ता धक्कामुक्की पर आमादा थे। भीड़ में बैठे 70 वर्षीय शिवप्रसाद गुप्ता ने बताया कि तीन दिन से रुपये निकालने आते हैं। रोजाना रुपये खत्म होना बताकर लौटा देते हैं। ग्राम ऐचाना के बाघराज सिंह और ग्राम बिदावर निवासी वाहसिंह ने बताया कि तीन दिन से रुपये के लिए पैदल चार किमी गांव से आते हैं। भांजे की 21 नवंबर को शादी है। रुपये न होने से सब कुछ फीका है।
कस्बा निवासी पप्पू पारासर बताते हैं कि बैंक कर्मचारी मनमाने तरीके से काम कर रहे है। चहेतों को 10 से 20 हजार रुपये तक दे रहे हैं। ग्रामीण रोजाना सुबह आकर मायूस घर लौट जाते हैं। राजाराम प्रजापति ने बताया कि 21 नवंबर को पुत्री की शादी है। तीन दिन से बैंक आता हूं महज आठ हजार रुपये निकले हैं। शादी की तैयारी भी नहीं हो पा रहीं हैं। ग्राम परथनिया निवासी रवि सिंह ने कहा कि यहां महिलाएं और पुरुषों की कोई अलग व्यवस्था नहंी है। पुलिस भी गौर नहंी रही है। दबंग लोग आगे आगे घुसकर रुपये निकाल ले जाते हैं।
सीन-4 समय 9 बजेः इलाहाबाद त्रिवेणी ग्रामीण बैंक में सुबह से एक सैकड़ा महिला पुरुष बैंक के गेट पर डटे मिले। थोड़ी देर बाद बैंक का चैनल खुला और जमा निकासी के बाउचर बैंक कर्मी वितरण करने लगा। कर्मी ने बताया कि निकासी के लिए धनराशि नहीं है। 11 बजे तक रुपया आने पर ही बांटा जाएगा। लेकिन 500 और 1000 के नोट जमा कर सकते हैं। बारी निवासी मदन ने बताया कि दो दिन से रुपया नहंी मिल पा रहा है। घरेलू खर्चा चल पाना मुश्किल है। पड़ोरा के शिवकुमार और दिनेश ने कहा कि लाइन में लगने के बाद भी शाम तक रुपया मिल पाने की गारंटी नहीं रहती है। दो दिन से रुपये के लिए बैंक के चक्कर लगाना पड़ रहे हैं।
बैंक से पैसा निकालने के लिए दिन दिन भर भूखे प्यासे खड़े लोगों की मदद के लिए अब आगे हाथ बढ़ने लगे हैं। शहर के पीएनबी, एसबीआई और इलाहाबाद बैंक में लाइन पर लगे लोगों के लिए भाजयुमोर्चा के जिलाध्यक्ष पंकज तिवारी, जिला उपाध्यक्ष अंकुर शिवहरे सहित तमाम कार्यकर्ताओं ने पानी पिलाकर लोगों को राहत दी। खन्ना प्रतिनिधि के अनुसार-कस्बे के बैंक में तेज धूप के बीच पैसा निकालने और जमा करने के लिए जूझ रहे ग्रामीणों को थानाध्यक्ष सतीशचंद्र शुक्ला ने पुलिस कर्मचारियों के साथ लाइन पर लगे लोगों को एक एक लड्डू और पानी पिलाया।