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मुकद्दस रमजान का आगाज, पहला रोजा आज
अमर उजाला महोबा
Updated Tue, 07 Jun 2016 12:21 AM IST
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सजावट कर तैयार की गई मस्जिद
- फोटो : अमर उजाला
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मुकद्दस रमजान का आगाज हो गया। शाम से ही लोग तरावीह की नमाज की तैयारी में जुट गए। तरावीह में कम से कम डेढ़ घंटे लगते हैं। इसलिए मस्जिदों में नमाजियों के लिए पानी और हवा के इंतजाम भी किए गए हैं। मस्जिदों में रंग बिरंगी झालरों से भी सजाया गया है।
शहर के मकनियापुरा, भटीपुरा, समदनगर, कसौरापुरा, चौसियापुरा, मिल्कीपुरा, शेखनपुरा, काजीपुरा सहित दो दर्जन से ज्यादा मोहल्लों में स्थित मस्जिदों में तरावीह पढ़ी गई। तरावीह में कुरान सुनाने के लिए हाफिजों को बाहर से बुलाया गया है। पांच दिन तो कहीं सात दिन में कुरान का पाठ मुकम्मल होता है। इन मस्जिदों में व्यापारी व अन्य लोगों की ज्यादा भीड़ जुटती है।
रमजान माह की शुरूआत होते ही मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में खासी चहल पहल बढ़ गई है। पूरे रमजान सुबह से देर रात तक चहल पहल बनी रहती है। रात में 11 बजे तक तरावीह सुनने के बाद रात्रि दो बजे से पुन: जाग कर सहरी की जाती है। इसके बाद फजिर की नमाज पढ़ी जाती है जिससे लोग इन दिनों दो तीन घंटे ही सो पाते है। रमजान शुरू होते ही मस्जिदों में नमाजियों की संख्या भी बढ़ गई है।
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मुकद्दस माह रमजान में एक माह तक रोजे रखने के साथ लोग मस्जिदों में इबादत तिलावत करते हैं लेकिन अभी तक पालिका प्रशासन द्वारा मस्जिदों के आसपास साफ सफाई के कोई इंतजाम नहीं किए गए। इससे मुस्लिम समुदाय के लोगों में खासा असंतोष है। अंधेरे में भी लोग मस्जिदों में तरावीह पढ़ने जाते हैं जिससे कूड़ा करकट से गुजर कर लोग मस्जिदों में पहुंचते हैं।
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शहर के मकनियापुरा, भटीपुरा, समदनगर, कसौरापुरा, चौसियापुरा, मिल्कीपुरा, शेखनपुरा, काजीपुरा सहित दो दर्जन से ज्यादा मोहल्लों में स्थित मस्जिदों में तरावीह पढ़ी गई। तरावीह में कुरान सुनाने के लिए हाफिजों को बाहर से बुलाया गया है। पांच दिन तो कहीं सात दिन में कुरान का पाठ मुकम्मल होता है। इन मस्जिदों में व्यापारी व अन्य लोगों की ज्यादा भीड़ जुटती है।
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रमजान माह की शुरूआत होते ही मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में खासी चहल पहल बढ़ गई है। पूरे रमजान सुबह से देर रात तक चहल पहल बनी रहती है। रात में 11 बजे तक तरावीह सुनने के बाद रात्रि दो बजे से पुन: जाग कर सहरी की जाती है। इसके बाद फजिर की नमाज पढ़ी जाती है जिससे लोग इन दिनों दो तीन घंटे ही सो पाते है। रमजान शुरू होते ही मस्जिदों में नमाजियों की संख्या भी बढ़ गई है।
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मुकद्दस माह रमजान में एक माह तक रोजे रखने के साथ लोग मस्जिदों में इबादत तिलावत करते हैं लेकिन अभी तक पालिका प्रशासन द्वारा मस्जिदों के आसपास साफ सफाई के कोई इंतजाम नहीं किए गए। इससे मुस्लिम समुदाय के लोगों में खासा असंतोष है। अंधेरे में भी लोग मस्जिदों में तरावीह पढ़ने जाते हैं जिससे कूड़ा करकट से गुजर कर लोग मस्जिदों में पहुंचते हैं।