{"_id":"5830995d4f1c1b392990084d","slug":"notes-the-closure-of-seed-fertilizer-crisis","type":"story","status":"publish","title_hn":"बड़े नोटों की बंदी से खाद बीज का संकट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बड़े नोटों की बंदी से खाद बीज का संकट
अमर उजाला ब्यूरो, महोबा
Updated Sat, 19 Nov 2016 11:56 PM IST
विज्ञापन
मंडी में पसरा सन्नाटा
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नोट बंदी से किसानों के खेत खाली पड़े हैं। जुताई-बुवाई के लिए पैसा न होने से किसान खाद बीज नहीं खरीद पा रहे हैं। 500 और 1000 के नोट बीज भंडार और साधन सहकारी समितियों ने भी लेने से मना कर दिया है। बड़े नोट न चलने से किसानों की खरीफ की फसल की बिक्री नहीं हो पा रही है। जिससे
व्यापारी भी उर्द, मूंग, तिल की खरीद नहीं कर रहा। इससे मंडी समितियों में सन्नाटा पसरा है। बीज भंडार और साधन सहकारी समितियों में खाद व बीज के लिए पहुंच रहे किसानों के 500 और 1000 के नोट नहीं लिए जा रहे हैं। किसान रामस्वरूप महोबा और राजेंद्र कुमार मिश्रा पवा का कहना है कि दिन
भर बैंक में लाइन पर लगने के बाद भी दो हजार रुपये बदले जा रहे हैं। इससे खाद बीज भी नहीं मिल पा रहा है। किसान जगदीश यादव श्रीनगर, नंदकिशोर का कहना है कि खरीफ की फसल बेचकर रबी की फसल की बुवाई की जाती है। लेकिन, इस साल नोट बंदी के चलते खरीफ की फसल को कोई नहीं पूछ रहा
विज्ञापन
है। प्राइवेट बीज विक्रेता भी खाद बीज नहीं दे रहे हैं। इससे किसान खासा परेशान है। समय से बुवाई न हो पाने के कारण रबी की फसल प्रभावित होने के आसार बढ़ गए हैं।
विज्ञापन
व्यापारी भी उर्द, मूंग, तिल की खरीद नहीं कर रहा। इससे मंडी समितियों में सन्नाटा पसरा है। बीज भंडार और साधन सहकारी समितियों में खाद व बीज के लिए पहुंच रहे किसानों के 500 और 1000 के नोट नहीं लिए जा रहे हैं। किसान रामस्वरूप महोबा और राजेंद्र कुमार मिश्रा पवा का कहना है कि दिन
विज्ञापन
भर बैंक में लाइन पर लगने के बाद भी दो हजार रुपये बदले जा रहे हैं। इससे खाद बीज भी नहीं मिल पा रहा है। किसान जगदीश यादव श्रीनगर, नंदकिशोर का कहना है कि खरीफ की फसल बेचकर रबी की फसल की बुवाई की जाती है। लेकिन, इस साल नोट बंदी के चलते खरीफ की फसल को कोई नहीं पूछ रहा
विज्ञापन
है। प्राइवेट बीज विक्रेता भी खाद बीज नहीं दे रहे हैं। इससे किसान खासा परेशान है। समय से बुवाई न हो पाने के कारण रबी की फसल प्रभावित होने के आसार बढ़ गए हैं।