{"_id":"64c2b8eb4e05d48c6305f194","slug":"no-toilets-in-593-houses-of-odf-declared-district-mahoba-news-c-225-1-mah1001-559-2023-07-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mahoba News: ओडीएफ घोषित जिले के 593 घरों में शौचालय नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mahoba News: ओडीएफ घोषित जिले के 593 घरों में शौचालय नहीं
विज्ञापन
महोबा। ग्रामीण स्तर पर चल रहे स्वच्छ भारत मिशन के क्रियांन्वयन पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। जिले को ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) घोषित किए जाने के बाद भी 593 परिवार ऐसे हैं जिनके पास शौचालय ही नहीं हैं। इन परिवारों के सदस्यों को व्यक्तिगत शौचालय के अभाव में दिक्कत हो रही है।
स्वच्छ भारत मिशन शासन की प्राथमिकता में शामिल है। जिसमें सबसे महत्वपूर्ण काम गांवों को ओडीएफ घोषित करना है। ओडीएफ के दायरे में वह गांव आते हैं जो खुले में शौच मुक्त होते हैं। महोबा जिले की सभी 273 ग्राम पंचायतों को विभागीय अधिकारियों की ओर से ओडीएफ घोषित किया जा चुका है। इनमें जिले की छह ग्राम पंचायतें तो ऐसी हैं जो ओडीएफ प्लस की श्रेणी में हैं। इन ग्राम पंचायतों को ओडीएफ तो घोषित कर दिया गया लेकिन कई परिवारों की शौचालय संबंधी परेशानी आज भी दूर नहीं हो सकी। 593 परिवारों के पास शौचालय न होने से उन्हें परेशानी हो रही है। ऐसे परिवारों की ओर से व्यक्तिगत शौचालय की डिमांड की गई है। सबसे ज्यादा समस्या चरखारी ब्लॉक के गांवों में है। चरखारी क्षेत्र में 350 परिवारों के पास शौचालय ही नहीं है। उधर, आवेदनों का विभाग की ओर से सत्यापन किया गया। जिसमें 396 आवेदन शौचालय के लिए पात्र पाए गए हैं।
व्यक्तिगत शौचालय का लाभ उन परिवार को मुहैया कराया जाता है जिनके पास शौचक्रिया के लिए शौचालय नहीं है। प्रत्येक लाभार्थी को योजना के तहत 12 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है। जिसमें छह हजार रुपये शौचालय बनवाने के लिए उन्हें सत्यापन के बाद मिलते हैं। ताकि वह काम शुरू करा सकें। काम पूरा होने पर छह हजार रुपये दिए जाते हैं। जिससे कि वह शौचालय से संबंधित अन्य काम करा सकें।
विज्ञापन
एक ग्राम पंचायत या एक गांव तब तक खुले में शौच से मुक्त नहीं माना जाता जब तक गांव का एक-एक व्यक्ति शौचालय का प्रयोग नहीं करने लगता हो। अगर उस गांव का छह माह का बच्चा भी शौचालय का प्रयोग नहीं कर रहा है तो उस गांव को खुले में शौच से मुक्त नहीं माना जाएगा। किसी भी ग्राम पंचायत में शत-प्रतिशत शौचालय का प्रयोग होने पर ही उस ग्राम पंचायत को ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) माना जाएगा जबकि ओडीएफ प्लस श्रेणी में वह गांव आते हैं, जिन्होंने ठोस या तरल अपशिष्ट प्रबंधन के साथ-साथ खुले में शौचमुक्त की स्थिति को बनाए रखा है।
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के जिला समन्वयक राहुल सिंह का कहना है कि आबादी बढ़ रही है। परिवार अलग हो रहे हैं। इसी वजह से व्यक्तिगत शौचालय के लिए लोग आवेदन कर रहे हैं। सत्यापन के बाद व्यक्तिगत शौचालयों के निर्माण की हरी झंडी दी जाएगी।
विज्ञापन
स्वच्छ भारत मिशन शासन की प्राथमिकता में शामिल है। जिसमें सबसे महत्वपूर्ण काम गांवों को ओडीएफ घोषित करना है। ओडीएफ के दायरे में वह गांव आते हैं जो खुले में शौच मुक्त होते हैं। महोबा जिले की सभी 273 ग्राम पंचायतों को विभागीय अधिकारियों की ओर से ओडीएफ घोषित किया जा चुका है। इनमें जिले की छह ग्राम पंचायतें तो ऐसी हैं जो ओडीएफ प्लस की श्रेणी में हैं। इन ग्राम पंचायतों को ओडीएफ तो घोषित कर दिया गया लेकिन कई परिवारों की शौचालय संबंधी परेशानी आज भी दूर नहीं हो सकी। 593 परिवारों के पास शौचालय न होने से उन्हें परेशानी हो रही है। ऐसे परिवारों की ओर से व्यक्तिगत शौचालय की डिमांड की गई है। सबसे ज्यादा समस्या चरखारी ब्लॉक के गांवों में है। चरखारी क्षेत्र में 350 परिवारों के पास शौचालय ही नहीं है। उधर, आवेदनों का विभाग की ओर से सत्यापन किया गया। जिसमें 396 आवेदन शौचालय के लिए पात्र पाए गए हैं।
विज्ञापन
व्यक्तिगत शौचालय का लाभ उन परिवार को मुहैया कराया जाता है जिनके पास शौचक्रिया के लिए शौचालय नहीं है। प्रत्येक लाभार्थी को योजना के तहत 12 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है। जिसमें छह हजार रुपये शौचालय बनवाने के लिए उन्हें सत्यापन के बाद मिलते हैं। ताकि वह काम शुरू करा सकें। काम पूरा होने पर छह हजार रुपये दिए जाते हैं। जिससे कि वह शौचालय से संबंधित अन्य काम करा सकें।
विज्ञापन
एक ग्राम पंचायत या एक गांव तब तक खुले में शौच से मुक्त नहीं माना जाता जब तक गांव का एक-एक व्यक्ति शौचालय का प्रयोग नहीं करने लगता हो। अगर उस गांव का छह माह का बच्चा भी शौचालय का प्रयोग नहीं कर रहा है तो उस गांव को खुले में शौच से मुक्त नहीं माना जाएगा। किसी भी ग्राम पंचायत में शत-प्रतिशत शौचालय का प्रयोग होने पर ही उस ग्राम पंचायत को ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) माना जाएगा जबकि ओडीएफ प्लस श्रेणी में वह गांव आते हैं, जिन्होंने ठोस या तरल अपशिष्ट प्रबंधन के साथ-साथ खुले में शौचमुक्त की स्थिति को बनाए रखा है।
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के जिला समन्वयक राहुल सिंह का कहना है कि आबादी बढ़ रही है। परिवार अलग हो रहे हैं। इसी वजह से व्यक्तिगत शौचालय के लिए लोग आवेदन कर रहे हैं। सत्यापन के बाद व्यक्तिगत शौचालयों के निर्माण की हरी झंडी दी जाएगी।