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हत्या के मामले में पिता-पुत्रों समेत पांच को उम्रकैद
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महोबा। शहर के अनाथालय के समीप पांच साल पहले युवक की गोली मारकर हत्या किए जाने के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश अवनीश कुमार राय ने शुक्रवार को फैसला सुनाया। साक्ष्यों एवं गवाहों के आधार पर पिता, दो पुत्रों समेत पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही दोषियों पर दो लाख 82 हजार 500 रुपये का जुुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना अदा न करने पर अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी।
सहायक शासकीय अधिवक्ता सुरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि घटना 28 जुलाई 2016 की है। थाना खरेला के कुआं गांव निवासी सुरेंद्र कुमार तिवारी ने पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि उनके बड़े भाई रविंद्र कुमार तिवारी शहर के गांधीनगर में रहते हैं। उनके दामाद शैलेंद्र अवस्थी और मलकपुरा निवासी रविशंकर मिश्रा पीडब्ल्यूडी में नौकरी करते हैं। रविशंकर प्रभावशाली होने के चलते अक्सर कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज व अभद्रता करता था। 28 जुलाई 2016 की दोपहर रविशंकर मिश्रा का उसके बड़े भाई के दामाद शैलेंद्र अवस्थी से विवाद हो गया। कार्यालय बंद होने पर शैलेंद्र अवस्थी ने इसकी सूचना अपने परिजनों व रिश्तेदारों दी। सूचना पर रविंद्र कुमार तिवारी, सुरेंद्र कुमार तिवारी, शैलेंद्र अवस्थी व भतीजा सौरभ तिवारी सुलह-समझौते के लिए रविशंकर मिश्रा के घर जा रहे थे। अनाथालय के समीप शाम करीब छह बजे पहले से खड़े रविशंकर मिश्रा व उसके साथियों ने सभी को घेर लिया और गाली-गलौज करते हुए हमलावर हो गए। रविशंकर मिश्रा के कहने पर अमित उर्फ मोनू मिश्रा ने तमंचे से गोली मार दी। जो रविंद्र तिवारी के दाहिने हाथ में लगी। फायरिंग की आवाज सुनकर आसपास मौजूद लोग दौड़े तो अभियुक्तों ने असलहा लहराते हुए धमकी दी। गोली लगने से घायल रविंद्र तिवारी को जिला अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया। इस मामले में रविशंकर मिश्रा, उसके पुत्र सनी उर्फ शैलेंद्र, अमित उर्फ मोनू मिश्रा निवासी मलकपुरा व शालू और कुलदीप के खिलाफ हत्या समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।
अपर सत्र न्यायाधीश अवनीश कुमार राय ने शुक्रवार को मामले की सुनवाई के बाद फैसला सुनाया। अदालत ने पीडब्ल्यूडी कर्मी रविशंकर मिश्रा, उसके दोनों पुत्र शनि उर्फ शैलेंद्र व अमित उर्फ मोनू मिश्रा और शालू व कुलदीप को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने प्रत्येक अभियुक्त को 56,500 रुपये का जुुर्माना ठोंका। जुर्माना अदा न करने पर एक-एक वर्ष की अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया गया।
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सहायक शासकीय अधिवक्ता सुरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि घटना 28 जुलाई 2016 की है। थाना खरेला के कुआं गांव निवासी सुरेंद्र कुमार तिवारी ने पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि उनके बड़े भाई रविंद्र कुमार तिवारी शहर के गांधीनगर में रहते हैं। उनके दामाद शैलेंद्र अवस्थी और मलकपुरा निवासी रविशंकर मिश्रा पीडब्ल्यूडी में नौकरी करते हैं। रविशंकर प्रभावशाली होने के चलते अक्सर कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज व अभद्रता करता था। 28 जुलाई 2016 की दोपहर रविशंकर मिश्रा का उसके बड़े भाई के दामाद शैलेंद्र अवस्थी से विवाद हो गया। कार्यालय बंद होने पर शैलेंद्र अवस्थी ने इसकी सूचना अपने परिजनों व रिश्तेदारों दी। सूचना पर रविंद्र कुमार तिवारी, सुरेंद्र कुमार तिवारी, शैलेंद्र अवस्थी व भतीजा सौरभ तिवारी सुलह-समझौते के लिए रविशंकर मिश्रा के घर जा रहे थे। अनाथालय के समीप शाम करीब छह बजे पहले से खड़े रविशंकर मिश्रा व उसके साथियों ने सभी को घेर लिया और गाली-गलौज करते हुए हमलावर हो गए। रविशंकर मिश्रा के कहने पर अमित उर्फ मोनू मिश्रा ने तमंचे से गोली मार दी। जो रविंद्र तिवारी के दाहिने हाथ में लगी। फायरिंग की आवाज सुनकर आसपास मौजूद लोग दौड़े तो अभियुक्तों ने असलहा लहराते हुए धमकी दी। गोली लगने से घायल रविंद्र तिवारी को जिला अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया। इस मामले में रविशंकर मिश्रा, उसके पुत्र सनी उर्फ शैलेंद्र, अमित उर्फ मोनू मिश्रा निवासी मलकपुरा व शालू और कुलदीप के खिलाफ हत्या समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।
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अपर सत्र न्यायाधीश अवनीश कुमार राय ने शुक्रवार को मामले की सुनवाई के बाद फैसला सुनाया। अदालत ने पीडब्ल्यूडी कर्मी रविशंकर मिश्रा, उसके दोनों पुत्र शनि उर्फ शैलेंद्र व अमित उर्फ मोनू मिश्रा और शालू व कुलदीप को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने प्रत्येक अभियुक्त को 56,500 रुपये का जुुर्माना ठोंका। जुर्माना अदा न करने पर एक-एक वर्ष की अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया गया।
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