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15 दिन में मेडिकल कॉलेज मंजूर न होने पर सीएम को लिखेंगे खून से खत
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अनशनस्थल पर जानकारी देते बुंदेली समाज के संयोजक
- फोटो : MAHOBA
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महोबा। एम्स व मेडिकल कॉलेज की मांग को लेकर चार वर्ष से नंगे पैर चल रहे बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने ऐलान किया है कि अगर पंद्रह दिन के अंदर महोबा का मेडिकल कॉलेज मंजूर नहीं किया गया तो अनशनकारी मुख्यमंत्री को खून से खत लिख कर भेजेंगे।
बुंदेलखंड राज्य की मांग को लेकर पिछले 508 दिन से आल्हा चौक में अनशन पर बैठे बुंदेली समाज के संयोजक ने कहा कि चंद नेताओं के निहित स्वार्थों की वजह से कभी महोबा का भला नहीं हो पाया। क्षेत्र के लिए तमाम बड़ी योजनाएं आईं और वापस लौट गईं लेकिन अब ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। खून से खत लिख कर मुख्यमंत्री को हकीकत से अवगत कराया जाएगा। तारा पाटकर ने कहा कि महोबा के लिए मेडिकल कॉलेज तो तीन साल पहले 2 नवंबर 2016 को तब पास हो चुका था जब वे एम्स के लिए अन्न त्याग सत्याग्रह कर रहे थे। उसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी परिवर्तन रैली में हिस्सा लेने महोबा आए थे लेकिन हमारे नेताओं की सुस्ती और आपसी खींचतान की वजह से अभी तक महोबा को मेडिकल कॉलेज नहीं मिल पाया।
छह माह पहले प्रदेश सरकार ने महोबा में मेडिकल कॉलेज खोले जाने की स्वीकृति दी लेकिन उसके लिए जगह तक तय नहीं हो पाई। उन्होंने बताया कि मरणासन्न स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने के लिए देश की सबसे लंबी लड़ाई महोबा में लड़ी गई। यहां के लोगों ने दो लाख से अधिक पोस्टकार्ड प्रधानमंत्री को भेजे। बहनों ने राखियां भेजी। 259 दिन अन्न त्याग सत्याग्रह किया। अब हम लोग खून से खत लिखेंगे। अनशन स्थल पर देवेंद्र तिवारी, कल्लू चौरसिया, कृष्णा शंकर जोशी, सुरेश सोनी, इकबाल भाई मौजूद रहे।
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बुंदेलखंड राज्य की मांग को लेकर पिछले 508 दिन से आल्हा चौक में अनशन पर बैठे बुंदेली समाज के संयोजक ने कहा कि चंद नेताओं के निहित स्वार्थों की वजह से कभी महोबा का भला नहीं हो पाया। क्षेत्र के लिए तमाम बड़ी योजनाएं आईं और वापस लौट गईं लेकिन अब ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। खून से खत लिख कर मुख्यमंत्री को हकीकत से अवगत कराया जाएगा। तारा पाटकर ने कहा कि महोबा के लिए मेडिकल कॉलेज तो तीन साल पहले 2 नवंबर 2016 को तब पास हो चुका था जब वे एम्स के लिए अन्न त्याग सत्याग्रह कर रहे थे। उसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी परिवर्तन रैली में हिस्सा लेने महोबा आए थे लेकिन हमारे नेताओं की सुस्ती और आपसी खींचतान की वजह से अभी तक महोबा को मेडिकल कॉलेज नहीं मिल पाया।
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छह माह पहले प्रदेश सरकार ने महोबा में मेडिकल कॉलेज खोले जाने की स्वीकृति दी लेकिन उसके लिए जगह तक तय नहीं हो पाई। उन्होंने बताया कि मरणासन्न स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने के लिए देश की सबसे लंबी लड़ाई महोबा में लड़ी गई। यहां के लोगों ने दो लाख से अधिक पोस्टकार्ड प्रधानमंत्री को भेजे। बहनों ने राखियां भेजी। 259 दिन अन्न त्याग सत्याग्रह किया। अब हम लोग खून से खत लिखेंगे। अनशन स्थल पर देवेंद्र तिवारी, कल्लू चौरसिया, कृष्णा शंकर जोशी, सुरेश सोनी, इकबाल भाई मौजूद रहे।
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