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Mahoba News: दिल्ली वालों की जुबां पर लागा दिल्ली का गुड
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खजूर की पेड़ की छाल काटकर डिब्बा लगाता किसान।
- फोटो : MAHOBA
बेलाताल (महोबा)। जिले के छह गांवों में खजूर से बनने वाला गुड़ तीन सौ परिवारों के लिए रोजी रोटी का साधन बना है। गुणों से भरपूर खजूर के गुड़ की महानगरों में तेजी से मांग बढ़ी है। यह गुड़ कानपुर, दिल्ली, मुंबई, कोलकाता व अन्य महानगरों में जाता है। सर्दी के मौसम में तीन माह चलने वाले इस कारोबार से लाखों की आमदनी होती है।
कुलपहाड़ के मंगरौल, सुगिरा, लोहारी, सतारी, बौरा समेत आधा दर्जन गांवों में खजूर के पेड़ भारी मात्रा में लगे हैं। यहां खासतौर पर खजूर का रस निकालकर गुड़ तैयार किया जाता है। लोगों ने पेड़ से रस निकालने से लेकर उसे बाजार में बेचने का पूरा नेटवर्क तैयार कर लिया है। ठेकेदार यहां आकर गुड़ खरीदते हैं और महानगरों में बेचते हैं। इस गुड़ से तैयार मिठाई महानगरों में 800 से 900 रुपये किलो बिकती है। व्यापारी किसानों से यह गुड़ 90 रुपये से लेकर 150 रुपये तक में खरीदते हैं।
खजूर के गुड़ का कारोबार करने वाले राजबहादुर, रामकिशुन, जयपाल, लाल सिंह बताते हैं कि वह शाम को खजूर के ऊंचे पेड़ों पर चढ़कर हल्की छाल काटकर प्लास्टिक के डिब्बे लटका देते हैं। खजूर से बूंद-बूंद निकला रस डिब्बों में एकत्र हो जाता है। सुबह डिब्बों को उतार लिया जाता है और फिर कढ़ाई में पकाकर सांचों में डालकर गुड़ की पारी तैयार की जाती है। एक पेड़ 20 साल तक रस देता है। वह इस कारोबार से चार दशक से जुड़े हैं। आमदनी बढ़ने से अन्य लोग भी इस कारोबार में आगे आ रहे हैं। महानगरों से आने वाले व्यापारी पहले से गुड़ की बुकिंग कर जाते हैं। (संवाद)
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प्रदेश सरकार लोकल फॉर वॉकल और स्थानीय खानपान को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है। महोबा के खजूर के गुड़ को ईको टूरिज्म में शामिल किए जाने की पहल तेज हो गई है। एक सप्ताह पहले महोबा आए मुख्य वन संरक्षक बांदा मनीष कुमार मित्तल ने खजूर का गुड़ बनाने वाले गांव का भ्रमण कर गुड़ बनाने की जानकारी ली थी और स्थानीय खानपान में खजूर के गुड़ को शामिल करने का भरोसा दिया था। इससे कामगारों में खुशी है।
कृषि विज्ञान केंद्र बेलाताल के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मुकेशचंद्र बताते हैं कि खजूर का गुड़ सेहत के लिए बेहद मुफीद है। गुड़ में आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन व विटामिन बी-1 होता है। यह पेट के रोग और कब्ज को हटाने व महिलाओं में एनीमिया खून की कमी को दूर करने मे सहायक होता है जबकि पुरुषों के लिए शक्तिवर्धक होता है। यह गुड़ शुगर फ्री होता है। खजूर से पेड़ से रस निकलने में कोई हानि नहीं होती है। रस निकालने के एक साल बाद पेड़ पुन: रस देता है।
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कुलपहाड़ के मंगरौल, सुगिरा, लोहारी, सतारी, बौरा समेत आधा दर्जन गांवों में खजूर के पेड़ भारी मात्रा में लगे हैं। यहां खासतौर पर खजूर का रस निकालकर गुड़ तैयार किया जाता है। लोगों ने पेड़ से रस निकालने से लेकर उसे बाजार में बेचने का पूरा नेटवर्क तैयार कर लिया है। ठेकेदार यहां आकर गुड़ खरीदते हैं और महानगरों में बेचते हैं। इस गुड़ से तैयार मिठाई महानगरों में 800 से 900 रुपये किलो बिकती है। व्यापारी किसानों से यह गुड़ 90 रुपये से लेकर 150 रुपये तक में खरीदते हैं।
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खजूर के गुड़ का कारोबार करने वाले राजबहादुर, रामकिशुन, जयपाल, लाल सिंह बताते हैं कि वह शाम को खजूर के ऊंचे पेड़ों पर चढ़कर हल्की छाल काटकर प्लास्टिक के डिब्बे लटका देते हैं। खजूर से बूंद-बूंद निकला रस डिब्बों में एकत्र हो जाता है। सुबह डिब्बों को उतार लिया जाता है और फिर कढ़ाई में पकाकर सांचों में डालकर गुड़ की पारी तैयार की जाती है। एक पेड़ 20 साल तक रस देता है। वह इस कारोबार से चार दशक से जुड़े हैं। आमदनी बढ़ने से अन्य लोग भी इस कारोबार में आगे आ रहे हैं। महानगरों से आने वाले व्यापारी पहले से गुड़ की बुकिंग कर जाते हैं। (संवाद)
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प्रदेश सरकार लोकल फॉर वॉकल और स्थानीय खानपान को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है। महोबा के खजूर के गुड़ को ईको टूरिज्म में शामिल किए जाने की पहल तेज हो गई है। एक सप्ताह पहले महोबा आए मुख्य वन संरक्षक बांदा मनीष कुमार मित्तल ने खजूर का गुड़ बनाने वाले गांव का भ्रमण कर गुड़ बनाने की जानकारी ली थी और स्थानीय खानपान में खजूर के गुड़ को शामिल करने का भरोसा दिया था। इससे कामगारों में खुशी है।
कृषि विज्ञान केंद्र बेलाताल के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मुकेशचंद्र बताते हैं कि खजूर का गुड़ सेहत के लिए बेहद मुफीद है। गुड़ में आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन व विटामिन बी-1 होता है। यह पेट के रोग और कब्ज को हटाने व महिलाओं में एनीमिया खून की कमी को दूर करने मे सहायक होता है जबकि पुरुषों के लिए शक्तिवर्धक होता है। यह गुड़ शुगर फ्री होता है। खजूर से पेड़ से रस निकलने में कोई हानि नहीं होती है। रस निकालने के एक साल बाद पेड़ पुन: रस देता है।