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महोबा सीट से बसपा ने संजय साहू, चरखारी सीट से कांग्रेस ने निर्दोष दीक्षित को बनाया उम्मीदवार

Fri, 28 Jan 2022 12:36 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 28 Jan 2022 12:36 AM IST
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निर्दोष दीक्षित। - फोटो : MAHOBA
महोबा। टिकट को लेकर असमंजस की स्थिति को विराम देकर महोबा विधान सभा से बसपा ने अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया। हालांकि बसपा ने चरखारी विधान सभा से अभी प्रत्याशी का एलान नहीं किया है। वहीं, चरखारी विधानसभा से कांग्रेस ने भी अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। बसपा ने अब तक चरखारी में अपना प्रत्याशी घोषित नहीं किया है।
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बता दें कि लंबे समय से बसपा से टिकट को लेकर अटकलें चल रही थी। महोबा विधानसभा से बसपा ने सपा नेता व पूर्व मंत्री सिद्धगोपाल साहू के भाई संजय साहू को उम्मीदवार बनाया है। संजय क्रशर व्यवसायी हैं। जबकि कांग्रेस ने चरखारी विधानसभा से निर्दोष दीक्षित को प्रत्याशी बनाया है। वह उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश सचिव रह चुके हैं। साथ ही मंडलों के प्रभारी व सह प्रभारी रहे हैं।
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उम्मीदवार का प्रोफाइल
विधानसभा- महोबा
नाम- संजय साहू
उम्र- 45
शिक्षा- स्नातक
2019 लोकसभा चुनाव में निर्दलीय ताल ठोंक चुके हैं, जिसमें हार गए थे।
उम्मीदवार का प्रोफाइल
विधानसभा- चरखारी
नाम- निर्दोष दीक्षित
उम्र - 39
शिक्षा- एमएससी, बीएड
लोकसभा चुनाव में टिकट न मिलने पर बागी हो गए थे संजय
वीर भूमि महोबा का व्यवसायी समृद्ध साहू परिवार का राजनीति में हमेशा दखल रहा है। लोकसभा की तरह विधानसभा में भी साहू परिवार को समाजवादी पार्टी से टिकट न मिलने पर बगावत का असर दिखाई दे रहा है। सपा नेता पूर्व मंत्री सिद्ध गोपाल साहू के भाई इस बार हाथी से टिकट लेकर मैदान में कूद गए हैं। जबकि लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन से टिकट कटने पर संजय साहू ने निर्दलीय ही ताल ठोक दी थी।
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विधानसभा चुनाव को लेकर बीते 7 अक्तूबर को जनपद में नरेश उत्तम की यात्रा में कार्यकर्ताओं को हुजूम जोड़कर अपनी ताकत का अहसास कराया था। इस बार सिद्धगोपाल भी टिकट के दावेदारों में सबसे आगे चल रहे थे लेकिन पार्टी ने सोशल इंजीनियरिंग के तहत ब्राह्मण चेहरे पर दांव लगाया है। सिद्धगोपाल साहू का टिकट कटने पर संजय साहू ने बसपा से टिकट पा लिया है। संजय के उतरने से सपा के वोटबैंक में सेंधमारी लगना तय मानी जा रही है। बागी नेता चुनाव में हारे या जीते लेकिन अन्य प्रत्याशियों के समीकरण बिगाड़ दिए है।

करीब डेढ़ दशक तक बसपा का झंडा थामे रहे संजय साहू के पिता छंगा साहू ने बसपा के टिकट पर 1993 में हुए सपा-बसपा गठबंधन में चुनाव लड़ा था लेकिन वह करीब 950 मतों से चुुनाव हार गए थे। इसके बाद बसपा के टिकट पर 1996 में झांसी-ललितपुर संसदीय क्षेत्र से भी छंगा साहू ने लोकसभा चुनाव लड़ा और दूसरे नंबर पर आए। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में छंगा साहू के बड़े पुत्र सिद्धगोपाल साहू ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और 1,73,638 मत पाकर दूसरे नंबर पर रहे। 25,504 मतों से वह बसपा के विजय बहादुर से चुनाव हार गए थे।

संजय साहू।

संजय साहू।- फोटो : MAHOBA

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