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हर्षोल्लास से मनी नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जयंती
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माल्यार्पण कर भारत माता की जय के नारे लगाते समाजसेवी व अखंड हिंद फौज के छात्र।
- फोटो : MAHOBA
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महोबा। जिले में नेताजी सुभाषचंद्र बोस की 125वीं जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। जगह-जगह कार्यक्रमों के आयोजन हुए। सुभाष चौक स्थित प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनके जीवन पर प्रकाश डाला गया। इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि नेताजी हर युवा के लिए प्रेेरणा हैं। उन्होंने भारतीयों के रक्त में देशभक्ति की आग लगाने वाला नारा ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा’ दिया था।
अखंड हिंद फौज के छात्रों व ब्राह्मण समाज के लोगों ने सुभाष चंद्र बोस की जयंती सुभाष चौक पर कोविड गाइडलाइन के अनुसार मनाई। सबसे पहले उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर भारत माता की जय के नारे लगाए गए। इस मौके पर अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष आरबी पटैरिया ने कहा कि उनका जन्म उड़ीसा के कटक में हुआ था। उन्हें अंग्रेजों की गुलामी मंजूर नहीं थी इसलिए भारतीय प्रशासनिक सेवा को बीच में ही छोड़कर आ गए। भारत के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी और महान क्रांतिकारी नेताजी सुभाषचंद्र बोस हमेशा युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत रहेंगे।
इस मौके पर समाजसेवी शिवकुमार गोस्वामी, शरद तिवारी दाऊ, संतोष पटैरिया, कैलाश कुशवाहा, अमित, संकेत, खालिक अंसारी, सत्तार आदि मौजूद रहे। इसी तरह जयंती पर सुभाष चौक में आयोजित कार्यक्रम में अपर एसपी आरके गौतम, सीओ रामप्रवेश राय व अन्य अधिकारियों ने प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके द्वारा किए गए महान कार्यों को याद किया।
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बुंदेली समाज ने उठाई खंडित प्रतिमा बदलने की मांग
महोबा। सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर बुंदेली समाज ने सुभाष चौक स्थित प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। सुभाष चौक में लगी प्रतिमा खंडित होने पर उसे बदलने की मांग की। बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने बताया कि सुभाष चौक पर इस प्रतिमा का लोकार्पण पांच नवंबर 2000 को तत्कालीन डीएम आलोक कुमार ने किया था। उसी के बाद इस चौराहे का नाम सुभाष चौक हो गया। संगमरमर की यह प्रतिमा अचानक कैसे खंडित हो गई, इसमें दरार आ गईं हैं। उन्होंने कहा कि महोबा के प्रमुख चौराहे पर नेताजी की खंडित प्रतिमा लगा रहना उनका सम्मान नहीं बल्कि अपमान है। प्रशासन शीघ्र नई प्रतिमा लगवाए। चेतावनी दी कि यदि खंडित प्रतिमा नहीं बदली गई तो बुंदेली समाज आंदोलन के लिए मजबूर होगा।
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अखंड हिंद फौज के छात्रों व ब्राह्मण समाज के लोगों ने सुभाष चंद्र बोस की जयंती सुभाष चौक पर कोविड गाइडलाइन के अनुसार मनाई। सबसे पहले उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर भारत माता की जय के नारे लगाए गए। इस मौके पर अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष आरबी पटैरिया ने कहा कि उनका जन्म उड़ीसा के कटक में हुआ था। उन्हें अंग्रेजों की गुलामी मंजूर नहीं थी इसलिए भारतीय प्रशासनिक सेवा को बीच में ही छोड़कर आ गए। भारत के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी और महान क्रांतिकारी नेताजी सुभाषचंद्र बोस हमेशा युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत रहेंगे।
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इस मौके पर समाजसेवी शिवकुमार गोस्वामी, शरद तिवारी दाऊ, संतोष पटैरिया, कैलाश कुशवाहा, अमित, संकेत, खालिक अंसारी, सत्तार आदि मौजूद रहे। इसी तरह जयंती पर सुभाष चौक में आयोजित कार्यक्रम में अपर एसपी आरके गौतम, सीओ रामप्रवेश राय व अन्य अधिकारियों ने प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके द्वारा किए गए महान कार्यों को याद किया।
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बुंदेली समाज ने उठाई खंडित प्रतिमा बदलने की मांग
महोबा। सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर बुंदेली समाज ने सुभाष चौक स्थित प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। सुभाष चौक में लगी प्रतिमा खंडित होने पर उसे बदलने की मांग की। बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने बताया कि सुभाष चौक पर इस प्रतिमा का लोकार्पण पांच नवंबर 2000 को तत्कालीन डीएम आलोक कुमार ने किया था। उसी के बाद इस चौराहे का नाम सुभाष चौक हो गया। संगमरमर की यह प्रतिमा अचानक कैसे खंडित हो गई, इसमें दरार आ गईं हैं। उन्होंने कहा कि महोबा के प्रमुख चौराहे पर नेताजी की खंडित प्रतिमा लगा रहना उनका सम्मान नहीं बल्कि अपमान है। प्रशासन शीघ्र नई प्रतिमा लगवाए। चेतावनी दी कि यदि खंडित प्रतिमा नहीं बदली गई तो बुंदेली समाज आंदोलन के लिए मजबूर होगा।