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महोबा : 16 घंटे अंधेरे में डूबा रहा अस्पताल, टॉर्च की रोशनी में हुआ इलाज
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महोबा/चरखारी। जिले की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार नहीं हो पा रहा है। ट्रांसफॉर्मर फुंकने से सीएचसी चरखारी की बिजली करीब 16 घंटे तक गुल रही। इमरजेंसी वार्ड में मोबाइल फोन की टॉर्च जलाकर मरीजों का इलाज किया गया। मरीजों, तीमारदारों के हंगामा करने के बावजूद इमरजेंसी व जनरल वार्ड की लाइन जनरेटर से नहीं जुड़वाई गई।
सीएचसी के पास लगा ट्रांसफॉर्मर शुक्रवार सुबह करीब पांच बजे फुंक गया था। पूरा दिन इमरजेंसी और जनरल वार्ड में मरीज और तीमारदार परेशान होते रहे।
रात करीब 8:30 बजे कस्बे के दीपू साहू को लेकर परिजन सीएचसी पहुंचे। सीढ़ियों से गिरने के कारण उनके सिर में गंभीर चोट आई थी। टॉर्च की रोशनी में फॉर्मासिस्ट ने टांके लगाए और उपचार किया।
इलाज कराने आए छोटा रमना निवासी शोभित यादव, अमित, दीपेंद्र, पार्वती, विमलेश, जुगलकिशोर, मंजू आदि ने हो-हल्ला मचाकर जनरेटर चलाने के लिए कहा, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया।
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सीएचसी के प्रभारी अधीक्षक राजेश वर्मा ने कहा कि जनरेटर चलाया गया था लेकिन उसकी आपूर्ति महिला वार्ड में है। दूसरा जनरेटर कोविड अस्पताल में रखा है। रात 9:30 बजे बिजली आ गई थी। इससे पहले कुछ मरीजों का इलाज मोबाइल के टॉर्च की रोशनी में किया गया।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. डीके गर्ग का कहना है कि ट्रांसफॉर्मर फुंकने से सीएचसी चरखारी की बिजली आपूर्ति ठप हुई थी। नया ट्रांसफॉर्मर स्थापित होने और तेल गर्म होने में समय लगा। शाम सात बजे वह स्वयं सीएचसी गए थे। उनके सामने ही ट्रांसफॉर्मर स्थापित हुआ। जनरेटर चलाया गया था। इमरजेंसी और पुरुष वार्ड में जनरेटर से आपूर्ति न होने की जांच कराई जाएगी।
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सीएचसी के पास लगा ट्रांसफॉर्मर शुक्रवार सुबह करीब पांच बजे फुंक गया था। पूरा दिन इमरजेंसी और जनरल वार्ड में मरीज और तीमारदार परेशान होते रहे।
रात करीब 8:30 बजे कस्बे के दीपू साहू को लेकर परिजन सीएचसी पहुंचे। सीढ़ियों से गिरने के कारण उनके सिर में गंभीर चोट आई थी। टॉर्च की रोशनी में फॉर्मासिस्ट ने टांके लगाए और उपचार किया।
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इलाज कराने आए छोटा रमना निवासी शोभित यादव, अमित, दीपेंद्र, पार्वती, विमलेश, जुगलकिशोर, मंजू आदि ने हो-हल्ला मचाकर जनरेटर चलाने के लिए कहा, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया।
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सीएचसी के प्रभारी अधीक्षक राजेश वर्मा ने कहा कि जनरेटर चलाया गया था लेकिन उसकी आपूर्ति महिला वार्ड में है। दूसरा जनरेटर कोविड अस्पताल में रखा है। रात 9:30 बजे बिजली आ गई थी। इससे पहले कुछ मरीजों का इलाज मोबाइल के टॉर्च की रोशनी में किया गया।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. डीके गर्ग का कहना है कि ट्रांसफॉर्मर फुंकने से सीएचसी चरखारी की बिजली आपूर्ति ठप हुई थी। नया ट्रांसफॉर्मर स्थापित होने और तेल गर्म होने में समय लगा। शाम सात बजे वह स्वयं सीएचसी गए थे। उनके सामने ही ट्रांसफॉर्मर स्थापित हुआ। जनरेटर चलाया गया था। इमरजेंसी और पुरुष वार्ड में जनरेटर से आपूर्ति न होने की जांच कराई जाएगी।