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महोबा : अलग बुंदेलखंड राज्य की मांग को लेकर खून से खत लिखेंगे बुंदेले
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महोबा। अलग राज्य बनाने की मांग को लेकर बुंदेलखंड के लोग कई बार खून से खत लिख चुके हैं। इस बार फिर जन्मदिन को खून लिखकर बधाई संदेश भेजेंगे। इस अभियान में बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर और जालौन के लोग शामिल रहेंगे।
बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने बताया कि खून से खत लिखो अभियान आल्हा चौक पर 16 सितंबर से चलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि बताया कि बुंदेली समाज के सदस्य पिछले तीन साल से प्रधानमंत्री को खून से खत लिख रहे हैं। इस बार भी बुंदेलखंड की ऐतिहासिक विरासतों व संस्कृति को बचाने के लिए अलग बुंदेलखंड राज्य बनाने की मांग की जाएगी।
संयोजक ने बताया कि देश आजाद होने के बाद 12 मार्च 1948 को नेहरू सरकार ने बघेलखंड को बुंदेलखंड में मिलाकर विंध्य प्रदेश बनाया था। प्रथम राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिश को खारिज करते हुए नेहरू सरकार ने एक नवंबर, 1955 को विंध्य प्रदेश के टुकड़े कर उत्तरप्रदेश व मध्यप्रदेश के बीच बांट दिया था। तब से बुंदेलखंड दोनों राज्यों के बीच पिस रहा है और विकास की दौड़ में बहुत पिछड़ गया। अलग राज्य के बिना यहां की तरक्की संभव नहीं है।
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बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने बताया कि खून से खत लिखो अभियान आल्हा चौक पर 16 सितंबर से चलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि बताया कि बुंदेली समाज के सदस्य पिछले तीन साल से प्रधानमंत्री को खून से खत लिख रहे हैं। इस बार भी बुंदेलखंड की ऐतिहासिक विरासतों व संस्कृति को बचाने के लिए अलग बुंदेलखंड राज्य बनाने की मांग की जाएगी।
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संयोजक ने बताया कि देश आजाद होने के बाद 12 मार्च 1948 को नेहरू सरकार ने बघेलखंड को बुंदेलखंड में मिलाकर विंध्य प्रदेश बनाया था। प्रथम राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिश को खारिज करते हुए नेहरू सरकार ने एक नवंबर, 1955 को विंध्य प्रदेश के टुकड़े कर उत्तरप्रदेश व मध्यप्रदेश के बीच बांट दिया था। तब से बुंदेलखंड दोनों राज्यों के बीच पिस रहा है और विकास की दौड़ में बहुत पिछड़ गया। अलग राज्य के बिना यहां की तरक्की संभव नहीं है।
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