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साइकिल से घरों को जा रहे श्रमिक
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सड़क किनारे खाना खाते श्रमिक
- फोटो : MAHOBA
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वैश्विक कोरोना महामारी के चलते विभिन्न प्रांतों से आ रहे श्रमिकों को कुलपहाड़ और श्रीनगर बॉर्डर में रोककर उनकी जांच कराई गई।
श्रीनगर बॉर्डर और कुलपहाड़ में श्रमिकों को भोजन कराने के बाद घरों की तरफ रवाना किया गया। तमाम श्रमिक दो पहिया और साइकिलों से भी घरों की तरफ निकल पड़े।
श्रीनगर में गुजरात, महाराष्ट्र व आंध्रप्रदेश से सैकड़ों की संख्या में दो दिन तक पैदल चलने के बाद पिकअप से घरों की तरफ लौटे श्रमिकों को श्रीनगर के पास यूपी-एमपी बॉर्डर पर रोक लिया गया।
जहां पर सभी श्रमिकों की थर्मल स्क्रीनिंग कराई गई। गोरखपुर, प्रतापगढ़, संत कबीरनगर व बस्ती के श्रमिक रवाना होने के बाद खुश नजर आए।
कुलपहाड़ में गाजियाबाद से आए करीब दो दर्जन श्रमिकों को कुलपहाड़ में रोक लिया गया। जहां पर उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।
स्वास्थ्य परीक्षण के बाद उन्हें घर पर ही क्वारंटीन करने की सलाह देकर घर के लिए रवाना किया गया।
लॉकडाउन के चलते रोजी-रोटी छिनने से भूखे श्रमिक घरों की तरफ भाग रहे हैं। कोई साधन न मिलने पर एक दर्जन श्रमिक महाराष्ट्र के नासिक से साइकिलों से निकल लिए। बुरी तरह थक चुके श्रमिकों को कुलपहाड़ में रोककर उन्हें खाना खिलाया गया। रामप्रसाद, कामता, नीरज, दयाराम, किशनपाल ने बताया कि वह एक पाइप कंपनी में काम करते थे। संकट के समय में एक माह तक मालिक ने खाना खिलाया।
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श्रीनगर बॉर्डर और कुलपहाड़ में श्रमिकों को भोजन कराने के बाद घरों की तरफ रवाना किया गया। तमाम श्रमिक दो पहिया और साइकिलों से भी घरों की तरफ निकल पड़े।
श्रीनगर में गुजरात, महाराष्ट्र व आंध्रप्रदेश से सैकड़ों की संख्या में दो दिन तक पैदल चलने के बाद पिकअप से घरों की तरफ लौटे श्रमिकों को श्रीनगर के पास यूपी-एमपी बॉर्डर पर रोक लिया गया।
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जहां पर सभी श्रमिकों की थर्मल स्क्रीनिंग कराई गई। गोरखपुर, प्रतापगढ़, संत कबीरनगर व बस्ती के श्रमिक रवाना होने के बाद खुश नजर आए।
कुलपहाड़ में गाजियाबाद से आए करीब दो दर्जन श्रमिकों को कुलपहाड़ में रोक लिया गया। जहां पर उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।
स्वास्थ्य परीक्षण के बाद उन्हें घर पर ही क्वारंटीन करने की सलाह देकर घर के लिए रवाना किया गया।
लॉकडाउन के चलते रोजी-रोटी छिनने से भूखे श्रमिक घरों की तरफ भाग रहे हैं। कोई साधन न मिलने पर एक दर्जन श्रमिक महाराष्ट्र के नासिक से साइकिलों से निकल लिए। बुरी तरह थक चुके श्रमिकों को कुलपहाड़ में रोककर उन्हें खाना खिलाया गया। रामप्रसाद, कामता, नीरज, दयाराम, किशनपाल ने बताया कि वह एक पाइप कंपनी में काम करते थे। संकट के समय में एक माह तक मालिक ने खाना खिलाया।
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