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जिला अस्पताल में नहीं हो रहीं जांचे, प्राइवेट पैथालॉजी का सहारा बना मजबूरी
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जिला अस्पताल की पैथालॉजी में ठप पड़ा जांच कार्य
- फोटो : MAHOBA
महोबा। जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं सुधरने की बजाय और बदतर होती जा रही हैं। डॉक्टरों व कर्मचारियों की भारी कमी से जूझ रहे जिला अस्पताल की पैथालॉजी में तैनात सात प्राइवेट कंपनी के कर्मचारियों को हटा दिए जाने से जांच कार्य ठप हो गया है। मजबूरी में लोग प्राइवेट पैथालॉजी का सहारा ले रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले मरीज पैसे के अभाव में बिना जांच के ही वापस लौटने को मजबूर हैं। जिससे मरीजों व तीमारदारों खासी नाराजगी दिखी।
जिला अस्पताल में डॉक्टरों व कर्मचारियों का भारी टोटा है। इससे पीओसीटी से कर्मचारियों से काम कराया जा रहा था। जिला अस्पताल की पैथालॉजी में प्राइवेट कंपनी के सात कर्मचारी कार्यरत थे। जिन्हें शासन के निर्देश पर एक मार्च से हटा दिया गया। जांच कार्य प्रभावित होने पर किसी तरह काम चलाया जाता रहा, लेकिन शासन ने दोबारा पत्र जारी करके कर्मचारियों से काम न लेने का आदेश दिया है। जिससे वर्तमान में जिला अस्पताल की पैथालाजी में महज एक सरकारी कर्मचारी ही शेष बचा है। जिससे प्रतिदिन एक सैकड़ा से अधिक मरीजों की होने वाली विभिन्न जांचें प्रभावित हो रहीं हैं।
देश में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को लेकर लोगों में भय हैं। ऐसे समय में जांचें और महत्वपूर्ण हो गई हैं लेकिन जिला अस्पताल में जांच कार्य ठप हो जाने से मरीज परेशान हैं। प्राइवेट पैथालॉजी में मरीजों को जांच के नाम पर अधिक जेब ढीली करनी पड़ रही है। यही वजह है कि गरीब तबके के मरीज बाहर से जांचे नहीं करा पा रहे हैं। जिला अस्पताल में गुरुवार को पहुंचे मरीज कर्मचारियों के अभाव में जांच कार्य ठप होने से मायूस होकर वापस लौटने को मजबूर दिखे। इक्का-दुक्का मरीजों की टाईफाइड की जांच ही की गई। व्यवस्था कब पटरी पर लौटेगी इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
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इनसेट
शासन के आदेश पर पीओसीटी के कर्मचारियों को हटाया गया है। पैथालाजी में सात कर्मचारियों को एक साथ हटाए जाने से जांच कार्य प्रभावित हुआ है। शासन स्तर पर कर्मचारियों की कमी होने का पत्र लिखा गया है। जिला अस्पताल में कर्मचारियों की भारी कमी है। किसी तरह काम चलाया जा रहा है। जल्द ही पैथालॉजी की व्यवस्थाओं में सुधार कराया जाएगा।
डॉ. आरपी मिश्रा, सीएमएस, जिला अस्पताल
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जिला अस्पताल में डॉक्टरों व कर्मचारियों का भारी टोटा है। इससे पीओसीटी से कर्मचारियों से काम कराया जा रहा था। जिला अस्पताल की पैथालॉजी में प्राइवेट कंपनी के सात कर्मचारी कार्यरत थे। जिन्हें शासन के निर्देश पर एक मार्च से हटा दिया गया। जांच कार्य प्रभावित होने पर किसी तरह काम चलाया जाता रहा, लेकिन शासन ने दोबारा पत्र जारी करके कर्मचारियों से काम न लेने का आदेश दिया है। जिससे वर्तमान में जिला अस्पताल की पैथालाजी में महज एक सरकारी कर्मचारी ही शेष बचा है। जिससे प्रतिदिन एक सैकड़ा से अधिक मरीजों की होने वाली विभिन्न जांचें प्रभावित हो रहीं हैं।
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देश में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को लेकर लोगों में भय हैं। ऐसे समय में जांचें और महत्वपूर्ण हो गई हैं लेकिन जिला अस्पताल में जांच कार्य ठप हो जाने से मरीज परेशान हैं। प्राइवेट पैथालॉजी में मरीजों को जांच के नाम पर अधिक जेब ढीली करनी पड़ रही है। यही वजह है कि गरीब तबके के मरीज बाहर से जांचे नहीं करा पा रहे हैं। जिला अस्पताल में गुरुवार को पहुंचे मरीज कर्मचारियों के अभाव में जांच कार्य ठप होने से मायूस होकर वापस लौटने को मजबूर दिखे। इक्का-दुक्का मरीजों की टाईफाइड की जांच ही की गई। व्यवस्था कब पटरी पर लौटेगी इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
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शासन के आदेश पर पीओसीटी के कर्मचारियों को हटाया गया है। पैथालाजी में सात कर्मचारियों को एक साथ हटाए जाने से जांच कार्य प्रभावित हुआ है। शासन स्तर पर कर्मचारियों की कमी होने का पत्र लिखा गया है। जिला अस्पताल में कर्मचारियों की भारी कमी है। किसी तरह काम चलाया जा रहा है। जल्द ही पैथालॉजी की व्यवस्थाओं में सुधार कराया जाएगा।
डॉ. आरपी मिश्रा, सीएमएस, जिला अस्पताल