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सैकड़ों लोगों की बचाई जान, फिर देनी पड़ी कुर्बानी
ब्यूरो/अमर उजाला, महोबा
Updated Sat, 01 Apr 2017 11:37 PM IST
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-पेड़ काटने के बाद पलट गई बोगियां
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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झांसी मानिकपुर रेलवे ट्रैक में लाड़पुर के पास 30 मार्च को सुबह ढाई बजे बेपटरी हुई महाकौशल एक्सप्रेस की सात बोगियों में सवार सैकड़ों लोगों की जान बचाने वाले पेड़ को आखिरकर काटना पड़ा। बोगी हटाने के लिए जैसे ही पेड़ काटा गया तो पहिया ऊपर हो गए।
30 मार्च को तड़के लाड़पुर के पास तेज झटके के साथ ही महाकौशल एक्सप्रेस की सात बोगियां पटरी से उतरकर गई थी। इस दौरान बोगियां ट्रैक किनारे लगे मिट्टी के ढेर और बबूल के पेड़ से टिक गई थी। इस भीषण हादसे में 50 यात्री घायल हो गए थे। घटना के समय सातों बोगियों में करीब पांच सौ यात्री सवार थे।
किसी के भी हताहत न होने पर लोग बबूल के पेड़ और मिट्टी को संकटमोचक मान रहे थे। लोगों का कहना था कि यदि पेड़ और मिट्टी न होती तो बोगियां काफी दूर तक पलटती चली जाती। इससे कई लोगों की जान जा सकती थी।
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शनिवार को रेलवे ट्रैक के किनारे पड़ी बोगियों को मशीनों से हटाने का काम चलता रहा। पेड़ से टिकी बोगी नही हटी। तब रेलवे कर्मचारियों ने बबूल का पेड़ काट दिया और बोगी को वहां से अलग किया। मौके पर मौजूद रामप्रकाश, देवीदीन, प्रमोद आदि लोगों का कहना था कि जिस पेड़ ने सैकड़ों लोगों की जिंदगी बचाई उसी पेड़ को काटकर अलग किया गया।
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30 मार्च को तड़के लाड़पुर के पास तेज झटके के साथ ही महाकौशल एक्सप्रेस की सात बोगियां पटरी से उतरकर गई थी। इस दौरान बोगियां ट्रैक किनारे लगे मिट्टी के ढेर और बबूल के पेड़ से टिक गई थी। इस भीषण हादसे में 50 यात्री घायल हो गए थे। घटना के समय सातों बोगियों में करीब पांच सौ यात्री सवार थे।
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किसी के भी हताहत न होने पर लोग बबूल के पेड़ और मिट्टी को संकटमोचक मान रहे थे। लोगों का कहना था कि यदि पेड़ और मिट्टी न होती तो बोगियां काफी दूर तक पलटती चली जाती। इससे कई लोगों की जान जा सकती थी।
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शनिवार को रेलवे ट्रैक के किनारे पड़ी बोगियों को मशीनों से हटाने का काम चलता रहा। पेड़ से टिकी बोगी नही हटी। तब रेलवे कर्मचारियों ने बबूल का पेड़ काट दिया और बोगी को वहां से अलग किया। मौके पर मौजूद रामप्रकाश, देवीदीन, प्रमोद आदि लोगों का कहना था कि जिस पेड़ ने सैकड़ों लोगों की जिंदगी बचाई उसी पेड़ को काटकर अलग किया गया।