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Mahoba News: एक साथ उठीं चार अर्थियां, हर आंख नम

Tue, 16 Dec 2025 12:01 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा Updated Tue, 16 Dec 2025 12:01 AM IST
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Four funeral pyres were lit simultaneously; every eye was filled with tears.Four funeral pyres were lit simultaneously; every eye was filled with tears.
फोटो 15 एमएएचपी 12 परिचय-ग्योड़ी गांव में एक साथ चार अ​र्थियां उठने पर गमगीन माहौल में शामिल हु
महोबा। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे में बस की टक्कर से बोलेरो सवार एक ही परिवार के चार लोगों की रविवार को मौत होने के बाद सोमवार को सभी के शव ग्योड़ी गांव पहुंचे। एक साथ चार अर्थियां उठने पर हर व्यक्ति की आंखों से आंसू छलक पड़े। रोते-बिलखते परिजनों के बीच आसपास के गांवों के लोग भी इस सामूहिक अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पहुंचे। सोमवार को पूरे दिन इस हादसे में दिवंगत हुए लोगों के परिवारों के पालन-पोषण की चिंता भरी बातें गांव के हर व्यक्ति की जुबां पर रही।
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थाना खन्ना के ग्योड़ी गांव के जमुनीपुरा डेरा निवासी महिला अनुसुइया की बीमारी के चलते 11 दिसंबर को मौत हो गई थी। उसकी अस्थियां गंगा में विसर्जित करने के लिए परिवार के लोग रविवार को प्रयागराज जा रहे थे। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे में हमीरपुर के पास बोलेरो में पीछे से आ रही स्लीपर बस ने टक्कर मार दी थी। इससे अनुसुइया के बेटे घनश्याम व रामसहोदर, उसके चाचा सिद्धगोपाल व भतीजे सोनू की मौत हो गई थी। चारों के शव ग्योड़ी गांव पहुंचे तो परिवार की महिलाओं में रोना शुरू हो गया। रिश्तेदार और ग्रामीण ढांढस बंधाते रहे। महिलाएं बेसुध होकर गिर पड़ीं तो बच्चे संभालते नजर आए। चारों की अर्थियां एक साथ लगीं। जब शवों को इनमें रखकर अंतिम संस्कार के लिए निकलने लगे तो इनसे लिपटकर परिजन रोते रहे। जिसने भी इस दृश्य को देखा, वह बिना रोये नहीं रह सका। इनकी अंतिम यात्रा में गांव के हर घर से लोग शामिल हुए। कई अन्य गांवों के लोग भी यहां पहुंचे। नम आंखों के बीच चारों शवों को मुखाग्नि दी गई।
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रोते-रोते सूख गया आंखों का पानी, जब सजीं अर्थियां तो बेसुध हो गए परिजन
महोबा। ग्योड़ी गांव में रविवार की रात से मची चीख-पुकार सुबह तक नहीं थमी। जिसने अपना पति और पिता खोया रोते-रोते उनकी आंखों का पानी सूख गया। सुबह जब अंतिम संस्कार की तैयारियां हो रही थीं, तब मृतक घनश्याम की पत्नी जयदेवी बेहोश हो गई। लोगों ने उसे अपने बेटे अनिल और विमल को देखकर जीने की बात कहकर ढांढस बंधाया। मृतक रामसहोदर की पत्नी शांति रात से ही अपनी बेटियों किरन, लक्ष्मी की शादी की चिंता जताते हुए रो रही थी। पति के शव के अंतिम दर्शन के समय वह बेहोश हो गई। बेटियों ने ही उसे सहारा दिया। सिद्धगोपाल की पत्नी देवरती की तबीयत रात से बिगड़ने लगी थी। बेटे सुनील और रणधीर कभी अपनी मां को संभालते तो कभी खुद ही पिता की अर्थी देखकर रो पड़ते। सबसे ज्यादा स्थिति तो मृतक सोनू की पत्नी ममता की थी। वह कभी अपनी छोटी-छोटी दो बेटियों प्रतीक्षा व दीक्षा और बेटे सौरभ को देखती तो कभी दहाड़ें मारकर पति के शव से लिपट जाती। परिवार के इकलौते कमाने वाले सोनू की पत्नी ममता बार-बार कह रही थी कि कोई तो कह दे कि सोनू की मौत की खबर झूठी है। उसका पति अभी उठ जाएगा। ये करुण रुदन देखकर यहां मौजूद हर व्यक्ति के आंखों से आंसू निकल पड़े। छोटे-छोटे बच्चों को तो समझ में ही नहीं आ रहा था कि उनके सिर से अब पिता का साया उठ चुका है।

फोटो 15 एमएएचपी 12 परिचय-ग्योड़ी गांव में एक साथ चार अर्थियां उठने पर गमगीन माहौल में शामिल हु

फोटो 15 एमएएचपी 12 परिचय-ग्योड़ी गांव में एक साथ चार अर्थियां उठने पर गमगीन माहौल में शामिल हु

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