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Mahoba News: एक साथ चार मौतों से मातम, पूरे गांव के नहीं जले चूल्हे
Mon, 15 Dec 2025 12:16 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
Updated Mon, 15 Dec 2025 12:16 AM IST
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फोटो 14 एमएएचपी 13 परिचय-घटना के बाद घर के दरवाजे पर रोती-बिलखतीं महिलाओं को ढ़ांढस बंधाते परिज
महोबा। थाना खन्ना के ग्योड़ी गांव में मां अनुसुइया की माैत के चार दिन बाद अस्थियों के विसर्जन के लिए रविवार की सुबह बोलेरो में सवार होकर तीन भाई घनश्याम, रामसहोदर, राधेश्याम, चचेरे भाई आशाराम, चाचा सिद्धगोपाल और भतीजा सोनू प्रयागराज के लिए रवाना हुए। घनश्याम का बेटा विमल बोलेरो चला रहा था और दूसरी ओर महिलाएं घर की शुद्धता के लिए साफ-सफाई की तैयारी कर रही थीं। इसी बीच घर के एक मोबाइल फोन पर कॉल आई। कॉल उठाई तो कांपती हुई आवाज में चचेरे भाई आशाराम ने दुर्घटना के बारे में जानकारी दी। एक बार तो परिजनों को विश्वास नहीं हुआ लेकिन जब आशाराम ने घनश्याम, रामसहोदर और सिद्धगोपाल की मौत और बाकी लोगों के घायल होने की जानकारी दी तो उनके होश उड़ गए। पहले से वृद्ध मां की मौत का गम झेल रहे परिजनों पर जैसे दुखों का पहाड़ ही टूट पड़ा। जैसे-जैसे गांव के लोगों को घटना की सूचना मिलती गई, लोगों का हुजूम एकत्र हो गया।
चार मौतों के बाद गांव में ऐसा मातम पसरा कि पूरे गांव के घरों में रविवार को चूल्हे नहीं जले। गांव का हर एक व्यक्ति इस ह्रदयविदारक घटना के बाद दुखी नजर आया। दोपहर में लोगों को घायल सोनू की भी मौत होने की सूचना मिली तो सोनू की पत्नी ममता बेहोश हो गई। बमुश्किल ही उसे होश आया। गांव के लोग इस घटना में घायल हुए अन्य लोगों के इलाज और मदद के लिए रवाना हुए। जिस ग्योड़ी गांव में पांच दिवसीय मेले के चलते एक दिन पहले तक धूमधाम थी, लोगों के घरों में मेहमान रुके थे और खुशियां मनाई जा रही थीं, उसी गांव में रविवार की शाम सन्नाटा पसरा दिखाई दिया।
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चार मौतों के बाद गांव में ऐसा मातम पसरा कि पूरे गांव के घरों में रविवार को चूल्हे नहीं जले। गांव का हर एक व्यक्ति इस ह्रदयविदारक घटना के बाद दुखी नजर आया। दोपहर में लोगों को घायल सोनू की भी मौत होने की सूचना मिली तो सोनू की पत्नी ममता बेहोश हो गई। बमुश्किल ही उसे होश आया। गांव के लोग इस घटना में घायल हुए अन्य लोगों के इलाज और मदद के लिए रवाना हुए। जिस ग्योड़ी गांव में पांच दिवसीय मेले के चलते एक दिन पहले तक धूमधाम थी, लोगों के घरों में मेहमान रुके थे और खुशियां मनाई जा रही थीं, उसी गांव में रविवार की शाम सन्नाटा पसरा दिखाई दिया।
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