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फसल के अवशेष जलाने पर होगी एफआईआर
ब्यूरो/अमर उजाला, महोबा
Updated Mon, 27 Feb 2017 11:11 PM IST
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आतिशबाजी बनाते समय विस्फोट मामले की जांच करती पुलिस
- फोटो : Amar Ujala
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हार्वेस्टिंग मशीन से फसल की कटाई कराकर फसल के अवशेष खेत में जलाने वाले किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होगी। इसको लेकर शासन के मुख्य सचिव ने जिलाधिकारी को आदेश जारी किए है। साथ ही आदेश का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश दिए है। ताकि खेतों में अवशेष जलाने से वायु प्रदूषण न बढ़े और भूमि की उर्वरा शक्ति भी कायम रह सके।
कृषि अवशेष के जलाने से होने वाली समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने कृषि अवशेष जलाने पर रोक लगा दी है। मुख्य सचिव राहुल भटनागर ने आदेश का पालन न करने वालों पर कड़ाई से पालन कराने के निर्देश दिए है। आदेश में कहा है कि हार्वेस्टिंग मशीन से फसल की कटाई के बाद बचे अवशेष को जलाने न दिया जाए। उससे निकलने वाले अवशेष से खाद का निर्माण किया जाए। कृषि अवशेष को जलाने वालों से जुर्माना वसूलते हुए एफआईआर दर्ज की जाए।
मुख्य विकास अधिकारी शंकरलाल त्रिपाठी ने बताया कि गेहूं की कटाई के बाद खेतों में शेष बचे अवशेष जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है। इससे लोगों को सांस लेने में दिक्कत होती है। उन्होंने फसलों की कटाई के बाद शेष अवशेषों को एक स्थान पर गड्ढ़ा खोदकर मिट्टी में दबा दिया जाए या मिट्टी पलटने वाले हल से जुताई की जाए। इससे अवशेष सड़कर खाद में परिवर्तित हो जाएंगे और भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी।
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कृषि अवशेष के जलाने से होने वाली समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने कृषि अवशेष जलाने पर रोक लगा दी है। मुख्य सचिव राहुल भटनागर ने आदेश का पालन न करने वालों पर कड़ाई से पालन कराने के निर्देश दिए है। आदेश में कहा है कि हार्वेस्टिंग मशीन से फसल की कटाई के बाद बचे अवशेष को जलाने न दिया जाए। उससे निकलने वाले अवशेष से खाद का निर्माण किया जाए। कृषि अवशेष को जलाने वालों से जुर्माना वसूलते हुए एफआईआर दर्ज की जाए।
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मुख्य विकास अधिकारी शंकरलाल त्रिपाठी ने बताया कि गेहूं की कटाई के बाद खेतों में शेष बचे अवशेष जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है। इससे लोगों को सांस लेने में दिक्कत होती है। उन्होंने फसलों की कटाई के बाद शेष अवशेषों को एक स्थान पर गड्ढ़ा खोदकर मिट्टी में दबा दिया जाए या मिट्टी पलटने वाले हल से जुताई की जाए। इससे अवशेष सड़कर खाद में परिवर्तित हो जाएंगे और भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी।
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