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वायरल बुखार से किशोरी समेत सात लोगों की और मौत
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महोबा। जिले में वायरल बुखार का कहर थम नहीं रहा है। सोमवार को तेज बुखार व पेटदर्द से पीड़ित किशोरी समेत सात लोगों की मौत हो गई। रविवार को अलग-अलग जगह चार लोगों की जान गई थी। तमाम लोग बीमारी की चपेट में हैं, जो प्राइवेट डॉक्टरों के यहां इलाज करा रहे हैं।
सोमवार को तेज बुखार से पीड़ित मटौंध निवासी आबिदा (55), ऊदल चौक निवासी खूबचंद्र (80), लेवा निवासी बाला प्रसाद (65), घुटवई निवासी प्रभुदयाल (65), भटीपुरा निवासी विशाल (75), कहरा निवासी संतोष (70) व सिरसीकला गांव निवासी भगवती (17) की जिला अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई।
तेज बुखार, पेटदर्द व खांसी जुकाम के मरीजों की इस समय भरमार है। सरकारी अस्पतालों की ओपीडी बंद होने से प्राइवेट क्लीनिकों में मरीजों की सुबह से भीड़ जुट रही है। एक सप्ताह के अंदर 20 से अधिक लोग वायरल बुखार से दम तोड़ चुके हैं। हाल यह है कि हर घर में एक-दो बुखार व खांसी-जुकाम के मरीज हैं।
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वहीं, जिला अस्पताल व स्वास्थ्य केंद्रों में ओपीडी सेवाएं बंद होने से मरीजों के सामने इलाज की समस्या खड़ी हो गई है। मजबूरी में लोग प्राइवेट डॉक्टरों से इलाज करा रहे हैं। उधर, बीमारी से मौत मानकर परिजन शव का पोस्टमार्टम भी नहीं करा रहे हैं। इससे मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो रहा है।
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सोमवार को तेज बुखार से पीड़ित मटौंध निवासी आबिदा (55), ऊदल चौक निवासी खूबचंद्र (80), लेवा निवासी बाला प्रसाद (65), घुटवई निवासी प्रभुदयाल (65), भटीपुरा निवासी विशाल (75), कहरा निवासी संतोष (70) व सिरसीकला गांव निवासी भगवती (17) की जिला अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई।
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तेज बुखार, पेटदर्द व खांसी जुकाम के मरीजों की इस समय भरमार है। सरकारी अस्पतालों की ओपीडी बंद होने से प्राइवेट क्लीनिकों में मरीजों की सुबह से भीड़ जुट रही है। एक सप्ताह के अंदर 20 से अधिक लोग वायरल बुखार से दम तोड़ चुके हैं। हाल यह है कि हर घर में एक-दो बुखार व खांसी-जुकाम के मरीज हैं।
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वहीं, जिला अस्पताल व स्वास्थ्य केंद्रों में ओपीडी सेवाएं बंद होने से मरीजों के सामने इलाज की समस्या खड़ी हो गई है। मजबूरी में लोग प्राइवेट डॉक्टरों से इलाज करा रहे हैं। उधर, बीमारी से मौत मानकर परिजन शव का पोस्टमार्टम भी नहीं करा रहे हैं। इससे मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो रहा है।