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बेटी को गोद में लेकर घंटों भटकता रहा पिता, नही मिला इलाज

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Thu, 07 May 2020 03:46 PM IST
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Father wandered for hours with daughter in his lap, did not get treatment
संवाद न्यूज एजेंसी महोबा। जिला अस्पताल के दो स्वास्थ्य कर्मियों के कोरोना पॉजिटिव मिलने के बाद शहर को तीन किमी तक हॉटस्पॉट एरिया में तब्दील कर दिया गया है। जिला अस्पताल व इमरजेंसी वार्ड के अलावा प्राइवेट क्नीनिक व मेडिकल भी बंद करा दिए गए हैं। ऐसे हालात में अचानक मासूम बेटी की हालत बिगड़ने पर पिता रात में घंटों गोद में लिए भटकता रहा लेकिन इलाज नही मिला। थक हारकर एक प्राइवेट चिकित्सक से आरजू-मिन्नत की। तब उपचार के बाद मासूम को आराम मिल सका। शहर के मोहल्ला हवेली दरवाजा निवासी महेंद्र प्रताप सिंह राना की चार वर्षीय मासूम बेटी अनका सिंह की बुधवार की रात करीब 11 बजे अचानक हालत बिगड़ गई। पेट में तेज दर्द व बुखार होने पर पिता सबसे पहले जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड लेकर पहुंचा लेकिन अस्पताल बंद मिला। तब रास्ते में मिले एंबुलेंस चालक ने बताया कि प्रशासन ने अस्थाई व्यवस्था के लिए नगरीय स्वास्थ्य केंद्र भटीपुरा में 24 घंटे इमरजेंसी सेवा शुरू की है। जब पिता भटकते हुए नगरीय स्वास्थ्य केंद्र पहुंचा तो वहां कोई डॉक्टर मौजूद नहीं मिला। पूरे शहर में घूमने के बाद पिता उदास हो गया। इस दौरान बेटी की हालत लगातार बिगड़ती गई। तब उसने अपने मित्रों का सहारा लिया और किसी प्राइवेट चिकित्सक से संपर्क करने की बात कही। कई बार फोन करने और घर जाने पर एक प्राइवेट चिकित्सक का दिल पसीज गया। उसने मासूम का उपचार कर दवा दी। दो घंटे बाद मासूम को आराम मिलने पर परिजनों ने राहत महसूस की। जिला प्रशासन की इस अव्यवस्था को लेकर मासूम के पिता ने सोशल मीडिया में पोस्ट डालकर नाराजगी जताई। साथ ही इस उदासीनता के लिए यहां के जनप्रतिनिधियों को दोषी ठहराया। उधर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुमन का कहना है कि डॉक्टरों को 24 घंटे नगरीय स्वास्थ्य केंद्र में रहने के निर्देश दिए गए हैं। फिर भी वह संबंधित डॉक्टर से वार्ता कर सख्त हिदायत देगी। मरीजों को हर समय इलाज मुुुहैया कराया जाएगा। इंसेट एक भी मेडिकल संचालक नहीं कर रहा दवा की होम डिलीवरी हॉटस्पॉट क्षेत्र में जिला प्रशासन ने आठ मेडिकल स्टोरों की सूची व मोबाइल नंबर जारी कर दवाओं की होम डिलीवरी किए जाने के निर्देश दिए हैं लेकिन एक भी मेडिकल संचालक होम डिलीवरी नहीं कर रहा है। जिससे नियमित दवाओं का सेवन करने वाले गंभीर बीमारी के मरीज परेशान हैं। वही मेडिकल संचालकों का कहना है कि पुलिस प्रशासन मेडिकल खोलने नहीं दे रहा है। जब मेडिकल से दवा ही निकालने नहीं दी जा रही तो वह होम डिलीवरी कैसे करेंगे। ऐसे में बीमार होने वाले लोगों की जिंदगी भगवान भरोसे हो गई है।
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