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निस्पादित 64 पट्टों ने पत्थर कारोबार में फूंकी जान

Thu, 14 Mar 2019 10:47 PM IST
mahoba Published by: gaurav gaurav Updated Thu, 14 Mar 2019 10:47 PM IST
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Excluded 64 leases slit in stone business
खनन
 जिले में 64 पट्टों का निस्पादन हो जाने के बाद अब कच्चे माले की कमी और रॉयल्टी की समस्या से क्रशर व्यापारियों को राहत मिली है। साथ ही 75 फीसदी महोबा आने वाली बंद हो गई गाड़ियों का आवागमन फिर शुरू हो जाएगा। इससे पत्थर कारोबार भी बढ़ेगा और इस कारोबार से जुड़े सैकड़ों श्रमिकों को अब रोजगार मिलने के भी आसार बढ़ गए हैं।
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2018 में खनिज विभाग द्वारा 155 ई निविदा निकाली गई थी। इसमें से 100 निविदाएं स्वीकृत हुई थी, जिसमें से 74 पट्टाधारकों को पर्यावरण की एनओसी जारी कर दी गई और उन्हें सारे कागजात दाखिलकर बैनामा कराने के निर्देश दिए थे। इसमें से 74 लोगों ने बैनामे करा लिए थे। दस लोगों द्वारा बैनामा कराने के लिए स्टांप दाखिल नहीं किए गए। अब आचार संहिता लागू हो जाने के कारण उनकी रजिस्ट्री पर रोक लगा दी गई।
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 जिले में पूर्व में 350 पहाड़ों के खनन पट्टे थे। जहां पर खनन कार्य होता था। यहां कच्चे माले की कभी कमी आड़े नहीं आई। इससे प्रतिदिन जिले से चार हजार से पांच हजार गाड़ियां गिट्टी लेकर आती जाती रही, लेकिन पिछले एक साल के अंदर दिन-प्रतिदिन पहाड़ों के पट्टों की मियाद खत्म होती गई और उनका नवीनीकरण न किए जाने व महीनों नए पट्टों की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई। इससे पहाड़ पट्टों की संख्या 350 से घटकर 72 पर सिमट गई।
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इससे जिले में कच्चे माल की भारी कमी होने के साथ-साथ रायल्टी की समस्या पैदा हो गई। दूर दराज से गिट्टी लेने आने वाले ट्रक संचालकों को दो-दो दिन तक गिट्टी न मिलने के कारण हजारों ट्रक चालकों ने पत्थर मंडी झांसी की तरफ रुखकर लिया। इससे जिले के पत्थर कारोबार पर संकट छा गया था। अब 64 पट्टों के निस्पादन के बाद ट्रक चालकों व पत्थर कारोबारियों को राहत मिलेगी।




पत्थर मंडी कबरई में हजारों श्रमिक पत्थर कारोबार से जुड़ा हुआ है। बड़े पैमाने में पहाड़ बंद हो जाने से पत्थर कारोबार पर आए संकट के कारण पांच हजार से ज्यादा श्रमिक बेकार हो गए। श्रमिकों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया। पत्थर काम में स्पेशलिस्ट माने जाने वाले श्रमिकों को दूसरा काम रास नहीं आया। जिससे श्रमिक किसी तरह रोजी-रोटी की जुगाड़ के लिए इधर-उधर भटकने लगे। अब पहाड़ों के निस्पादन के बाद उन्हें रोजगार मिलने की संभावना बढ़ी है।
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